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Nirupa Roy: जवानी के दिनों में बनीं 'देवी' लेकिन अमिताभ की मां बनकर चमकी किस्मत, दिलचस्प है निरूपा रॉय की फिल्मी एंट्री का किस्सा

Tue, 04 Jan 2022 02:35 PM IST
अपूर्वा राय एंटरटेनमेंट डेस्क, अमर उजाला
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nirupa roy - फोटो : सोशल मीडिया
4 जनवरी, 1931 को गुजरात के वलसाड में जन्मी निरूपा रॉय हिंदी सिनेमा में मां के किरदार को अमर कर गईं। अगर आज वह हमारे बीच में होती तो 91 साल की हो गई होतीं। निरूपा रॉय ने बड़े पर्दे पर सबसे ज्यादा अमिताभ बच्चन की मां का किरदार निभाया। शायद लोग नहीं जानते कि निरूपा रॉय ने 1-2 नहीं बल्कि 16 फिल्मों में देवी का किरदार निभाया था और एक फिल्म में बोल्ड सीन भी दिया था। उन्होंने अपने फिल्मी करियर में 275 से अधिक फिल्मों में काम किया। निरूपा राय की गिनती बॉलीवुड की सबसे संजीदा एक्ट्रेस में होती है।
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nirupa roy - फोटो : social media
पति रिजेक्ट हुए तो निरूपा को मिला हीरोइन बनने का मौका
निरूपा रॉय का बचपन में नाम था कोकिला किशोरचंद्र बलसारा। निरूपा जब 14 साल की थीं तभी उनके पिता ने उनकी शादी कमल रॉय से कर दी। शादी के बाद 1945 में वो अपने पति के साथ मुंबई आ गईं। निरूपा के पति कमल रॉय एक्टर बनने की ख्वाहिश रखते थे और इसलिए ऑडिशन देते रहते थे। शादी के बाद कमल निरूपा को लेकर एक गुजराती फिल्म के लिए ऑडिशन देने गए। जहां वे तो रिजेक्ट हो गए लेकिन निरूपा को फिल्म में लीड एक्ट्रेस के तौर पर कास्ट कर लिया गया।
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Nirupa Roy - फोटो : twitter
उन्होंने अपने करियर की शुरुआत फिल्म ‘रनक देवी’ से की थी। इस फिल्म में उनके साथ त्रिलोक कपूर नजर आए थे। 50 के उस दशक में निरूपा रॉय को धार्मिक फिल्मों की रानी माना जाता था। एक्टर त्रिलोक कपूर के साथ उन्होंने दर्जनों धार्मिक फिल्में कीं। विष्णु कुमार व्यास ने ही कोकिला को निरूपा नाम दिया।
 

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nirupa roy - फोटो : Social Media
निरूपा को पहला हिंदी सिनेमा में ब्रेक मिला 1946 में आई फिल्म ‘अमर राज’ से। 1950 में आई फिल्म ‘हर हर महादेव’ में निरूपा की किस्मत चमक गई। लेकिन निरूपा अपने परिवार से जुदा हो गईं। उनके परिवार में एक्टिंग को खराब माना जाता था। यहां तक की उनके पिता ने तो उनसे मरते दम तक बात नहीं की थी। 
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nirupa roy - फोटो : Social Media
1953 में उनकी हिट फिल्म दो बीघा जमीन आई। इस फिल्म ने उन्हें हिन्दी सिनेमा की हिट हीरोइन के रूप में पहचान दी। 1975 में रिलीज हुई यश चोपड़ा की फिल्म 'दीवार' उनके करियर का टर्निंग प्वाइंट साबित हुई। दीवार के बाद निरूपा 'खून पसीना', 'मुकद्दर का सिंकदर', 'अमर अकबर एंथोनी', 'सुहाग', 'इंकलाब', 'गिरफ्तार', 'मर्द' और 'गंगा-यमुना-सरस्वती' में भी वो अमिताभ के मां के रोल में ही दिखाई दीं। जवानी में जितना फेम निरूपा रॉय को नहीं मिल पाया, उससे कहीं ज्यादा उन्हें बाद में मिला यानी मां के रोल निभाकर।
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