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Anek: अनुभव सिन्हा ने जताया आयुष्मान पर भरोसा, बोले, ‘अनेक’ की कहानी देश के किसी भी उपेक्षित प्रदेश की कहानी

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अनुभव सिन्हा - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई
निर्देशक अनुभव सिन्हा और अभिनेता आयुष्मान खुराना एक बार फिर साथ हैं। पिछली बार जब साथ आए थे तो दोनों ने मिलकर जाति व्यवस्था पर तीखी चोट की फिल्म ‘आर्टिकल 15’ में और इस फिल्म को न सिर्फ समीक्षकों और सिनेमा के सुधी दर्शकों ने जमकर सराहा बल्कि फिल्म ने बॉक्स ऑफिस पर भी 65 करोड़ रुपये का शानदार कारोबार किया। अब दोनों फिल्म ‘अनेक’ के बाद साथ आ रहे हैं। फिल्म ‘अनेक’ एकता में अनेकता जैसे बचपन से सिखाए जाने वाले पाठ को फिर से पढ़ने की कोशिश है और अनुभव के मुताबिक ये फिल्म हमें अपने भीतर झांकने पर मजबूर करती है। वह कहते हैं, ‘हम पूरे भारत को ना तो जानते हैं और ना जानने की कोशिश करते हैं। उत्तर पूर्व के सारे राज्यों के नाम तो लोगों को नहीं पता है। पता ही नहीं कि वह भी हमारे देश का ही अभिन्न हिस्सा है।’
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anubhav sinha
‘ये मेरा नया जन्म है’ निर्देशक अनुभव सिन्हा को चाहने वाले भी फिल्म ‘मुल्क’ से उनकी निर्देशन शैली में आए बदलाव को पसंद कर रहे हैं। इस फिल्म के बाद अनुभव सिन्हा ने एक के बाद एक ऐसी फिल्में बनाई हैं, जो न सिर्फ सोचने पर मजबूर करती हैं बल्कि मौजूदा सामाजिक राजनीतिक स्थिति पर तंज कसते हुए एक टिप्पणी भी करती हैं। बदले दौर के बदले अनुभव सिन्हा कहते हैं, ‘लोग कहते हैं कि फिल्म ‘मुल्क’ से मेरा पुनर्जन्म हुआ लेकिन मैं इसे अपना नया जन्म मानता हूं। मैं शुक्रगुजार हूं उन सारे लोगों का जिन्होंने मेरे सिनेमा को देखा, सराहा और लोगों के साथ अपनी पसंद को साझा किया। एक दूसरे से सुनकर ही लोग अब सिनेमा देखने जाते हैं और मुझे खुशी है कि मेरा सिनेमा आज की युवा पीढ़ी की सोच को सिनेमा में उतार पा रहा है।
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अनुभव सिन्हा, आयुष्मान खुराना - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई
फिल्म ‘मुल्क’ के बाद की तस्वीर
अनुभव सिन्हा के निर्देशन में बनी नई फिल्म  ‘अनेक’  27 जून को रिलीज हो रही है। अच्छा सिनेमा देखने वालों को इस फिल्म का बेसब्री से इंतजार है। अनुभव की पिछली फिल्मों ‘मुल्क’, ‘आर्टिकल 15’ और ‘थप्पड़’ की कामयाबी ने उन फिल्मकारों को एक नई हिम्मत और नया हौसला दिया है जो मसाला फिल्मों से इतर ऐसी फिल्में बनाना चाहते हैं जिनमें सामाजिक मुद्दों की बात हो और वह कारोबारी दृष्टि से भी सफल रहें। अनुभव सिन्हा अब एक व्यस्त निर्माता निर्देशक हैं, उनकी करीब 12 फिल्में निर्माण के विभिन्न चरणों में हैं। फिल्म  ‘मुल्क’ के बाद ये तस्वीर बदली है। वह कहते हैं, ‘नए जमाने के नए दर्शकों के लिए ये नया सिनेमा बहुत जरूरी है।

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अनुभव सिन्हा - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई
अच्छी कहानियों का समय
