बॉलीवुड में अपने अभिनय से अलग पहचान बना चुके मनोज बाजपेयी 23 अप्रैल को अपना जन्मदिन मानते हैं। बिहार के रहने वाले एक्टर मनोज ज्यादातर फिल्मों में निगेटिव रोल में नजर आए। आइए उनके जन्मदिन के मौके पर जानते हैं उनसे जुड़े दिलचस्प किस्से।
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Manoj Bajpayee
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स्कूल के दिनों में मनोज काफी शर्मीले थे, इसलिए स्कूल टीचर उन्हें पूरी क्लास के सामने हरिवंश राय बच्चन की कविता सुनाने के लिए कहते थे। मनोज बाजपेयी को NSD से पहले तीन बार रिजेक्शन मिला था, जिसके बाद वह टूट से गए लेकिन हार नहीं माने। चौथी बार जब उन्होंने NSD के लिए अप्लाई किया उन्हें फिर रिजेक्ट कर दिया गया लेकिन स्टूडेंड के तौर पर। मनोज को वहां पढ़ाने की जिम्मेदारी मिल गई थी।
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बॉलीवुड में मनोज बाजपेयी को 1998 मे राम गोपाल वर्मा की फिल्म 'सत्या' से पहचान मिली। इस फिल्म के लिए उन्हे सर्वश्रेष्ठ सह अभिनेता का राष्ट्रीय पुरस्कार भी प्राप्त हुआ।
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मनोज ने एक इंटरव्यू में बताया था कि एक वक्त ऐसा था जब न्यूज़ चैनल उन्हें भाव नहीं देते थे। उन्होंने कहा था, जब भी मैं किसी पार्टी में जाता था तो न्यूज चैनल के कैमरे जब गलती से मेरी तरफ आ भी जाते थे तो झटके से हटा लेते थे।
अमृता प्रीतम के मशहूर उपन्यास 'पिंजर' पर आधारित फिल्म पिंजर के लिए उन्हे पहली बार राष्ट्रीय पुरस्कार मिला था। इसके बाद कटरीना ने मनोज बाजपेयी के पैर छूते हुए कहा था, मैंने अपनी जिंदगी में कभी ऐसी एक्टिंग नहीं देखी। प्रकाश झा की फिल्म 'राजनीति' के बाद मनोज की जिंदगी पटरी पर आ गई और उसके बाद धीरे-धीरे मनोज को बॉलीवुड में एक अलग पहचान मिलने लगी। हाल ही में मनोज बाजपेयी को बागी 2 में DIG के किरदार में देखा गया था।