Lata Mangeshkar and Md. Rafi
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''मोहम्मद रफी स्वयं ईश्वर की आवाज'' किताब में प्रयाग शुक्ल लिखते हैं लता ने यह बात कही है कि रफी के नाम का जिक्र आते ही वे उन दिनों में लौटने को मजबूर हो जाती हैं, जब एक सिंगर को, किसी गीत पर रॉयल्टी मिले या न मिले, के सवाल पर उनसे अपनी असहमति जाहिर की थी। एक गायिका के रूप में स्वर-साम्राज्ञी का दर्जा हासिल करने वाली लता, कई मामलों में लगातार अपने को असुरक्षित महसूस करती रही हैं। और उनका अहं भी ऐसा है कि जो भी उन्हें जरा-सा भी प्रतिद्वंद्वी नजर आया है, उसके प्रति वह उदार नहीं रही हैं, और इसमें अपनी बहन आशा भोसले तक को उन्होंने नहीं बख्शा है।