प्रकाश झा
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फिल्म के बारे में प्रकाश झा कहते है," फिल्म की कहानी मेरे दिल को छू गयी,ये ऐसे लाचार रोजगारों की कहानी हैं जो बड़े बड़े हाईवे,रोड और ब्रिज तो बनाते हैं लेकिन खुद की जिंदगी ऐसी पथरीली रास्तो के बीच फस के रह जाती हैं जिसकी कोई मंजिल नही,जहाँ कोई रोशनी नही , सिर्फ दर्द की अंधेर रात बच जाती हैं। ये फ़िल्म मुझे मेरे 1980 की यादों में लेकर चली गयी जब मैंने अपने कैरियर की शुरुवात डॉक्यूमेंट्री फिल्म्स और 'दामुल' से की थी जो कि मजदूरों के हालात पर बनाई गई थी। जब फिल्म के डायरेक्टर गनी मेरे पास ये स्क्रिप्ट लेकर आये और उन्होंने मुझे मट्टो का अहम किरदार निभाने के लिए कहा और जब मैंने फिल्म की कहानी सुनी, तो न सिर्फ एक्टिंग के लिए हा कहा बल्कि प्रोडक्शन की सहायता के लिए भी हाथ बढ़ाया।"