शेखर सुमन
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शेखर सुमन ने आगे कहा कि पुराने दिनों में, लोगों को हीरामंडी भेजा जाता था, जो एक 'फिनिशिंग स्कूल' की तरह था। इसमें लोग "प्राचीन वस्तुएं, शिष्टाचार, प्रेम-प्रसंग की कला, कविता, संगीत और नृत्य" सीखते थे। हीरामंडी का योगदान बहुत बड़ा था, यह एक संस्था थी, लेकिन हमने हमेशा तवायफों को हमेशा वेश्या की तरह देखा है। इसमें कुछ भी गलत नहीं है।