एनडीएफसी
- फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई
अमेरिका के मुकाबले कहीं नहीं
बीते कुछ साल से हिंदी सिनेमा में एक तयशुदा विचारधारा के अनुसार लगातार फिल्में बन रही हैं, लेकिन विश्लेषक मानते हैं कि इनका अपेक्षित फायदा उस स्तर पर संबंधित विचारधारा को पोषित करने में नहीं हो पा रहा है, जिसकी कि इन फिल्मों से उम्मीद की जाती है। सरकारी गणना के मुताबिक अमेरिका में प्रति 10 लाख आबादी पर 125, ब्रिटेन में 68 और चीन में 30 स्क्रीन्स की तुलना में भारत में प्रति 10 लाख आबादी पर सिर्फ सात सिनेमा स्क्रीन्स मौजूद हैं। और, इनमें भी 70 फीसदी स्क्रीन्स सिंगल स्क्रीन सिनेमाघरों में पाए गए। सिनेमाघरों मे रिलीज हुई फिल्मों का कारोबार देश में नई ऊंचाइयां छू सकता है।