राहुल राज सिंह, प्रत्युषा बनर्जी
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राहुल आगे कहते हैं, 'मैंने प्रत्युषा को नहीं मारा। उसके पैरेंट्स के लालच ने उसे मारा है। वह उनकी अंतहीन मांगों को पूरा करने में असमर्थ थी। मैंने उसे बचाने की कोशिश की थी, मारने की नहीं। मैं उस दिन को नहीं भूल सकता। यह मेरे दिल और आत्मा में अंतर्निहित है। प्रत्यूषा के सो-कॉल्ड दोस्त विकास गुप्ता और काम्या पंजाबी ने उनकी मौत के लिए मुझे जिम्मेदार बताने की कोशिश की। उन्हें जवाब देने के लिए उनका विवेक और भगवान है। वे अच्छे से जानते हैं कि मैं निर्दोष हूं। वे यह भी जानते हैं कि उन्होंने यह तमाशा क्यों किया?'
राहुल राज ने काम्या पंजाबी और विकास गुप्ता पर निशाना साधते हुए कहा, 'उन्होंने बिना सबूत के पब्लिसिटी के लिए मुझे बदनाम किया। प्रत्युषा ने मुझे जो आखिरी कॉल किया था, उसमें मेरे खिलाफ कोई सबूत नहीं है। उस बातचीत में प्रत्युषा ने एक बार भी मुझपर कोई आरोप नहीं लगाया। उसका सारा दुख और गुस्सा अपने पैरेंट्स के लिए था। उन्हें ही जिम्मेदार ठहराना चाहिए। यहां तक कि माननीय जज साहब ने मुझे जमानत प्रत्युषा के आखिरी फोन कॉल के आधार पर ही दी थी।'