'मुगल मर्दिनी छत्रपति तारारानी'
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इतिहासकारों के मुताबिक छत्रपति तारारानी ऐसी ऐतिहासिक शख्सियत रही हैं, जिन्होंने औरंगजेब को कड़ी टक्कर दी थी। तारारानी 25 साल की उम्र में विधवा हो गई थीं, फिर भी उन्होंने कभी भी अपनी वीरता को नहीं छोड़ा। उन्होंने अपने लोगों के गौरव और स्वतंत्रता के लिए कई विदेशी शासकों, मुगलों, निजामशाही, आदिलशाही, कुतुबशाही, पुर्तगाली शासकों के साथ लगातार मोर्चा संभाले रखा।