फरहान अख्तर
लेकिन 1966 में शास्त्री जी की मौत हो गई और वे लोन की रकम अदा नहीं कर सके, इसके बाद बैंक ने उनकी पत्नी ललिता शास्त्री को एक पत्र लिख लोन की रकम अदा करने को कहा, इसके बाद ललिता ने अपनी पेंशन से लोन की पूरी रकम भरी और आज भी वे कार उनके पास रखी है। आखिर में फरहान ने कहा कि इसे कहते ईमानदारी।