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पान सिंह तोमर से लेकर शोले तक, अब तक डाकुओं पर बन चुकी हैं ये फिल्में

Mon, 12 Jul 2021 05:35 PM IST
तान्या अरोड़ा एंटरटेनमेंट डेस्क, अमर उजाला
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शोले, पान सिंह तोमर - फोटो : Social Media
फिल्म जगत में अब तक कई अलग-अलग शैलियों की फिल्में बनी है। एक्शन हो या रोमांस हर शैली को निर्देशकों ने बड़ी ही खूबसूरती के साथ बड़े परदे पर उतारा है। कई ऐसी फिल्में भी हैं जो डाकूओं पर आधारित हैं। हाथ में बन्दूक थामे, गोलियों से भरा बेल्ट अपनी कमर पर लगाए और माथे पर लंबा सा तिलक किए हुए ये है डाकुओं की पहचान। इस शैली पर अब तक कई फिल्में बन चुकी हैं। इन फिल्मों की बात ही बिलकुल अलग थी। बैंडिट क्वीन हो या फिर सोनचिरैया सभी फिल्मों ने दर्शकों का दिल खूब जीता।

बड़े-बड़े सितारों ने निभाया डाकुओं का किरदार

कई सितारों के द्वारा निभाएं गए डाकुओं के किरदार आज भी लोगों के जेहन में जिंदा हैं। दिलीप कुमार हो विनोद खन्ना हो या फिर इरफान खान कई बड़े सितारे अब तक हाथ में राइफल लिए और माथे पर तिलक लगाए नजर आ चुके हैं। सिर्फ अभिनेता ही नहीं बल्कि बॉलीवुड की कई अभिनेत्रियां भी ऐसी हैं जिन्होंने फिल्मी परदे पर डाकू के किरदार में अपने प्रदर्शन से जान डाल दी। हम इस आर्टिकल में आपको बॉलीवुड की उन फिल्मों के बारें में बता रहें हैं जो कि डाकुओं पर आधारित फिल्में हैं।
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शोले - फोटो : Social Media
शोले

हेमा मालिनी, धर्मेंद्र और अमिताभ बच्चन स्टारर शोले एक ऐसी फिल्म थी, जिसके डायलॉग्स हर किसी की जुबान पर है। इस फिल्म का कितने आदमी थे या फिर 'पचास कोस दूर जब बच्चा रोता है तो मां कहती है सो जा नहीं तो गब्बर आ जाएगा' जैसे डायलॉग्स ने लोगों का खूब दिल जीता। फिल्म में अमजद खान ने गब्बर सिंह की भूमिका निभाई थी। गब्बर सिंह हिंदी सिनेमा का एक ऐसा किरदार जो ये बताता है कि डकैत पृष्ठभूमि पर बनी फिल्म कितनी बुलंदियों को छू सकती है। इस फिल्म का निर्देशन रमेश सिप्पी ने किया था। बहुत ही कम लोग शायद ऐसे हों जिन्होंने यह फिल्म न देखी हो। बता दें कि गब्बर सिंह एक असली डकैत का नाम था जो चंबल घाटी के सबसे खरतनाक डकैतों में से एक था। इस डाकू के नाम पर राजस्थान और उत्तर प्रदेश की सरकारों ने 50 हज़ार रुपये के इनाम की भी घोषणा की थी।
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मदर इंडिया - फोटो : Social Media
मदर इंडिया

जब भी कही और कभी भी फिल्म मदर इंडिया का जिक्र होता है तो आंखो के सामने सबसे पहले नरगिस दत्त का चेहरा आ जाता है। 'मदर इंडिया' में नरगिस दत्त के उस किरदार को भला कौन भूल सकता है जिसने अपने ही बेटे पर गोली चला दी थी। इस फिल्म में नरगिस दत्त के बेटे की भूमिका के रूप में सुनील दत्त और राजेंद्र कुमार नजर आए थे। वैसे तो ये फिल्म एक मां के जीवन की कहानी को बयां करती है, लेकिन इस फिल्म में भी हालातों का शिकार होकर सुनील दत्त डाकू बनने के लिए मजबूर हो जाते हैं।

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गंगा जमुना - फोटो : Social Media Post
गंगा जमुना

नितिन बोस के निर्देशन में बनी फिल्म गंगा जमुना को भला कौन भूल सकता है। 1961 में आई इस फिल्म में दिलीप कुमार और वैजयंती माला ने मुख्य भूमिका निभाई थी। इस फिल्म को दर्शकों द्वारा काफी पसंद किया गया था। फिल्म में अपने हालात के सामने सीधे-साधे दिलीप कुमार का स्वभाव धीरे-धीरे बदल जाता है और वो डाकुओं के गुट में शामिल हो जाते हैं। एक बार उस दलदल में फंसने के बाद उनका वहां से बाहर आना नामुमकिन हो जाता है और आखिरकार भागते हुए एक दिन उनका अंत हो जाता है।
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मुझे जीने दो - फोटो : Social Media
मुझे जीने दो

