कविता कौशिक
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कविता ने इस पोस्ट में लिखा, 'कुछ चीजें जो साल 2016 में मेरे पिता के निधन के साथ खत्म हो गईं, मैंने बप्पा को घर लाना बंद कर दिया। शायद मैं अपने महादेव के साथ यह कहते हुए लड़ रही थी-आपने मेरे डैड को मुझसे छीन लिया, मैं आपके बेटे से प्यार नहीं करूंगी। मैंने कुछ पाने की वो आग खो दी, वो उत्साह, लक्ष्य सब खत्म हो गया, लेकिन जिस ईश्वर ने हमें बनाया है, वही हमारे बनाए बैरियर्स से हमें बाहर भी निकालता है।'