हिंदी सिनेमा के विख्यात गायक मोहम्मद रफ़ी ने अपनी गायन शैली और मधुर आवाज से लाखों लोगों को अपना दीवाना बनाया है। अपनी तीन दशक की सुर यात्रा में उन्होंने हर तरह के गाने गाए। आज भी दुनिया उनकी आवाज की दीवानी है। आजकल के युवा भी मोहम्मद रफी के गानों के कायल हैं। सिनेमा के कई गायकों ने मोहम्मद रफी से प्रेरणा ली है और कई तो उन्हें अपना गुरु और अपना मानस पिता तक मानते हैं। ऐसे ही 10 गायकों से जानते हैं, उनके अनमोल विचार.. Animal: 'एनिमल' पर चली बांग्लादेश सेंसर बोर्ड की कैंची, सलार को अब भी रिलीज की अनुमति का इंतजार
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जावेद अली, किशोर कुमार के साथ मो. रफी
- फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई
जावेद अली
रफी साहब को कौन नहीं चाहता। मैं समझता हूं कि फिल्म प्लेबैक में आज तक इतनी कंप्लीट आवाज नही आई। उन्होंने हर शैली के गाने गाए हैं और अपने फन का सिक्का मनवाया है। मैं समझता हूं कि, मोहम्मद रफी ने जितनी विविधता अपने गायन शैली में लाई है, शायद ही किसी ने किया होगा।
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उदित नारायण, जवाहर लाल नेहरु, मो. रफी
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उदित नारायण
अच्छा गाना गाना, हर किस्म का गाना गाना और एकदम दिल से गाना, तबियत से गाना, पूरी ईमानदारी और समर्पण के साथ गाते थे रफी साहब। मेरा पहला गाना जो मैंने रफी साहब के साथ गाया था। मैं इतना नर्वस था की जिनको सुन सुन के सीखा है आज उन्हीं के साथ गाने का मौका मिला है। डरा डरा मैं स्टूडियो गया और जैसे तैसे मैंने गाना गाया। उसके बाद रफ़ी साहब से मेरी बहुत तारीफ की, मेरी हौसला अफजाई की। मुझे आज भी विश्वास नही होता कि रफ़ी साहब जैसी शक्सियत के साथ गाना गाने का सुअवसर मुझे प्राप्त हुआ।
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सुखविंदर सिंह, मो. रफी, किशोर कुमार
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सुखविंदर सिंह
बेहद मधुर आवाज। हर एक की जुबान पर उनका नाम है। बड़ी मुहब्बत और इखलाक के साथ उनका नाम लिया जाता है। बड़े ही तहे दिल से रफी साहब को याद करते हैं। रफी साहब हमारे दिलों से, हमारी सोच से कभी नहीं जा सकते। वो मुस्कुराता हुआ चेहरा, बेहतरीन आवाज और बहुत खूबसूरत मिज़ाज भी। उनकी आवाज में दर्द, रवानगी और शरारत भरी थी। हम सभी रफ़ी साहब से बहुत प्यार करते हैं।
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शान, मो. रफी
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शान
रफी साहब ने इतने सारे गाने गाए हैं, ’तुम जो मिल गए हो’, ’मैने पूछा चांद से’, ’दर्द ए दिल दर्द ए जिगर’ मेरे पसंदीदा गाने हैं। मैंने बहुत लोगों को देखा है वो रफr साहब के गाने गाते समय उनकी नकल करते हैं, उनकी आवा की नकल करते हैं। रफी साहब की नकल नहीं हो सकती। जैसी उनकी गायिकी थी और जिस तरह वो गाते थे, बहुत कठिन है इस तरह गाना। इसलिए मैं अपनी ही आवाज में गाता हूं। कोशिश करता हूं कि थोड़ी बहुत उनकी गायिकी की झलक आ जाए तो बहुत है।
