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पुण्यतिथि: पृथ्वीराज कपूर के शादी के बाद लिए इस फैसले ने बदल दी थी उनकी जिंदगी

Wed, 29 May 2019 04:26 AM IST
अरविंद अरविंद एंटरटेनमेंट डेस्क, अमर उजाला
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prithviraj kapoor

हिंदी सिनेमा में मील का पत्थर कहे जाने वाले और कड़क व रौबदार आवाज के मालिक पृथ्वीराज कपूर आज के ही दिन 29 मई 1971 को दुनिया को अलविदा कह गए थे। उनका जन्म 3 नवंबर, 1906 में पाकिस्तान में हुआ था। वह भारतीय सिनेमा के 'युगपुरुष' भी कहे जाते  हैं। पृथ्वीराज से अब तक उनका खानदान बॉलीवुड में अपनी एक खास पहचान बनाए हुए है। फिल्म इंडस्ट्री में इन्हें 'पापाजी' के नाम से भी जाना जाता था। कहा जाता है कि वह अपने थिएटर में तीन घंटे के शो के बाद झोली फैलाकर खड़े हो जाते थे और दर्शक उनके अभिनय से खुश होकर कुछ पैसे उसमें डाला करते थे। गौरतलब है कि तत्कालीन प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू के विदेश में एक सांस्कृतिक कार्यक्रम की पेशकश भी उन्होंने यह कहकर टाल दी थी कि थिएटर का काम छोड़कर वह विदेश नहीं जा सकते हैं।
 

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पृथ्वीराज कपूर ने 18 वर्ष की उम्र में ही शादी रचा ली थी। जिसके बाद वर्ष 1928 में उन्होंने अपनी चाची से कुछ रुपयों की मदद ली और सपनों की नगरी कहे जाने वाले शहर मुंबई (बंबई) चले गए। पश्चिमी पंजाब के लायलपुर जो अब पाकिस्तान में, जन्में पृथ्वीराज कपूर अपने काम के प्रति बेहद समर्पित रहने वाले इंसान थे।

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Prithviraj Kapoor

बंबई आने के बाद दो साल तक उनका नाता रोजाना के संघर्षों से रहा। फिर धीरे-धीरे वे इम्पीरीयल फिल्म कंपनी से जुड़ने लगे। यहां से उनको फिल्मों में छोटे-छोटे रोल मिलना शुरू हो गए।  फिर साल 1929 में पृथ्वीराज को फिल्म 'सिनेमा गर्ल' में पहली बार लीड रोल करने का मौका मिला। इसके बाद वर्ष 1931 में प्रदर्शित फिल्म 'आलमआरा' में सहायक अभिनेता के रूप में काम करने का मौका मिला।
 

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Prithviraj Kapoor

वहीं, वर्ष 1934 में देवकी बोस की फिल्म 'सीता' से उन्हें अभिनय की दुनिया में पहचाना जाने लगा। रंजीत मूवी के बैनर तले वर्ष 1940 में फिल्म 'पागल' में पृथ्वीराज पहली बार निगेटिव किरदार में देखे गए। इसके बाद वर्ष 1941 में सोहराब मोदी की फिल्म 'सिकंदर' आई, इस फिल्म ने उन्हें कामयाबी के शिखर पर ला खड़ा किया। इसके अलावा उन्होंने 'दो धारी तलवार', 'शेर ए पंजाब' और 'प्रिंस राजकुमार' जैसी नौ मूक फिल्मों में अपने अभिनय को तराशा। 

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बॉलीवुड - फोटो : सोशल मीडिया

पृथ्वीराज कपूर ने फिल्म इंडस्ट्री में जब खुद को स्थापित कर लिया तो उन्होंने वर्ष 1944 में खुद की थिएटर कंपनी 'पृथ्वी थिएटर' शुरू कर दी। बता दें कि 16 सालों में करीब 2662 शो हुए जिनमें पृथ्वीराज कपूर ने मुख्य किरदार निभाया। उनके पिता बसहेश्वरनाथ नाथ कपूर भी एक्टिंग करते थे।

