ताहिरा कश्यप, आयुष्मान खुराना
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ताहिरा का मानना है कि हर किसी इंसान की अपनी अलग लड़ाइयां हैं और उन परेशानियों से लड़ता हुआ हर इंसान एक सर्वाइवर है। कविता के माध्यम से ताहिरा कहती हैं कि इंसान दिखने में चाहे जैसा हो। चाहे वह कितना भी गंदा हो और उस पर चाहे जितने भी दाग धब्बे बने हों लेकिन हर इंसान को खुद से प्यार करना सीखना चाहिए। दोष, अधूरापन, किसी बात के लिए लगे आरोप। चाहे कुछ भी हो। यह सब सही है। यही कुछ चीजें ऐसी हैं जो हर इंसान को इंसान बनाती हैं।