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राजीव गांधी के कहने पर अमिताभ बच्चन ने लड़ा था चुनाव, 2 लाख वोटों से जीतकर भी छोड़ दी थी राजनीति

Thu, 23 May 2019 12:15 PM IST
भावना शर्मा एंटरटेनमेंट डेस्क, अमर उजाला
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amitabh bachchan - फोटो : social media
लोकसभा चुनाव के नतीजे आज आने वाले हैं । इस बीच सभी राजनीतिक पार्टियों में गहमागहमी मची है । जया प्रदा, सनी देओल, उर्मिला मातोंडकर, शत्रुघ्न सिन्हा, जया बच्चन और हेमा मालिनी जैसे बड़े सितारों की किस्मत भी दांव पर लगी है । बॉलीवुड से एक्टर-एक्ट्रेस का पॉलिटिक्स में शामिल होने का दौर काफी पुराना है। अमिताभ बच्चन ने भी 1984 में इलाहबाद से कांग्रेस की टिकट पर चुनाव लड़ा था ।
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amitabh bachchan - फोटो : social media
उस समय अमिताभ और राजीव गांधी के रिश्ते नई ऊंचाई पर थे । राजीव गांधी ने अपने दोस्त अमिताभ बच्चन को कांग्रेस के टिकट पर इलाहाबाद से चुनाव लड़ने के लिए तैयार कर लिया। अमिताभ बच्चन को इलाहाबाद से कांग्रेस का टिकट मिला और उन्होंने बड़े अंतर से हेमवती नंदन बहुगुणा को हराया। बहुगुणा और अमिताभ के बीच हुए चुनावी संघर्ष के कई दिलचस्प किस्से हैं।
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amitabh bachchan - फोटो : social media
1977 में अगर उत्तर भारत में कांग्रेस का सफाया हुआ था तो कांग्रेस ने 1984 में अमिताभ बच्चन को चुनाव में खड़ा कर उसका बदला लिया था । जब इंदिरा गांधी की हत्या के बाद उपजी सहानुभूति लहर ने विपक्ष के कई बड़े दिग्गजों को चुनावी अखाड़े में जमीन सुंघा दी थी। ग्वालियर में अटल बिहारी वाजपेयी और माधव राव सिंधिया जैसा ही एक और दिलचस्प चुनावी मुकाबला उत्तर प्रदेश के इलाहाबाद में माटी के लाल हेमवती नंदन बहुगुणा और छोरा गंगा किनारे वाला अमिताभ बच्चन के बीच भी हुआ था।

