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मोदी विरोध में अनुराग कश्यप ने हिटलर का गलत वीडियो किया शेयर, डिलीट करना पड़ा ट्वीट

Tue, 24 Dec 2019 09:54 AM IST
shrilata biswas बीबीसी हिंदी
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anurag kashyap - फोटो : social media
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की दिल्ली में हुई रैली के बाद सोशल मीडिया पर हिटलर का एक वीडियो वायरल हो रहा है। इस वीडियो को शेयर करने वालों में फिल्म निर्देशक अनुराग कश्यप भी शामिल हैं। वीडियो में जर्मनी के तानाशाह रहे एडोल्फ हिटलर एक स्टेडियम में भाषण देते हुए दिख रहे हैं। वीडियो के सबटाइटल में लिखा आ रहा है, 'अगर आप चाहते हैं तो मुझसे नफरत करें, लेकिन जर्मनी से नहीं।'

 
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रामलीला मैदान में पीएम मोदी - फोटो : ANI
मोदी के भाषण से तुलना
हिटलर के इस भाषण की तुलना पीएम मोदी के 22 दिसंबर को रामलीला मैदान वाले भाषण से की जा रही है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बीते रविवार को दिल्ली के रामलीला मैदान में अपने भाषण में अपने राजनीतिक विरोधियों को आड़े हाथों लिया था।
मोदी ने अपने भाषण में कहा था, 'अगर मोदी को देश की जनता ने इस पद पर बिठाया है और ये आपको पसंद नहीं है तो आप मोदी को गाली दो। मोदी से नफरत करो। मोदी का जितना विरोध करना है, जरूर करो। आपको मोदी से नफरत है और गुस्सा जितना निकालना है, निकालो। अरे मोदी का पुतला लगाकर आते जाते हुए जितने जूते मारने हैं, मारो। मोदी का पुतला जलाना है, जलाओ लेकिन देश की संपत्ति मत जलाओ। गरीब का ऑटो-रिक्शा और झोपड़ी मत जलाओ। आपका जितना गुस्सा है वो मोदी पर निकालो।'
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Anurag Kashyap - फोटो : Social Media
पीएम मोदी ने अपने भाषण में अर्बन नक्सल शब्द का भी जिक्र किया था। इसके बाद अनुराग कश्यप ने सोमवार को ये वीडियो शेयर करते हुए अर्बन नाजी शब्द का प्रयोग किया।
अनुराग कश्यप के ट्वीट करने के बाद पांच हजार से ज्यादा लोगों ने इस वीडियो की रीट्वीट किया। इसके साथ ही 13 हजार से ज्यादा लोगों ने इस वीडियो को लाइक किया लेकिन वीडियो जारी होने के कुछ समय बाद एक जर्मन महिला ने इस वीडियो की सामग्री पर सवाल खड़े किए।
 

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Anurag Kashyap - फोटो : Amar Ujala, Mumbai
जर्मनी की हैम्बर्ग यूनिवर्सिटी से मनोविज्ञान की पढ़ाई करने वालीं मारिया रिथ ट्वीट के रिप्लाई में लिखती हैं, 'ये बिलकुल गलत अनुवाद है। क्या आपके पास कोई ऐसा नहीं है जो कि जर्मन भाषा जानता हो? इस भाषण में लोगों के बीच जाकर बढ़-चढ़कर मदद करने का जिक्र है। इस वीडियो और इस पर लिखे वाक्यों की सत्यता पर सवाल उठाए जाने के बाद अनुराग कश्यप की ओर से ये वीडियो डिलीट किया जा चुका है।
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hitler - फोटो : file photo
लेकिन क्या है सच्चाई?
बीबीसी हिन्दी ने इस वीडियो में हिटलर के भाषण और उसके साथ लिखे अनुवाद की सत्यता की जांच करने के लिए जर्मन भाषा के जानकारों से बात की है लेकिन ये करना आसान नहीं था क्योंकि जर्मन भाषा के व्याकरण की वजह से 15 सेकेंड की क्लिप को सुनकर इस नतीजे पर पहुंचना मुश्किल था कि ये अनुवाद कितना सही है। इसके बाद हिटलर के भाषण के पूरे वीडियो की तलाश की गई। दरअसल, हिटलर ने ये भाषण साल 1936 में दिया था।

दिल्ली यूनिवर्सिटी में जर्मन भाषा विभाग की सीनियर लेक्चरर ज्योति सभरवाल ने बीबीसी हिन्दी से बात करते हुए इस वीडियो में कही जा रही बात का अर्थ बताया है। वे कहती हैं, 'ये बिलकुल गलत अनुवाद है क्योंकि इस भाषण में हिटलर ऐसी कोई बात नहीं कह रहे हैं। वे एक दूसरे की मदद करने की बात कहते हुए नजर आ रहे हैं।' 
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हिटलर - फोटो : फाइल फोटो
इसके बाद इस भाषण में कही गई बात के ऐतिहासिक महत्व को समझने के लिए एक वरिष्ठ जर्मन पत्रकार अनवर अशरफ से बात करने की कोशिश की। अनवर अशरफ ने भी ज्योति सभरवाल की पड़ताल से सहमति जताते हुए बताया कि इस भाषण में हिटलर जर्मन लोगों को एक दूसरे की मदद करने के लिए अपील कर रहे हैं। वे कहते हैं, 'ये बात सही है कि इस वीडियो पर दिए गए अनुवाद का हिटलर के भाषण से कोई संबंध नहीं है और इसकी मोदी के भाषण से तो बिलकुल भी समानता नहीं है लेकिन इस भाषण को समझने के लिए हमें इस भाषण की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि को समझना होगा। इस भाषण में नफरत या प्यार की बात नहीं की गई है। इस भाषण में हिटलर भाईचारे की बात कर रहे थे। वो कह रहे थे कि जर्मनवासियों को किस तरह एक दूसरे के खिलाफ पूर्वाग्रहों को त्याग कर एक दूसरे की मदद करनी चाहिए।'
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Hitler - फोटो : file photo
'जर्मनी में जाड़े के मौसम में तापमान काफी नीचे चला जाता है। गरीबों के लिए यह जानवेला होता है। ऐसे में हिटलर अपने भाषण में अपनी ही पार्टी की एक चैरिटी संस्था विंटर हिल्सवर्ग के लिए दे रहे थे। इस भाषण का उद्देश्य ये था कि सर्दियों के दिनों में किसी जर्मनवासी को कोयले, अंगीठियों या कंबलों की कमी ना हो जाए, इसके लिए धनाढ्य वर्ग से आगे आकर मदद करने को कहा जा रहा है।' हिटलर इस भाषण में कहते हैं- 'ये संभव ही नहीं है कि आपस में एक दूसरे के प्रति पाले गए पूर्वाग्रहों को त्यागकर एक दूसरी की मदद न की जा सके। मैं स्वयं ये काम कर चुका हूं, इसलिए आप लोग जनता की बीच जाएं और अपने पूर्वाग्रहों को त्यागकर एक दूसरे की भरसक मदद करें।'

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