गुंजन सक्सेना - द कारगिल गर्ल
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'ओएमजी 2' को लेकर सेंसर बोर्ड ने जो आपत्ति जताई, कहीं न कहीं सवाल यह उठता है कि सेंसर बोर्ड में ऐसे व्यक्तियों को रखना चाहिए जिन्हे सिनेमा की समझ हो। जो बदले दौर के सिनेमा को समझ सके। इस बारे में आपका क्या कहना है?
सेंसर बोर्ड में ऐसे फैसले लेने वाले लोगों का चयन कहां से और कैसे होता है. मुझे नहीं पता है। मैं अभिनेता हूं, मैं सिर्फ अभिनय तक सीमित हूं, एक्टिंग करता हूं और घर चला जाता हूं। मेरी फिल्म कहां आएगी, कब रिलीज होगी, किस ओटीटी पर आएगी, इन सबसे मेरा कोई वास्ता नहीं रहता है। पता नहीं सेंसर बोर्ड में कौन लोग होते हैं जो तय करते हैं। हां, फिल्म को ‘ए’ सर्टिफिकेट मिला तो मुझे निराशा जरूर हुई थी। इस फिल्म का विषय टीनएजर्स के लिए है, अगर यह फिल्म उन्हीं तक नहीं पहुंचेगी तो क्या कहें? और, वह हमारे हाथ में नहीं है।