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कादर खान के 10 यादगार किरदार, इन फिल्मों को कर बने अदाकारी के सुपरस्टार

Tue, 31 Dec 2019 09:11 AM IST
shrilata biswas एंटरटेनमेंट डेस्क
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kader khan - फोटो : social media
अपने करियर में 300 से ज्यादा फिल्मों में काम करने वाले कादर खान को हमेशा उनके सदाबहार किरदारों के लिए याद किया जाएगा। कादर खान एक अभिनेता होने के साथ-साथ लेखक और निर्देशक भी थे। आज कादर खान की पुण्यतिथि पर आपको बताते हैं उनके 10 बेहतरीन किरदारों के बारे में...
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kader khan - फोटो : social media
किरदार – धनीराम
फिल्म- दरिया दिल (1988)


वर्ष 1988 में आई फिल्म दरिया दिल में अपनी बेहतरीन अदाकारी से कादर खान ने सबका दिल जीत लिया था। अपने बेटों को अच्छाई का पाठ पढ़ाने वाले धनीराम, जी कर भी मरने का सस्पेंस पैदा करते हैं। वो चाहते हैं कि उनके तीनों बेटे उनके सबसे छोटे बेटे, यानि फिल्म के मुख्य अभिनेता गोविंदा जैसे मेहनती, नेक और ईमानदार हों लेकिन, उनके दोनों बड़े बेटे उनकी बातों को हवा में उड़ाते रहते हैं, और अपने बाप से परेशान होकर उनका कत्ल कर देते हैं। बाद में पता चलता है कि धनीराम मरे नहीं, और अपने बेटों की करतूतों को जगजाहिर करते हैं।
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kader khan - फोटो : social media
किरदार – पीताम्बर
फिल्म - हम हैं कमाल के (1993)


वर्ष 1993 में रिलीज हुई फिल्म दो अंधे और बहरे चरित्रों पर आधारित है। अंधे का किरदार अनुपम खेर ने और बहरे का किरदार कादर खान ने निभाया है। यह एक कॉमेडी एक्शन फिल्म है। फिल्म सच में विकलांगों को दिव्यांग दर्शाती है। साथ ही एक और एक ग्यारह के मुहावरे को भी परिभाषित करती है। फिल्म में नीलाम्बर और पीताम्बर अंधे और बहरे होने के बावजूद जैसे अपने दुश्मनों को धूल चटाते हैं और जैसे अपनी कॉमिक टाइमिंग से दर्शकों को हंसाते हैं, वह काबिल-ए-तारीफ है।

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aankhen - फोटो : social media
किरदार - हंसमुख राय
फिल्म – आंखें (1993)


दो शरारती बच्चों के पिता हसमुख राय, यानि कादर खान अपने बेटों की नासमझ हरकतों से बहुत परेशान हैं। वह अपने बेटों को सुधारने की हर संभव कोशिश करना चाहते हैं। एक पिता की अपनी औलादों के लिए चिंता, कादर खान के अभिनय से साफ झलकती है। समय-समय पर बच्चों को अच्छी नसीहत देना भी एक अच्छे पिता की तरह वह कभी नहीं भूलते। इस फिल्म में भी कादर खान का डबल रोल है।
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kader khan - फोटो : social media
किरदार - किशन सिंह
फिल्म - राजा बाबू (1994)


जमीदारों के ठाट और शाही जिंदगी में पले बढ़े हुए राजा बाबू यानि गोविंदा। आप सोच रहे होंगे कि फिर से गोविंदा! अभी क्या बताएं? गोविंदा और कादर खान की कॉमिक जोड़ी थी ही इतनी मशहूर और लोगों की पसंदीदा कि लोग इनकी फिल्मों को हाथों-हाथ लेते थे। इस फिल्म में भी कादर खान ने गोविंदा के बाप का ही किरदार निभाया है। उनकी पत्नी और गोविंदा की मां अरुणा ईरानी अपने बच्चे की हर हरकत पर पर्दा डालती है। वहीं, दूसरी ओर कादर खान यानि किशन सिंह अपने बेटे के निकम्मेपन से परेशान हैं। इस फिल्म में भी कादर खान ने बाप के रोल के साथ इंसाफ किया है। अपने बेटे को सही रास्ता दिखाने के लिए वह कोई कसर बाकी नहीं छोड़ते।
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kader khan - फोटो : social media
किरदार - कमिश्नर जगमोहन
फिल्म - छोटे सरकार (1996)


