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Video: लाखों फैंस के बीच निकली थी मोहम्मद रफी की अंतिम यात्रा, उस दिन आसमान भी रोया था

Tue, 24 Dec 2019 11:18 AM IST
अपूर्वा राय एंटरटेनमेंट डेस्क, अमर उजाला
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mohammad rafi - फोटो : Twitter
अपनी गायकी से सबके दिलों पर राज करने वाले मोहम्मद रफी का जन्म 24 दिसंबर 1924 को हुआ था। मोहम्मद रफी पंजाब के कोटला सुल्तान सिंह गांव में जन्में थे और वहां से मुंबई ही नहीं दुनिया भर में अपनी पहचान बनाई। उन्हें शहंशाह-ए-तरन्नुम भी कहा जाता था। रफी साहब बहुत कम बोलने वाले, जरूरत से ज्यादा विनम्र और मीठे इंसान थे। उनकी बहू यास्मीन खुर्शीद बताती हैं कि न तो वह शराब या सिगरेट पीते थे और न ही पान खाते थे। इस महान शख्सियत की जयंती पर आइए जानते हैं उनके बारे में कुछ दिलचस्प बातें।

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Mohammed Rafi
हाजी अली मोहम्मद के छह बच्चों में से रफी दूसरे नंबर पर थे। उन्हें घर में फीको कहा जाता था। गली में फकीर को गाते सुनकर रफी ने गाना शुरू किया था। 31 जुलाई 1980 को रमजान के महीने में रफी इस दुनिया से विदा हो गए। रफी साहब ने अपने गांव में फकीर के गानों की नकल करते-करते गाना गाना सीखा था।
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Mohammed Rafi
मोहम्मद रफी ने अपनी पहली परफॉर्मेंस बतौर गायक 13 साल की उम्र में दी थी। के एल सहगल ने उन्हें लाहौर में एक कॉन्सर्ट में गाने की अनुमति दी थी। साल 1948 में मुहम्मद रफी ने राजेन्द्र कृष्णन द्वारा लिखा हुआ गीत 'सुन सुनो आए दुनिया वालों बापूजी की अमर कहानी' गाया था। यह गाना देखते ही देखने इतना बड़ा हिट हो गया था कि तत्कालीन प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू ने उन्हें अपने घर पर यह गाना गाने के लिए निमंत्रण दिया था।

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मोहम्मद रफी

मोहम्मद रफी के निधन के दिन मुंबई में तेज बारिश हो रही थी। कहा जाता है कि निधन की अंतिम यात्रा की रिकॉर्डिंग को हिंदी फिल्म में इस्तेमाल भी किया गया था। मोहम्मद रफी की अंतिम यात्रा इतने बड़ी स्तर पर की गई थी कि लोग आज भी याद करते हैं। उस वक्त लाखों लोग यात्रा में शरीक हुए थे। कहा गया था कि रफी ने निधन पर आसमान भी फूट फूटकर रोया था।

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मोहम्मद रफी
मोहम्मद रफी ने न केवल गायिकी बल्कि एक्टिंग में भी हाथ आजमाया था। रफी साहब ने 'लैला मजनू' और 'जुगनू' फिल्म में बतौर एक्टर काम किया था। यह दोनों ही फिल्में बॉक्स ऑफिस पर हिट हुई और ताबड़तोड़ कमाई की। मोहम्मद रफी ने ज्यादातर गाने संगीतकार लक्ष्मीकांत प्यारेलाल के लिए गाए। उन्होंने उनकी फिल्मों के लिए करीब 369 गाने गाए थे, जिसमें 186 गाने सोलो शामिल हैं।
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RAFI
रफी साहब की सबसे खास बात यह थी कि उनकी आवाज हर एक्टर पर फिट हो जाती। दिलीप कुमार से लेकर देवानंद और शम्मी कपूर से लेकर राजेंद्र कुमार वो जिस किसी भी स्टार के लिए गाते पर्दे पर यही लगता कि रफी नहीं वो स्टार गा रहा है।

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Lata Mangeshkar and Md. Rafi - फोटो : सोशल मीडिया
संगीतकार नौशा मोहम्मद रफी के बारे में एक दिलचस्प किस्सा सुनाते थे। एक बार एक अपराधी को फांसी दी जी रही थी। उससे उसकी अंतिम इच्छा पूछी गई तो उसने कहा कि वो मरने से पहले रफी का बैजू बावरा फिल्म का गाना 'ऐ दुनिया के रखवाले' सुनना चाहता है। अपराधी की ख्वाहिश पूरी करने के लिए टेप रिकॉर्डर लाया गया और उसके लिए वह गाना बजाया गया।

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mohammad rafi - फोटो : file photo
शायद आप नहीं जानते होंगे कि इस गाने के लिए मोहम्मद रफी ने 15 दिन तक रियाज किया था और रिकॉर्डिंग के बाद उनकी आवाज इस हद तक टूट गई थी कि कुछ लोगों ने कहना शुरू कर दिया था कि रफी शायद कभी अपनी आवाज वापस नहीं पा सकेंगे। इतना ही नहीं 'ओ दुनिया के रखवाले' गाने को गाते समय रफी के गले से खून तक आ गया था।
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mohammad rafi - फोटो : file photo
शायद ही लोगों को इस बात की जानकारी है कि मोहम्मद रफी की दो शादियां हुई थीं रफी साहब की पहली शादी उनकी कजिन बशीरा बानू से उनके पैतृक गांव में हुई थी। यह शादी ज्यादा दिन नहीं चली क्योंकि बशीरा ने रफी के साथ भारत आने से मना कर दिया। बाद में, मोहम्मद रफी की दूसरी शादी बिलकिस बानो से हुई थी।
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