फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Rajesh Khanna Birth Anniversary: दर्शकों को आज भी याद हैं राजेश खन्ना के डायलॉग्स, मिलते हैं जिंदगी के सबक

Sun, 29 Dec 2024 08:30 AM IST
पूनम कंडारी एंटरटेनमेंट डेस्क, अमर उजाला

सार

मशहूर अभिनेता राजेश खन्ना की आज जयंती (29 दिसंबर 1942) है। बॉलीवुड में वह पहले सुपरस्टार कहलाए। राजेश खन्ना की फिल्में तो दर्शकों को भाती हैं, साथ ही उनकी फिल्मों के कई डायलॉग्स भी खूब मशहूर हुए। जानिए, ऐसे ही कुछ खास डायलॉग्स के बारे में। 
 
विज्ञापन
1 of 8
राजेश खन्ना - फोटो : अमर उजाला

राजेश खन्ना की फिल्में सिर्फ दर्शकों का मनोरंजन नहीं करती थीं, उनमें ऑडियंस के लिए संदेश भी हुआ करते थे। इसके अलावा अभिनेता की कई फिल्मों के डायलॉग्स भी खूब मशहूर हुए, इन डायलॉग्स में भी दर्शकों को जिंदगी के लिए गहरे सबक दिए गए हैं। जानिए, ऐसे ही कुछ खास डायलॉग्स के बारे में।   

विज्ञापन

2 of 8
फिल्म 'आनंद' का डायलॉग - फोटो : अमर उजाला
फिल्म आनंद (1971) में राजेश खन्ना ने एक बीमार व्यक्ति का किरदार निभाया था, जिसे पता है कि वह जल्द मर जाएगा लेकिन वह जिंदादिली से जिंदगी को जीता है। फिल्म में अमिताभ बच्चन ने भी अभिनय किया था। इस फिल्म के अधिकतर डायलॉग्स फेमस रहे हैं। लेकिन सबसे मशहूर डायलॉग ये है- 'बाबू मोशाय.. जिंदगी और मौत ऊपर वाले के हाथ है जहांपना…इसे न तो आप बदल सकते हैं न मैं.. हम सब तो रंगमंच की कठपुतलियां हैं जिनकी डोर ऊपर वाले की उंगलियों में बंधी है।' यह डायलॉग राजेश खन्ना का किरदार आनंद, अमिताभ बच्चन के किरदार से कहता है। आज भी यह डायलॉग दर्शकों के मन में बसा हुआ है क्योंकि इसमें जिंदगी को जीने का गहरा सबक छिपा है।
विज्ञापन

3 of 8
फिल्म 'आराधना' का डायलॉग - फोटो : अमर उजाला
फिल्म आराधना (1969) में राजेश खन्ना और शर्मिला टैगोर मुख्य भूमिकाओं में थे। यह फिल्म बॉक्स ऑफिस पर हिट रही। इस फिल्म का एक डायलॉग्स बहुत ही मशहूर है, जो इस तरह से है- ‘एक छोटा सा जख्म बहुत गहरा दाग बन सकता है और एक छोटी सी मुलाकात जीवन भर का साथ बन सकती है।’ यह डायलॉग फिल्म का हीरो, हीरोइन से कहता है।

Twinkle Khanna: राजेश खन्ना की बेटी और अक्षय कुमार की पत्नी, ट्विंकल खन्ना की मां का भी फिल्मों से गहरा नाता 

4 of 8
फिल्म 'अमर प्रेम' का डायलॉग - फोटो : अमर उजाला

फिल्म ‘अमर प्रेम (1972)’ का ‘पुष्पा, मुझसे ये आंसू नहीं देखे जाते, आई हेट टियर्स’ डायलॉग तो राजेश खन्ना की पहचान का अहम हिस्सा बन गया। आज भी जब राजेश खन्ना का नाम सुनाई पड़ता है तो ‘आई हेट टियर्स’ वाला डायलॉग ही सबसे पहले दर्शकों के मन में आता है। 

विज्ञापन

5 of 8
फिल्म 'बावर्ची' का डायलॉग - फोटो : अमर उजाला

फिल्म ‘बावर्ची (1972)’ राजेश खन्ना की एक शानदार फिल्म रही। इसमें भी जिंदगी के लिए बहुत से सबक हैं। एक डायलॉग इस फिल्म का है-‘किसी बड़ी खुशी के इंतजार में, हम ये छोटी-छोटी खुशियों के मौके खो देते हैं।’ यह डायलॉग जब राजेश खन्ना फिल्म में कहते हैं, तो लगता है कि दर्शकों को जिंदगी जीने का कारगर मंत्र दे रहे हैं।  

विज्ञापन

6 of 8
फिल्म 'रोटी' का डायलॉग - फोटो : अमर उजाला
फिल्म ‘रोटी (1974)’ का एक डायलॉग दर्शकों के मन को विचलित करने की क्षमता रखता है। आज भी इस डायलॉग में कही गई बातें, हमारे समाज की सच्चाई हैं। फिल्म ‘रोटी’ का यह डायलॉग है-‘इंसान को दिल दे, जिस्म दे, दिमाग दे लेकिन ये कमबख्त पेट मत दे, उसे पेट देता है तो उसे भूख मत दे, उसे भूख देता है तो दो वक्त की रोटी का इंतजाम करके भेज वरना तुझे इंसान को पैदा करने का कोई हक नहीं है।’ 
विज्ञापन

7 of 8
फिल्म 'अवतार' का डायलॉग - फोटो : अमर उजाला
फिल्म ‘अवतार (1983)’ में राजेश खन्ना का खुदार इंसान का किरदार दर्शकों को खूब पसंद आया। इसमें एक डायलॉग है-‘बड़ा आदमी तो वो होता है, जो दूसरों को छोटा नहीं समझता’, यह डायलॉग बताता है कि कोई भी इंसान बड़ा या छोटा नहीं होता है, सभी समान हैं।  
विज्ञापन

8 of 8
फिल्म 'हाथी मेरे साथी' का डायलॉग - फोटो : अमर उजाला
फिल्म ‘हाथी मेरे साथी (1971)’ में राजेश खन्ना ने हाथियों के साथ शूटिंग की थी। यह फिल्म इंसान और जानवरों के बीच के एक अलग तरह के गहरे लगाव की कहानी को कहती है। इसी फिल्म का एक डायलॉग है-‘इस दुनिया में दो टांग वाला जानवर सबसे खतरनाक जानवर है’। इस डायलॉग में राजेश खन्ना का किरदार ऐसे इंसानों की बात कर रहा है, जो बहुत ही खतरनाक हैं, उन्होंने ऐसे ही लोगों को सबसे खतरनाक जानवर कहा। आज भी इंसान के रूप में ऐसे लोग मौजूद हैं, जो अमानवीय काम करते हैं, इंसानियत को शर्मसार करते हैं।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें