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Punjab 95: जारी हुआ 'पंजाब 95' का फर्स्ट लुक, TIFF 2023 में होगा जसवंत सिंह खालरा की बायोपिक का प्रीमियर

Tue, 25 Jul 2023 11:17 AM IST
निधि पाल एंटरटेनमेंट डेस्क, अमर उजाला
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पंजाब 95 फिल्म फर्स्ट लुक - फोटो : इंस्टाग्राम
जसवंत सिंह खालरा की बायोपिक पिछले काफी समय से सुर्खियों में बनी हुई है। इस फिल्म में पंजाबी सिंगर-एक्टर दिलजीत दोसांझ लीड रोल में नजर आने वाले हैं। अब हाल ही में जसवंत सिंह खालरा की बायोपिक पंजाब 95 का पहला लुक जारी किया गया, जिसमें दिलजीत दोसांझ मानवाधिकार कार्यकर्ता जसवंत सिंह खालरा की भूमिका निभा रहे हैं। इस लुक का अनावरण रोनी स्क्रूवाला के प्रोडक्शन हाउस आरएसवीपी मूवीज ने सोमवार, 24 जुलाई की रात को किया। इस दौरान यह भी बताया गया कि फिल्म का प्रीमियर टोरंटो इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल 2023 में होगा।
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दिलजीत दोसांझ - फोटो : सोशल मीडिया
दिलजीत दोसांझ ने अपने सोशल मीडिया हैंडल पर फर्स्ट लुक साझा करते हुए लिखा, 'वाहेगुरुजी का खालसा वाहेगुरुजी की फतेह! टोरंटो इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल में वर्ल्ड प्रीमियर। पेश है पंजाब '95 का फर्स्ट लुक, मानवाधिकार कार्यकर्ता जसवंत सिंह खालरा जी के जीवन पर आधारित एक बेहतरीन कहानी।'

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दिलजीत दोसांझ - फोटो : सोशल मीडिया
बता दें कि कास्टिंग डायरेक्टर हनी त्रेहान द्वारा निर्देशित, पंजाब 95 में अर्जुन रामपाल और सुविंदर विक्की भी मुख्य भूमिकाओं में हैं, जिन्हें हाल ही में वेब सीरीज कोहरा में उनके अभिनय के लिए काफी सराहना मिली थी। बता दें कि शुरुआत में इस फिल्म का नाम घल्लूघारा था, यह फिल्म तभी से चर्चा में आ गई थी। बता दें कि फिल्म को लेकर सेंसर बोर्ड ने सर्टिफिकेट देने में छह महीने से ज्यादा का समय लगाया था और ए सर्टिफिटकेट के साथ 21 कट लगाए थे। जिसके बाद निर्माता सीबीएफसी के खिलाफ बॉम्बे हाईकोर्ट चले गए थे।

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दिलजीत दोसांझ,जसवंत सिंह खालरा - फोटो : social media
जसवन्त सिंह खालरा एक मानवाधिकार कार्यकर्ता थे जिन्होंने पुलिस द्वारा हजारों अज्ञात लोगों के अपहरण, हत्या और दाह संस्कार के सबूत खोजने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। 1980 के दशक के मध्य से 1990 के मध्य तक उग्रवाद के दौरान पंजाब में 25,000 अवैध दाह संस्कारों के संबंध में खालरा की जांच के बाद दुनिया भर में बहुत विरोध प्रदर्शनों हुआ था।
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जसवंत सिंह खालरा - फोटो : सोशल मीडिया
इसके बाद सीबीआई इस नतीजे पर पहुंची कि पंजाब पुलिस ने तरनतारन जिले में 2097 लोगों का गैरकानूनी तरीके से अंतिम संस्कार किया था। फिर खलरा गायब हो गए। शुरुआत में तो पंजाब पुलिस ने उनकी मौत को आत्महत्या माना लेकिन बाद में, खलरा के अपहरण और हत्या के लिए पंजाब पुलिस के छह अधिकारियों को दोषी ठहराया गया और सात साल की कैद की सजा सुनाई गई।
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