नब्बे के दशक के सबसे बेहतरीन कलाकारों में से एक गोविंदा की छोटे सरकार फिल्म भी एक सराहनीय फिल्म है। इस फिल्म को बेहतर बनाने में एक बड़ा योगदान कादर खान का भी है। पुलिस कमिश्नर जगमोहन के रोल में दर्शकों ने उन्हें बहुत पसंद किया। फिल्म में पुलिस की चालाकी, बहादुरी और होशियारी का बेहतरीन नमूना कादर खान ने अपने बेहतरीन अभिनय से पेश किया है।
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kader khan - फोटो : social media
किरदार - मि. खुराना
फिल्म - साजन चले ससुराल (1996)


यह फिल्म अपने समय की सबसे बेहतरीन कॉमेडी ड्रामा फिल्मों में से एक है। गोविंदा, करिश्मा कपूर और तब्बू जैसे बड़े कलाकारों से सजी यह फिल्म मनोरंजन का सबूत देने वाली फिल्म है। इस फिल्म में कादर खान के किरदार का नाम मि. खुराना है, जो कि तब्बू के पिता हैं। फिल्म में मि. खुराना को टाइम ज्यादा नहीं दिया गया है, लेकिन जितना भी है वो यादगार है।

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kader khan - फोटो : social media
किरदार - मास्टर चबन
फिल्म – नसीब (1997)


गोविंदा के साथ ही 1997 में आई फिल्म नसीब में कादर खान गोविंदा के बुरे वक्त के दोस्त की तरह सामने आए। इस फिल्म में कादर खान का रोल एक दर्जी का है। फिल्म में कादर खान के डायलॉग दिल की गहराई में उतर जाते हैं। 'जिंदगी तो खुदा की रहमत है, जो न समझे उसकी जिंदगी पर लानत है।' कुछ इसी तरह के डायलॉग ने इस फिल्म को यादगार बना दिया।

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kader khan govinda - फोटो : file photo
किरदार- के. के. सिंघानिया
फिल्म - दूल्हे राजा(1998)


वर्ष 1998 में आई फिल्म दूल्हे राजा हर पीढ़ी के लिए एक मनोरंजक फिल्म है। फिल्म में फाइव स्टार होटल के मालिक के. के. सिंघानिया को भला कौन भुला सकता है। बेहतरीन कॉमिक टाइमिंग से कादर खान ने इस फिल्म में सबका दिल जीता। फिल्म के मुख्य अभिनेता गोविंदा के साथ उनकी नोंक झोंक ने दर्शकों को ठहाके लगाने पर मजबूर किया। साथ ही फिल्म में एक पिता होने का किरदार भी उन्होंने शानदार तरीके से निभाया। कॉमेडी से भरपूर इस फिल्म में गोविंदा और रवीना टंडन मुख्य भूमिका में थे। 

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kader khan and govinda - फोटो : social media
किरदार - कादर भाई/वेटर
फिल्म - बड़े मियां, छोटे मियां (1998)


वर्ष 1998 में ही रिलीज हुई फिल्म बड़े मियां छोटे मियां एक कॉमेडी एक्शन फिल्म है। फिल्म दो चोर और दो सिपाहियों पर आधारित है। जिनका किरदार उस समय के सबसे बेहतरीन कलाकार अमिताभ बच्चन और गोविंदा ने निभाया है। कादर खान एक वेटर और उसी रेस्टोरेंट के मालिक के रूप में नजर आते हैं। उनके कुछ मिनटों का डबल रोल लोगों की फिल्मी यादों का एक अभिन्न हिस्सा है।
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kader khan and Govinda
किरदार - अकलिंदर 'टोपीचंद' भंगारी 
फिल्म - अंखियों से गोली मारे (2002)


भंगारी दादा का नाम तो याद होगा ही। मुंबई चोर बाजार में बहुत बड़ी भंगार की दुकान के मालिक भंगारी दादा यानी कि कादर खान। ये अपनी बेटी की शादी एक गैंगस्टर से करना चाहते हैं, लेकिन इनकी बेटी एक रईस यानि कि गोविंदा से प्यार करती है। ये फिल्म कादर खान की दमदार एक्टिंग के लिए एक यादगार फिल्म है। भंगारी दादा का वो साधारण चरित्र भी कादर खान के होने से बहुत ही असाधारण लगता है।

अंतिम दिनों में ऐसी हो गई थी कादर खान की हालत, ये थे उनके आखिरी शब्द
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