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Pippa Movie: पीटी-76 टैंक का नाम क्यों पड़ा पिप्पा, फिल्म देखने से पहले जानें कुछ और दिलचस्प बातें

Thu, 09 Nov 2023 12:17 PM IST
ज्योति राघव अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई
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पिप्पा - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई
काफी लंबे समय से पूरी हो चुकी अभिनेता ईशान खट्टर की फिल्म ‘पिप्पा’ सीधे ओटीटी पर रिलीज होने जा रही है। बुधवार की रात फिल्म का मुंबई में सितारों से सजी शाम के बीच प्रीमियर हुआ। इस फिल्म में 1971 के भारत-पाकिस्तान युद्ध के दौरान गरीबपुर की लड़ाई दिखाई गई है जिसने बांग्लादेश की आजादी की लड़ाई में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। इस फिल्म में ईशान खट्टर के अलावा  मृणाल ठाकुर, प्रियांशु पेनयुली और सोनी राजदान की मुख्य भूमिकाएं हैं। फिल्म का प्रसारण 10 नवंबर से अमेजन प्राइम वीडियो पर होगा। आइए जानते हैं, इस फिल्म से जुड़ी कुछ खास बातें...
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पिप्पा - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई
26 साल के बलराम सिंह मेहता
फिल्म ‘पिप्पा’ में अभिनेता ईशान खट्टर ने फिल्म में ब्रिगेडियर बलराम सिंह मेहता के सैन्य जीवन की उस वक्त की भूमिका निभाई है जब वह कैप्टन थे। अभिनेता ईशान खट्टर और बलराम सिंह मेहता के बीच इस बात की समानता है कि जब ईशान खट्टर ने फिल्म ‘पिप्पा’ की शूटिंग शुरू की थी तब उनकी उम्र 26 साल की थी। वहीं जब ब्रिगेडियर बलराम सिंह मेहता इस युद्ध में बतौर कैप्टन शामिल हुए थे तो उनकी भी उम्र 26 साल की थी। यह महज एक इत्तेफाक जरूर है,लेकिन यह युद्ध समकालिकता फिल्म में प्रामाणिकता की एक अनूठी परत जोड़ती है, जिससे यह अधिक यथार्थवादी बन जाती है।
ईशान की फिल्म 'पिप्पा' के प्रीमियर पर लगा सितारों का मेला
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पिप्पा - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई
गरीबपुर की अहम लड़ाई
फिल्म ‘पिप्पा’ में गरीबपुर की लड़ाई का उल्लेख है। इस फिल्म की कहानी  ब्रिगेडियर बलराम सिंह मेहता की पुस्तक ‘द बर्निंग चैफीज’ पर आधरित है जिसमें गरीबपुर की लड़ाई का उल्लेख किया गया है। इस किताब में साल 1971 के भारत-पाकिस्तान युद्ध की एक ऐतिहासिक घटना का प्रत्यक्ष विवरण है, जो फिल्म में दिखाया गया है कि कैसे एक गुप्त मिशन ने भारत की अंतिम जीत में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। इस घटना को जो लोग किताब में पढ़ चुके हैं अब उस घटना को स्क्रीन पर देख सकेंगे।

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पिप्पा - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई
असली टैंक का फिल्म में इस्तेमाल
फिल्म में इस्तेमाल किए गए एम्फीबियस (उभयचर) टैंक को प्यार से "पिप्पा" क्यों कहा जाता है? यह बात भी इस फिल्म में देखने को मिलेगी। दरअसल, यह फिल्म उन पंजाबी सैनिकों को श्रद्धांजलि है, जिन्होंने पहली बार टैंक को देखकर प्यार से इसकी तुलना पिप्पा से की और जो पानी में तैरने वाले घी की डिब्बे यानी पीपे के समान है। यह उभयचर टैंक जिसे पीटी-76 और पलावुशी टैंक कहा जाता है, एक अनोखा टैंक था जिसे उभयचर अभियानों के लिए डिजाइन किया गया था और इसका उपयोग युद्ध के दौरान नदियों को पार करने के लिए किया गया था। यह टैंक युद्ध के दौरान बहुत महत्वपूर्ण था जिसमे युद्ध में जीत के लिए महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। सेना के पास बचा इकलौता असली पीटी 76 टैंक इस फिल्म में दिखाया गया है। बताते हैं कि फिल्म की शूटिंग के आखिरी दिन इस टैंक ने भी जल समाधि ले ली थी।
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ईशान खट्टर, निर्देशक राजा कृष्ण मेनन, ब्रिगेडियर बलराम सिंह मेहता - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई
पिप्पा के सजीव दर्शन
जैसा कि हमने बताया कि फिल्म की शूटिंग के दौरान वास्तविक पीटी-76 का इस्तेमाल किया गया था। इसकी वजह से फिल्म में दृश्य वास्तविक लगते हैं। फिल्म में कैप्टन   बलराम सिंह मेहता की भूमिका निभाने वाले ईशान ने फिल्म में प्रामाणिकता लाने के लिए टैंक का वास्तविक उपयोग किया। यह दर्शकों को इस बात का सजीव चित्रण देता है कि उस समय यह घातक युद्ध कैसा दिखता था। इस फिल्म को देखने के बाद दर्शक इस बात का अनुभव कर सकते हैं कि घातक युद्ध के समय पिप्पा कैसे दिखता था।
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पिप्पा - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई
भारत पाकिस्तान युद्ध की करीबी झलक
यह फिल्म अमृतसर, अहमदनगर, पश्चिम बंगाल के अंदरूनी इलाकों की पृष्ठभूमि पर आधारित है। फिल्म लुभावने दृश्यों और सिनेमाई भव्यता के साथ ऐतिहासिक लड़ाइयों को दर्शाती है, जो इसे दर्शकों के लिए फिल्म का एक- एक दृश्य मनोरंजन बनाती है।यह फिल्म देशभक्ति और वीरता की कहानी है जिसमें 45 कैवेलरी टैंक स्क्वाड्रन के कैप्टन बलराम मेहता की जिंदगी की झलकियां दिखती है। यह फिल्म का उस समय में वापस ले जाता है, जब भारत ने पूर्वी मोर्चे पर गरीबपुर की लड़ाई लड़ी थी।
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