मोहम्मद रफी
- फोटो : ट्विटर
बीबीसी के एक लेख के मुताबिक, खय्याम याद करते हैं, "1949 में मेरी उनके साथ पहली गजल रिकॉर्ड हुई जिसे वली साहब ने लिखा था। अकेले में वह घबराते तो होंगे, मिटाके वह मुझको पछताते तो होंगे। रफी साहब की आवाज के क्या कहने! जिस तरह मैंने चाहा उन्होंने उसे गाया। जब ये फिल्म रिलीज हुई तो ये गाना रेज ऑफ द नेशन हो गया।" बैजू-बावरा में प्लेबैक सिंगिंग करने के बाद रफी ने पीछे मुड़कर नहीं देखा।