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amitabh bachchan - फोटो : social media
इलाहाबाद हेमवती नंदन बहुगुणा का राजनीतिक गढ़ माना जाता था। यूं तो बहुगुणा अविभाजित उत्तर प्रदेश (तब उत्तराखंड राज्य का गठन नहीं हुआ था) के गढ़वाल इलाके के रहने वाले थे लेकिन उनकी शिक्षा-दीक्षा इलाहाबाद में ही हुई थी। बहुगुणा की पत्नी कमला बहुगुणा भी इलाहाबाद की थीं। हालांकि बहुगुणा लखनऊ और पौड़ी गढ़वाल लोकसभा सीट से भी सांसद रह चुके थे। लेकिन 1984 में वह इलाहाबाद से लोकदल के उम्मीदवार थे। पूरा विपक्ष उनके पीछे एकजुट था।
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amitabh bachchan - फोटो : social media
ऐसे में उनके मुकाबले जब अमिताभ बच्चन को कांग्रेस ने उतारा तो यह चुनाव बेहद दिलचस्प हो गया था। अमिताभ तब तक सुपर स्टार बन चुके थे। उनकी कई फिल्में हिट हो चुकी थीं और एंग्री यंग मैन का नौजवानों में बेहद क्रेज था। लेकिन बहुगुणा भी राजनीति के मंझे हुए खिलाड़ी थे, इसलिए यह कहना मुश्किल था कि कौन जीतेगा।बहुगुणा को इस चुनाव में इलाहाबाद की अपनी जमीनी ताकत, पहाड़ी, कायस्थ और मुस्लिम मतदाताओं के मजबूत ध्रुवीकरण और निजी लोकप्रियता पर पूरा भरोसा था।
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amitabh bachchan - फोटो : social media
उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री और केंद्रीय मंत्री रहते हुए उन्होंने न जाने कितने लोगों की मदद की थी और कई तरह से उपकृत भी किया था। उन्हें चुनाव जीतने और प्रतिद्वंदी को हराने के सारे दांव-पेंच मालूम थे । अमिताभ सियासत के खेल में बिल्कुल नौसिखिए थे, इसलिए बहुगुणा को अपनी जीत की पूरी उम्मीद थी । उधर अमिताभ को अपनी सितारा छवि, युवाओं में लोकप्रियता, कांग्रेस के प्रति सहानुभूति लहर और सबसे ज्यादा अपने इलाहाबादी होने की ताकत का भरोसा था।
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amitabh bachchan - फोटो : social media
छोरा गंगा किनारे वाला की अपनी इलाहाबादी छवि भुनाने के लिए अमिताभ ने भी सारे फिल्मी हथकंडे अपनाने शुरू कर दिए थे। वह इलाहाबाद की सड़कों और गलियों में जिधर भी निकलते रास्ते जाम हो जाते थे। लड़के उनके पीछे दौड़ते थे और लड़कियां अमिताभ की एक झलक पाने के लिए छज्जों और छतों पर टूट पड़ती थीं। अमिताभ और उनकी अभिनेत्री पत्नी जया बच्चन धीरे धीरे पूरे इलाहाबाद में छा गए और बहुगुणा को लगने लगा कि उनकी सियासी जमीन खिसक रही है।

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amitabh bachchan - फोटो : social media
एक बार अमिताभ और बहुगुणा का काफिला आमने सामने आ गया। दोनों के समर्थकों में पहले निकलने के लिए नारेबाजी शुरू हो गई। तनाव खासा बढ़ गया तभी अचानक खुली जीप में सवार अमिताभ नीचे उतरे और उन्होंने जाकर बहुगुणा को प्रणाम किया और आशीर्वाद मांगा। बहुगुणा ने आशीर्वाद दिया और अमिताभ ने उन्हें पहले निकलने को कहा। बहुगुणा का काफिला निकल गया और प्रशासन ने चैन की ने सांस ली।

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हेमवती नंदन बहुगुणा - फोटो : amar ujala
कांग्रेस अध्यक्ष और तत्कालीन प्रधानमंत्री राजीव गांधी ने अपने दोस्त और बच्चन परिवार के वारिस अमिताभ बच्चन की जीत सुनिश्चित करने के लिए पूरा जोर लगा दिया। दिल्ली से कई धुरंधरों ने इलाहाबाद में डेरा जमा लिया। इनमें इलाहाबाद विश्वविद्यालय और दिल्ली के जवाहर लाल नेहरू विश्वविद्यालय की छात्र राजनीति के दिग्गज रहे देवी प्रसाद त्रिपाठी (डीपीटी) जैसे लोग भी थे। त्रिपाठी अब एनसीपी प्रवक्ता और सांसद हैं।
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उत्तर प्रदेश कांग्रेस के दिग्गज नेता जिनमें नारायण दत्त तिवारी, केंद्रीय मंत्री विश्वनाथ प्रताप सिंह आदि दिग्गज भी अमिताभ की जीत के लिए जुटने वाले नेताओं में शामिल थे। कांटे का मुकाबला धीरे-धीरे अमिताभ की तरफ झुकता गया और मतदान के बाद जब नतीजे आए तो इलाहाबाद में सियासत के दिग्गज हेमवती नंदन बहुगुणा राजनीति में नौसिखिए फिल्मी सितारे अमिताभ बच्चन से 187795 वोटों से चुनाव हार गए। अमिताभ ने यह जीत भारी मतों की बढ़त से हासिल की थी।
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