निरूपा रॉय, अमिताभ बच्चन
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अभिनेत्री ने फिल्म 'मुनीम जी’ से मां की भूमिकाएं निभाना शुरू किया, इस फिल्म में वे खुद से बड़े देवानंद की मां बनी थीं। 1953 में ‘दो बीघा जमीन’ से वे हिंदी सिनेमा की हिट हीरोइनों की लिस्ट में शुमार हो गईं। 1975 में यश चोपड़ा की ‘दीवार’ उनके करियर का टर्निंग प्वाइंट साबित हुई। इसके बाद वे कई फिल्मों 'खून पसीना', 'इंकलाब', 'अमर अकबर एंथोनी', 'सुहाग', 'गिरफ्तार', 'मुकद्दर का सिकंदर', 'मर्द' और 'गंगा-यमुना-सरस्वती' में नजर आईं। निरूपा रॉय को लीड अभिनेत्री से ज्यादा अमिताभ बच्चन की मां के रोल से लोकप्रियता मिली।