'पृथ्वी थिएटर' में पहला शो कालिदास का मशहूर नाटक 'अभिज्ञान शाकुंतलम' पेश किया गया था। साल 1957 में आई फिल्म 'पैसा' के दौरान उनकी आवाज में खराबी होने लगी थी और उनकी आवाज में पहले जैसा दम नहीं बचा था जिसके बाद से उन्होंने पृथ्वी थिएटर को बंद कर दिया।

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बॉलीवुड - फोटो : सोशल मीडिया

इन फिल्मों को पृथ्वीराज कपूर ने बनाया यादगार 

'विद्यापति' (1937), 'सिकंदर' (1941), 'दहेज' (1950), 'आवारा' (1951), 'जिंदगी' (1964), 'आसमान महल' (1965), 'तीन बहूरानियां' (1968) आदि फिल्मों में पृथ्वीराज ने अपने दमदार अभिनय का परिचय दिया। उनके अभिनय से ही ये फिल्में हिंदी सिनेमा में यादगार बन गई।

ब्लॉकबस्टर फिल्म 'मुगल-ए-आजम' उनकी करियर की सबसे बड़ी फिल्मों में से एक है। फिल्म में उन्होंने शहंशाह जलालुद्दीन अकबर के किरदार को एक बार फिर जिंदा कर दिया था। इस फिल्म में उनकी संवाद अदायगी ने पर्दे पर कमाल कर दिया था। डिजिटल डॉल्बी साउंड के जमाने में अगर उनकी आवाज आज हम सुनते तो शायद थिएटर में कोने कोने में उनकी आवाज बस जाती। उनकी फिल्म 'आवारा' आज भी उनकी बेस्ट फिल्मों में से एक मानी जाती है।

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बॉलीवुड - फोटो : सोशल मीडिया

साल 1969 में उन्हें पद्म भूषण अवॉर्ड से नवाजा गया था। साल 29 मई 1971 में उनका देहांत हो गया, जिसके बाद हिंदी सिनेमा के प्रतिष्ठित पुरस्कार 'दादा साहब फाल्के पुरस्कार' से उन्हें सम्मानित किया गया था। 

 

पृथ्वीराज कपूर की फिल्मोग्राफी 
दो धारी तलवार (1928), सिनेमा गर्ल (1929), आलम आरा (1931), द्रौपदी (1931), राजरानी मीरा (1933), दकू मंसूर (1934), सीता (1934), मंजिल (1936), मिलाप (1937), राष्ट्रपति (1937), विद्यापति (1937), दुश्मन (1939), चिंगारी (1940), सजनी (1940), सिकंदर (1941), ईशारा (1943), महाराथी कर्ण (1944), दहेज (1950), आवारा (1951), आनंद मठ (1952), छत्रपति शिवाजी (1953), मुगल-ए-आज़म (1960), रुस्तम सोहराब (1963), गज़ल (1964), जिंदगी (1964), जनवार (1965), सिकंदर-ए-आज़म (1965), दकू मंगल सिंह (1966), किशोर बहुरानी (1968), नानक नाम जहां है (1969), हीर रांझा (1970), सकशातकर - (कन्नड़), (1971), कल आज और कल (1971) 

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पृथ्वीराज कपूर का खानदान
बता दें कि पृथ्वीराज कपूर के तीन बच्चे हैं, राज कपूर, शम्मी कपूर और शशि कपूर। हिंदी सिनेमा में उनके तीनों ही बेटों को सफलता मिली। इसके बाद राज कपूर ने कृष्णा कपूर से शादी की और उनको तीन बच्चे हुए, ऋषि, रणधीर और राजीव कपूर। इनमें सबसे ज्यादा हिट ऋषि कपूर रहे। ऋषि कपूर के बेटे हैं रणबीर कपूर जो इन दिनों अपनी कपूर खानदान को आगे ले जा रहे हैं। वहीं रणधीर कपूर ने अभिनेत्री बबीता से शादी की थी और उनकी दो बेटियां हैं, करिश्मा कपूर और करीना कपूर। दोनों ही बेटियां बॉलीवुड में सफल साबित हुईं।हालांकि करिश्मा अब फिल्मी दुनिया से परे हैं। 

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