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विश्व हिंदी दिवस: हिंदी में फिल्म क्रेडिट्स की जिम्मेदारी किसकी? देखिए प्रसून जोशी क्या कहते हैं...

Sun, 10 Jan 2021 06:24 PM IST
Mishra Mishra अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई
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प्रसून जोशी - फोटो : फाइल
सिनेमा बनाने में दुनिया में नंबर वन देश भारत में सबसे ज्यादा हिंदी फिल्में देखी जाती हैं। लेकिन, उनका कारोबार चीन, दक्षिण कोरिया और हॉलीवुड में बनी फिल्मों की तुलना में कहीं नहीं है। तमिल, तेलुगू, मलयालम, कन्नड़ और दूसरी भाषाओं की फिल्में भी प्रति सिनेमाघर के औसत से कमाई करने में हिंदी फिल्मों से आगे निकल रही हैं। इन सभी भाषाओं की फिल्मों में कलाकारों और उनके तकनीशियनों के नाम क्रमश: चीनी, कोरियाई, अंग्रेजी और संबंधित भाषाओं में ही होते हैं, बस हिंदी को छोड़कर। आज विश्व हिंदी दिवस है। और, इस मौके पर केंद्रीय फिल्म प्रमाणन बोर्ड के अध्यक्ष प्रसून जोशी इस पर क्या कहते हैं, ये हमने जानने की कोशिश की।
 
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केंद्रीय सूचना और प्रसारण मंत्रालय - फोटो : फाइल
साल 2018 में अगस्त महीने के पहले हफ्ते में केंद्रीय सूचना और प्रसारण मंत्रालय ने सभी फिल्म निर्माता संगठनों को एक एडवाइजरी जारी करके लिखा था कि हिंदी फिल्मों में कलाकारों व तकनीशियनों के नाम हिंदी में ही होने से दर्शक इन फिल्मों में अपना योगदान देने वालों के बारे में अधिक जान पाएंगे। ये एडवाइजरी हिंदी फिल्में बनाने वाले निर्माताओं के चारों प्रमुख संगठनों को भेजी गईं। लेकिन, इस पर अमल कराने की जिम्मेदारी किसकी है, ये अब तक तय नहीं हो सका।
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प्रसून जोशी - फोटो : फाइल
केंद्रीय फिल्म प्रमाणन बोर्ड के अध्यक्ष प्रसून जोशी से ‘अमर उजाला’ ने इस बारे में संपर्क किया तो उनका कहना था कि एक लेखक के तौर पर इस मामले में कोई टिप्पणी नहीं कर सकता। और, इस मामले में सबसे पहले मेरा बोलना सही भी नहीं होगा। सबसे पहले इसके बारे में सूचना और प्रसारण मंत्रालय से ही बात करना सही है। 

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प्रसून जोशी - फोटो : फाइल
ये पूछे जाने पर कि क्या सेंसर बोर्ड का अध्यक्ष होने के नाते ये नहीं हो सकता कि प्रमाणपत्र के लिए आवेदन करने वालों को इस बारे में प्रेरित किया जा सके? उनका कहना था कि सेंसर बोर्ड का काम किसी भी नियम को बनाना और उसे लागू करवाना नहीं है। यह सारे काम सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय ही देखता है। हमारा काम फिल्मों को प्रमाण पत्र प्रदान करना है। आप फिल्मों के शीर्षक और उनमें काम करने वाले लोगों के नाम हिंदी में देने के मुद्दे पर बात कर रहे हैं। अब सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय ने इस पर आदेश जारी किया है तो लागू भी वही करवाएंगे।
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राम प्रसाद की तेरहवीं - फोटो : अमर उजाला, मुंबई
हिंदी फिल्में बनाने वाले इस मुद्दे पर शुरू से टालमटोल करते रहे हैं। उनकी दिक्कत ये है कि हिंदी फिल्में बनाने वाले तमाम लोग हिंदी से ही परहेज करते हैं। फिल्म शुरू होने से पहले का अस्वीकरण तक तमाम फिल्मों में अशुद्ध हिंदी के साथ लिखा होता है। इस साल रिलीज हुई पहली ही फिल्म में ‘तेरहवीं’ शब्द तक इसके निर्माता ठीक से हिंदी में नहीं लिख सके। हालांकि, फिल्म निर्माता निर्देशक अनिल शर्मा हिंदी फिल्मों के नाम हिंदी में ही लिखे जाने के पक्षधर रहे हैं, लेकिन हिंदी से प्रेम करने वाले उनके जैसे फिल्मकार कम ही हैं। संजय गुप्ता जैसे निर्देशक तो पहले दिन से हिंदी फिल्मों में कलाकारों और तकनीशियनों के नाम हिंदी में लिखे जाने के खिलाफ रहे हैं।
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Manushi Chhillar and Akshay Kumar Prithviraj film muhurat puja - फोटो : Mumbai, Amar Ujala
इस मामले में तब निर्देशक चंद्र प्रकाश द्विवेदी ने इस बात पर अफसोस जाहिर किया था कि जिस भाषा में निर्माता फिल्म बना रहे हैं, उस भाषा में कलाकारों और तकनीशियों के नाम लिखने के लिए उनसे कहना पड़ रहा। उनकी अगली फिल्म यशराज फिल्म्स के साथ बन रही है जिसका नाम है, ‘पृथ्वीराज’। लोगों को पूरी उम्मीद है कि उनकी ये फिल्म ओपनिंग और एंड क्रेडिट्स में एक नया उदाहरण हिंदी में लिखे नामों को लेकर पेश करेगी।

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