मैं रफी साहब को अपना म्यूजिकल पिता मानता हूं। उन्होंने तीन साढ़े तीन दशक की अपनी सुर यात्रा में रोमांटिक, कॉमेडी, भजन, गुरबानी, सेमी क्लासिकल हर किस्म के गाने गाए और उनमें महारत हासिल की। जो भी इंसान या गायक म्यूजिक को शास्त्र की तरह पढ़ना चाहता है, मैं ऐसा मान ही नही सकता कि वो रफी साहब से मुतास्सिर नही है।
प्लेबैक सिंगर हमारे देश में बहुत हुए लेकिन लिखने वाले की सोच में जान फूंक दे, ऐसे महान गायक थे मोहम्मद रफी साहब। रफी साहब की गायिकी में सरलता थी, सच्चाई थी, साधुत्व था। इंसान जब ऐसा होता है तो वो किसी की धुन गाए, किसी का भी लिखा हुआ गाए, ऐसा लगता है जैसे उन्होंने ही लिखा हो। इतनी बारीकी से गाते थे रफी साहब।
स्वर, नाद और सरस्वती जिनके गले में हो, ऐसे मैं रफी साहब को मानता हूं। उनको देख के ही इंसान को सुख की अनुभूति होती थी। मेरी खुशनसीबी है जो मुझे उनके साथ एक गाना गाने का अवसर मिला। हमारा और आने वाली पीढ़ी का सौभाग्य है जो उन्हें और मुझे रफी साहब से सुनने, देखने और सीखने का मौका मिला है। उनका स्तर इंसानों से कहीं ऊपर था। जो लोग रफी साहब की नकल करते हैं, उनके जैसा बनने की कोशिश करते हैं, उन्हें ये नहीं पता कि रफी साहब जैसा कोई नहीं हो सकता। सीख के रफी नहीं बना जा सकता। वह ईश्वर की देन है।
रफ़ी साहब की सिंगिंग, गाने का तरीका, उनके एक्सप्रेशंस और इमोशंस लाजवाब है। उनके गाने गाना बहुत ही कठिन है। उनका गानों का उच्चारण बिल्कुल स्पष्ट होता था। उनके जैसी अद्भुत प्रतिभा वाले गायक सदी में केवल एक ही बार जन्म लेती है।
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कविता कृष्णमूर्ति, मो. रफी
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कविता कृष्णमूर्ति
रफ़ी साहब जितने अच्छे आर्टिस्ट थे उतने ही अच्छे इंसान भी थे। मुझे याद है एक बार मुझे सौभाग्य मिला था उनके साथ गाने का। उनके साथ भी नहीं, उनका गाना खत्म होने के बाद मेरी चार लाइनें थीं। रिकॉर्डिंग करते हुए बीच के अंतरे में वह एक लाइन भूल जा रहे थे। लगातर तीन चार टेक लेने के बाद जब म्यूजिक डायरेक्टर ने कहा कुछ कहा तो उन्होंने कहा, 'नहीं नहीं, अब याद आ गया मुझे।' फिर वह मेरी तरफ मुड़े और हाथ जोड़ कर मुझसे कहने लगे, ’माफ करना आपको मेरी वजह से इंतजार करना पड़ रहा है।" ये याद करते हुए मेरी आंखों में आंसू आ जाते हैं।
सचिन पिलगांवकर, मो. रफी
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सचिन पिलगांवकर
मेरी मुलाकात रफ़ी साहब से एक रिकॉर्डिंग स्टूडियो में हुई थी, जहां लक्ष्मीकांत प्यारेलाल जी के साथ वह रिहर्सल कर रहे थे। मैं वहीं बैठा हुआ रफी साहब को निहार रहा था। अगर कोई शिकायत मुझे रफी साहब से हो तो वह ये होगी कि उन्होंने कभी हमें सामने से सलाम करने का मौका नहीं दिया। चाहे कोई भी इंसान को, किसी भी वर्ग का वो सबसे पहले झुक के सलाम करते थे। इतने सरल थे रफी साहब। Bappa Lahiri Son Annaprashan: बप्पा बी लहरी के बेटे शिवाय का हुआ अन्नप्राशन, समारोह में शामिल हुए कई सितारे