25 साल की लगातार मेहनत ने पंकज त्रिपाठी को सिनेमा में वह मुकाम दिलाया है, जिसे देखकर गांवों के युवा अब प्रेरणा पाते हैं। पंकज त्रिपाठी से अमर उजाला के लिए ये एक्सक्लूसिव मुलाकात की पंकज शुक्ल ने। प्रस्तुत हैं कुछ महत्वपूर्ण अंश। इंटरव्यू के आखिर में इस इंटरव्यू का वीडियो जरूर देखिएगा।
सिनेमा में अभिनय की विविधता के प्रदर्शन का जो सौभाग्य या संयोग आपको मिला है, उसे कैसे देखते हैं?
यह बहुत अच्छा है। कुछ साल पहले तक पहले ऐसा नहीं था। हमारी हिंदी फिल्म इंडस्ट्री बहुत जल्दी कलाकारों को टाइपकास्ट कर देती है। वह या तो विलेन बना देगी या कॉमेडियन बना देगी। हम सौभाग्य से उस दौर में आए जब सिनेमा, इसकी कहानी, कहानी कहने का तरीका सब कुछ बदल रहा है। मैं सौभाग्यशाली हूं कि इस बदलते दौर के सिनेमा का मैं गवाह हूं।