कंगना रणौत
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कंगना आगे कहती हैं, कौन हैं ये खून के प्यासे दरिंदे जिन्होंने मासूमों को काट कर गटर में फेंका। अपनी नागरिकता के लिए कब तक ये दरिंदे खून की होली खेलेंगे? किसने छीनी इनकी नागरिकता? ये मेरा जन्मसिद्ध अधिकार है की मैं सवाल करूं? कौन होते हो तुम किसानों से उनका हक छीनने वाले? बताओ क्या नहीं समझ आ रहा तुम्हें?