'मुझे जीने दो' में सुनील दत्त, वहीदा रहमान, निरूपा रॉय और मुमताज जैसे दिग्गज कलाकारों ने काम किया था। मणि भट्टाचार्य के निर्देशन में बनी ये फिल्म उस दौर में बनी थी जब चंबल घाटी में डकैत की समस्या सबसे अधिक थी। 1963 में आई फिल्म 'मुझे जीने दो' आज भी सिल्वर स्क्रीन पर डकैतों के सबसे सटीक वर्णन में से एक माना जाता है।
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बैंडिट क्वीन - फोटो : Social Media
बैंडिट क्वीन

डाकू फूलन देवी के कारनामों के बारे में सुनकर आज भी कई लोगों की रूह कांप उठती है। फूलन देवी को लोग बैंडिट क्वीन के नाम से भी जानते हैं। फिल्म जगत में जब भी डकैतों का जिक्र छिड़ेगा तो बैंडिट क्वीन का नाम जरूर आएगा। 1996 में आई फिल्म 'बैंडिट क्वीन' में फूलन देवी की जिंदगी को हुबहू परदे पर उतारा गया था। शेखर कपूर के निर्देशन में बनी ये फिल्म हर किसी के लिए उनकी आंखें खोलने वाली थी। इस फिल्म को दर्शकों ने खूब प्यार दिया। बीहड़ की खतरनाक महिला डकैत फूलन देवी पर बनी फिल्म बैंडिट क्वीन डकैतों पर बनी सबसे बेहतरीन फिल्मों में से एक है। इस फिल्म को डाकुओं पर बनाई गई सभी फिल्मों में सबसे ज्यादा आइकोनिक माना जाता है। फिल्म में सीमा विश्वास ने फूलन देवी की भूमिका निभाई थी। फिल्म को सिर्फ भारत में ही नहीं बल्कि दुनियाभर में पसंद किया गया था।
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पान सिंह तोमर - फोटो : Social Media
पान सिंह तोमर

जब भी इरफान खान को बड़े परदे पर देखते हैं तो बस ऐसा लगता है कि वो आज भी हमारे साथ हैं। इरफान खान अपने हर किरदार में जान फूक देते थें वो अपने किरदारों में इतना रम जाते थें मानों ये उन्ही कि कहानी हो। अब उनकी फिल्म पान सिंह तोमर की बात ही ले लीजिए। साल 2012 में तिग्मांशु धूलिया निर्देशित फिल्म पान सिंह तोमर भी असल जिंदगी पर आधारित फिल्म है। इस फिल्म में डाकू के किरदार को बेहद ही संवेदनशील तरीके से परदे पर उतारा गया है। पान सिंह तोमर  राष्ट्रीय स्तर पर एथलीट रह चुके हैं। पान सिंह तोमर की बायोग्राफी है जिसे राष्ट्रीय पुरस्कार भी मिला था। इस फिल्म में उनके एथलीट से लेकर डाकू बनने तक के सफर को बड़ी बखूबी से दर्शाया गया। 7 बार भारतीय राष्ट्रीय खेलों में गोल्ड मेडल जीतने वाले एथलीट पान सिंह तोमर को उस वक्त डकैत बनने पर मजबूर होना पड़ता है जब उनकी मां की हत्या के बाद पुलिस कोई कार्रवाई नहीं करती। इरफान खान की इस फिल्म को डाकुओं पर आधारित सबसे बेहतरीन फिल्मों में से एक माना जाता है।

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सोनचिड़िया  - फोटो : Social Media Post
सोनचिड़िया 

सुशांत सिंह और भूमि पेडनेकर स्टारर फिल्म 'सोनचिड़िया' परदे पर तो दर्शकों का दिल जीतने में सफल नहीं हुई। लेकिन इन दोनों के डाकुओं के किरदार की लोगों ने खूब तारीफ की। साल 2019 में रिलीज हुई अभिषेक चौबे निर्देशित फिल्म 'सोनचिड़िया' डाकुओं की दुनिया को एक नए तरीके से पेश करती हुई फिल्म है। सोन चिड़िया की कहानी डाकू मानसिंह के गैंग की है। फिल्म में बीहड़ों के उस नजरिए को दिखाया गया है जिसे देखने के बाद दर्शकों के मन में डाकुओं के लिए एक अलग ही छवि बन जाती हैं। 
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मेरा गांव मेरा देश - फोटो : Social Media
मेरा गांव मेरा देश

साल 1971 में रिलीज हुई फिल्म मेरा गांव मेरा देश में विनोद खन्ना और धर्मेंद्र ने मुख्य भूमिका निभाई थी। इस फिल्म का निर्देशन राज खोसला ने किया था। फिल्म में विनोद खन्ना डाकू बने थे तो वही धर्मेंद्र ने फिल्म में चोर की भूमिका निभाई थी। फिल्म में धर्मेंद्र खुद सुधरने के बाद डाकू बने विनोद खन्ना को सही रास्ते पर लाने की पूरी कोशिश करते नजर आते हैं।
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