‘अमर उजाला’ से एक खास मुलाकात में अनुभव कहते हैं, ‘मुझे इन फिल्मों से आर्थिक फायदा हुआ हो या कि मैं बहुत बड़ा प्रोड्यूसर बन गया हूं, इस सब पर मेरा ध्यान नहीं जाता। और, न ही मैं इस सफलता को अपने ऊपर हावी ही होने देता हूं। हां, सबसे बड़ा फायदा जो मुझे हुआ है वह है कि अब अच्छी कहानियां चलकर मेरे पास आ रही हैं। मैंने लेखकों की अपनी एक टीम इस बीच बनाई है जिनके साथ पटकथाएं लिखने में मुझे सहूलियत होती है। मैं खुद भी इन दिनों तमाम कहानियां सोच पा रहा हूं। कहानियों के इस संकलन से मुझे आगे की दिशा निर्धारित करने में मदद मिलती है। लेकिन अपनी अगली फिल्म शुरू करने से पहले अब मैं थोड़ा आराम चाहता हूं।
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अनुभव सिन्हा - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई
विविधता में एकता, बर्ताव में लाने की बात
अनुभव सिन्हा की बतौर निर्देशक एक और फिल्म ‘भीड़’ की शूटिंग पूरी हो चुकी है। एक और फिल्म की शूटिंग वह सर्दियों में शुरू करने वाले थे लेकिन अब वह इसे अगले साल शुरू करेंगे। उससे पहले उनकी राजकुमार राव स्टारर फिल्म ‘भीड़’ नवंबर में रिलीज होगी। शुक्रवार को रिलीज हो रही फिल्म ‘अनेक’ की चर्चा चलने पर वह कहते हैं, ‘ये फिल्म उत्तर पूर्व की पृष्ठभूमि पर बनी जरूर है लेकिन इसकी कहानी किसी भी ऐसी जगह की हो सकती है जिसे हम भारत की मुख्यधारा का प्रदेश मानने को तैयार नहीं है। हमारी परवरिश ऐसी हुई है कि जो हमारे जैसा नहीं लगता उसे हम भारतीय ही नहीं मानते। फिल्म बस यही बात कहती है कि अनेकता में एकता वाली बात को सच की कसौटी पर कसने की जरूरत है। हम अपने देश को विविधताओं वाला देश अगर मानते हैं तो हमें इसे अपने बर्ताव में भी दिखाना होगा।’
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आयुष्मान खुराना - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई
युवाओं से सीधे जुड़ती है ‘अनेक’
आयुष्मान खुराना के साथ उनकी पिछली फिल्म ‘आर्टिकल 15’ ने रिलीज के पहले के किसी भी तरह के बड़े प्रचार के बावजूद बॉक्स ऑफिस पर 65 करोड़ रुपये कमाए थे। आयुष्मान खुराना को वैसे भी शनिवार के बाद का स्टार माना जाता है। ‘अनेक’ के बारे में अनुभव अपनी उम्मीदों के बारे में बताते हैं, ‘ये फिल्म जो बात कहती है, उससे आज के युवा सीधी तौर पर जुड़ सकेंगे। हमने जानबूझकर फिल्म के प्रचार को ऐसा रखा है। आयुष्मान खुराना फिल्म के बारे में बात कर रहे हैं। अपने किरदार की संजीदगी के साथ वह टेलीविजन शोज में भी जा रहे हैं। लेकिन, हम ऐसा कुछ नहीं करना चाहते जिससे फिल्म के विषय और इसके प्रचार के बीच तालमेल भटक जाए। ‘अनेक’ एक मनोरंजन से भरपूर संवेदनशील फिल्म है।’
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अनेक फिल्म - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई
सेंसर बोर्ड ने भी सराही फिल्म
सेंसर बोर्ड में फिल्म ‘अनेक’ को मिली तारीफ की चर्चाओं और फिल्म के कुछ दृश्यों में बदलाव का जिक्र चलने पर अनुभव बताते हैं, ‘फिल्म की शुरुआत में दिल्ली एनसीआर का एक दृश्य है जहां एक पब के मैनेजर और एक पुलिस वाले के बीच में वैसी ही बातचीत हो रही है जैसी कि आमतौर पर होती है। उनकी बातचीत के कुछ शब्द सेंसर बोर्ड ने बदलने की बात कही और मैंने उनकी बात मान ली। बाकी पूरी फिल्म हू ब हू वैसी ही है, दरअसल मुझे ज्यादा चिंता फिल्म के उन संवादों को लेकर थी, जिनमें सामाजिक राजनीतिक परिदृश्य की बात हो रही है। लेकिन वे सारे संवाद वैसे के वैसे ही हैं।’
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