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नसीरुद्दीन शाह बोले: योगी आदित्यनाथ का 'अब्बा जान' वाला बयान अमानवीय, वो हमेशा नफरत उगलते हैं

Tue, 14 Sep 2021 06:15 PM IST
तान्या अरोड़ा एंटरटेनमेंट डेस्क, अमर उजाला
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नसीरुद्दीन शाह, सीएम योगी आदित्यनाथ - फोटो : Social Media
नसीरुद्दीन शाह बॉलीवुड के एक ऐसे कलाकार हैं जो अपनी राय खुलकर सामने रखने से बिलकुल भी नहीं कतराते हैं। हाल ही में उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ द्वारा ‘अब्बा जान’ शब्द पर की गईं टिप्पणी पर नसीरुद्दीन शाह ने प्रतिक्रिया जाहिर करते हुए उसे अमानवीय बताया। नसीरुद्दीन शाह ने कहा एक मीडिया चैनल से खास बातचीत करते हुए नसीरुद्दीन शाह ने कहा, ‘यूपी के सीएम द्वारा दिया गया अब्बा जान वाला बयान अमानवीय है और यहां तक कि वो प्रतिक्रिया के लायक भी नहीं है’।

नसीरुद्दीन शाह ने मुख्यमंत्री के बयान पर दी प्रतिक्रिया

नसीरुद्दीन शाह ने एक मीडिया चैनल से इस बयान पर अपनी प्रतिक्रिया जाहिर करते हुए कहा, ‘इस पर वैसे तो प्रतिक्रिया देने का कोई मतलब नहीं है। लेकिन सच ये है कि अब्बा जान बयान उस नफरत से भरे बयानों का सिलसिला है, जो वो हमेशा से उगलते आए हैं’। बता दें कि उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का एक वीडियो सोशल मीडिया पर खूब वायरल हो रहा है जिसमें वो ये कहते हुए नजर आ रहे हैं कि 2017 से पहले सिर्फ ‘अब्बा जान कहने वालों को ही राशन मिलता था’।
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नसीरुद्दीन शाह - फोटो : सोशल मीडिया
बयानों को लेकर चर्चा में रहते हैं नसीरुद्दीन शाह

बता दें कि मुख्यमंत्री द्वारा संबोधित जनसभा में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ये कहते हुए भी दिखाई दिए कि यूपी में उनके कार्यकाल के दौरान ‘तुष्टिकरण की राजनीति’ खत्म हो गई है। ऐसा पहली बार नहीं है जब नसीरुद्दीन शाह अपने किसी बयान को लेकर चर्चा में आए हैं इससे पहले उन्होंने फिल्म जगत के सितारों पर भी निशाना साधा है। हाल ही में नसीरुद्दीन शाह ने अफगानिस्तान में तालिबान शासन आने पर जश्न मनाने वाले भारतीय मुस्लिमों निंदा की थी। जिसके लिए वो चर्चा में आए थे।
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नसीरुद्दीन शाह - फोटो : सोशल मीडिया
उदार हिंदुओं को इसके  खिलाफ बोलना चाहिए 
 

नसीरुद्दीन शाह से ये भी पूछा गया कि क्या उन्हें अपने बयान के लिए हिंदू दक्षिणपंथी से मिले समर्थन मिला, जिसपर अपनी प्रतिक्रिया जाहिर करते हुए नसीरुद्दीन शाह ने कहा, 'हिंदुओं को भारत में बढ़ती दक्षिणपंथी कट्टरता के खिलाफ आवाज उठानी चाहिए। यह समय है कि उदार हिंदू इसके खिलाफ बोलें, क्योंकि अब यह बढ़ता ही जा रहा है।'

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नसीरुद्दीन शाह - फोटो : सोशल मीडिया
मुस्लिम होने का करियर पर नहीं पड़ा असर

उन्होंने कहा कि फिल्म जगत से उनपर इसका कोई असर नहीं पड़ा। उन्होंने कहा, 'मुस्लिम होने के कारण फिल्म इंडस्ट्री में कभी भी भेदभाव का शिकार नहीं होना पड़ा लेकिन उन्हें फिल्म इंडस्ट्री के कलाकारों को अपने मन की बात कहने के लिए हर जगह पर परेशान किया जाता है। उन्होंने कहा कि आखिर बॉलीवुड के तीनों खान (सलमान, शाहरुख और आमिर) क्यों हमेशा खामोश रहते हैं। वह इन तीनों की तरफ से तो नहीं बोल सकते हैं मगर उन्हें इस बात का अंदाजा है कि इन लोगों को कितने उत्पीड़न का शिकार होना पड़ेगा।'
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नसीरुद्दीन शाह - फोटो : सोशल मीडिया
जो बोलते हैं उनका उत्पीड़न होता है

नसीरुद्दीन ने कहा, 'वे (सलमान, शाहरुख और आमिर) उस उत्पीड़न के कारण चिंतित हैं जिसका उन्हें शिकार बनाया जाएगा। उनके पास खोने के लिए काफी कुछ है। यह केवल आर्थिक उत्पीड़न नहीं होगा या एक दो विज्ञापन छूटने तक सीमित नहीं होगा बल्कि हर तरह से परेशान किया जाएगा।' अभिनेता कहते हैं कि जो भी बोलने की हिम्मत करता है उसी का उत्पीड़न किया जाता है। उन्होंने कहा, 'यह केवल जावेद साहब या मुझ तक सीमित नहीं है, जो भी दक्षिणपंथी मानसिकता के खिलाफ बोलेगा उसके साथ ऐसा होगा।' बता दें कि नसीरुद्दीन शाह लगभग पांच दशकों से इंडियन फिल्म इंडस्ट्री का हिस्सा हैं और 'निशांत', 'आक्रोश', 'मिर्च मसाला', 'अल्बर्ट पिंटो को गुस्सा क्यों आता है', 'जुनून', 'मंडी', 'अर्ध सत्य', 'जाने भी दो' जैसी कुछ बेहतरीन फिल्में भी की हैं।  
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