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महबूब खान की 'मदर इंडिया' को इसलिए नहीं मिल पाया था ऑस्कर, चयनकर्ताओं को हुई थी ऐसी गलतफहमी

Tue, 28 May 2019 08:14 AM IST
Mishra Mishra एंटरटेनमेंट डेस्क, अमर उजाला
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Mehboob Khan - फोटो : social media
हिन्दी सिनेमा के महान फिल्म मेकर महबूब खान को लोग सदियों तक याद रखेंगे। आन, अंदाज, अनमोल घड़ी, औरत, अमर, तकदीर, अनोखी अदा और रोटी जैसी शानदार फिल्में देने वाले महबूब खान का 28 मई 1964 को निधन हो गया था। उनके टैलेंट का लोहा पूरी दुनिया ने माना था। खासकर महबूब खान हमेशा अपनी फिल्म मदर इंडिया के लिए जाने जाते रहेंगे। ऑस्कर की चौखट पर पहुंच कर कहां चूक गई थी उनकी फिल्म मदर इंडिया, आइए जानते हैं।
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Mehboob Khan - फोटो : social media
अब तक 3 भारतीय फिल्मों ने Best Foreign Language Film (बेस्ट फॉरेन लैंग्वेज फिल्म) की कैटेगरी में ऑस्कर नामांकन हासिल किया है। उसमें से एक है मदर इंडिया। विदेशी भाषा में बनी श्रेष्ठ फिल्म श्रेणी में भारत की ओर से 'मदर इंडिया' भेजी गई थी। फिल्म के तकनीकी पक्ष और निर्देशक द्वारा बनाई भावना की लहर से चयनकर्ता प्रभावित थे परंतु उन्हें यह बात खटक रही थी कि पति के पलायन के बाद महाजन द्वारा दिया गया शादी का प्रस्ताव वह क्यों अस्वीकार करती है जबकि सूदखोर महाजन उसके बच्चों का भी उत्तरदायित्व उठाना चाहता है।
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mother india - फोटो : social media
दरअसल, चयनकर्ता को यह किसी ने नहीं स्पष्ट किया कि भारतीय नारी अपने सिंदूर के प्रति कितनी अधिक समर्पित होती है। फिल्म भारत के सदियों पुराने आदर्श के प्रति समर्पित थी। ऑस्कर जीतने के लिए फिल्म की सांस्कृतिक पृष्ठभूमि को स्पष्ट करने के लिए वहां एक प्रचार विभाग नियुक्त किया जाना चाहिए था।

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mother india
फिल्म के अंतिम दृश्य में एक मां अपने सबसे अधिक प्रिय पुत्र को गोली मार देती है क्योंकि वह सांस्कृतिक मूल्यों के खिलाफ अपहरण कर रहा था। बताया जाता है कि 'मदर इंडिया' नरगिस द्वारा सुझाया गया नाम था। 
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mother india
बता दें कि मदर इंडिया तीसरे पोल के बाद महज एक वोट से ऑस्कर अवॉर्ड जीतने से चूक गई थी। उस साल बेस्ट फॉरेन फिल्म का अवॉर्ड इटालियन प्रोड्यूसर डीनो डे लॉरेन्टिस की फिल्म 'नाइट्स ऑफ केबिरिया' को मिला था। इसके बाद जो फिल्म ऑस्कर्स में फाइनल पांच में पहुंच पाई थी उनमें 1988 में आई मीरा नायर की फिल्म सलाम बॉम्बे और आमिर खान की 2001 में आई फिल्म लगान थी।
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