लता मंगेशकर , गुलजार
- फोटो : सोशल मीडिया
गुलजार कहते हैं, ‘वह बहुत स्नेहमयी थी। सहज थीं। सरल थीं। कोई भी हो छोटा या बड़ा। सबसे प्यार से मिलना। पूरा सम्मान देना और सबसे बड़ी बात कि किसी भी छोटे को छोटा न महसूस होने देना उनकी शख्सियत की बहुत बड़ी खासियत थी।’ गुलजार का ही लिखा गाना, ‘नाम गुम जाएगा, चेहरा ये बदला जाएगा, मेरी आवाज ही पहचान है, गर याद रहे’ रविवार के पूरे दिन न्यूज चैनलों पर बजता रहा। गुलजार के मुताबिक, ‘ये गाना जब मैंने उन्हें दिया तो कहा था कि ये आपका ऑटोग्राफ सॉन्ग है।’ शिवाजी पार्क पहुंचे हर शख्स के पास लता मंगेशकर से जुड़ी ऐसी ही कोई न कोई याद जरूर थी। किसी को उनका गाना ‘लग जा गले कि फिर ये हंसी रात हो ना हो’ बार बार याद आ रहा था तो कोई ‘रहें ना रहें हम..’ नम आंखों से गा रहा था।