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Lucknow Ka Hero: गोमती किनारे के छोरे ने गोरेगांव आकर किया धमाल, जानिए अतुल श्रीवास्तव से उनकी राम कहानी

Wed, 22 Feb 2023 11:07 AM IST
साक्षी अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई
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अतुल श्रीवास्तव - फोटो : amar ujala

सौ से ज्यादा धारावाहिकों में काम कर चुके अभिनेता अतुल श्रीवास्तव ने पिछले कुछ साल से धारावाहिकों से दूरी बना रखी है। इन दिनों उनका पूरा ध्यान फिल्मों पर है। 'टॉयलेट एक प्रेम कथा', 'बजरंगी भाईजान' और 'कश्मीर फाइल्स' जैसी फिल्मों के जरिये अपनी अलग पहचान बना चुके उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ से ताल्लुक रखते हैं। फिल्मों में पहला मौका उन्हें 'मुन्ना भाई एमबीबीएस' में मिला और जब ये मौका उनके सामने आया तब तक उन्हें राजकुमार हिरानी के बारे में ही नहीं पता था। हाशिये के सुपरस्टार सीरीज में हम उन कलाकारों से बातें करते हैं जिन्होंने सुपर सितारों के बीच न सिर्फ अपनी पहचान बनाई बल्कि कमर्शियल सिनेमा के सेटअप में हाशिये पर रहकर भी अपना एक अलग प्रशंसक वर्ग बनाया। इस बार बारी है अभिनेता अतुल श्रीवास्तव की। तो पेश है, अतुल श्रीवास्तव की कहानी, उन्हीं की जुबानी...

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अतुल श्रीवास्तव - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई
लखनऊ का हीरो
लखनऊ में निराला नगर की सीएसआईआर कालोनी में मेरा बचपन बीता है। लखनऊ में ही पला बढ़ा। मेरे पिता बिमल चंद्रा काउंसिल ऑफ साइंटिफिक एंड इंडस्ट्रियल रिसर्च (सीएसआईआर) में वैज्ञानिक रहे हैं। मां इंदु चंद्रा अपने जमाने के हिसाब से काफी पढ़ी लिखी और समझदार महिला रहीं। चार भाइयों और एक बहन की परवरिश उन्होंने एक किसी गुरु की तरह ही की। एक्टिंग तो तो मैं बचपन से ही करता आ रहा था, लेकिन ये पेशा भी होता है, ये पता नहीं था। छठवीं और सातवीं क्लास से ही अपनी कालोनी के सांस्कृतिक कार्यक्रमों में हिस्सा लेने लगा। मैं कॉमेडी करता और लोग हंसते। इतनी समझ नहीं थी कि ये समझ पाऊं कि ये क्यों हंस रहे हैं, पर अच्छा लगता था कि मैं कुछ तो ऐसा कर रहा हूं जिसका असर दूसरों पर हो रहा है। मेरे भीतर का कलाकार यहीं से पनपने लगा।
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अतुल श्रीवास्तव - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई

हॉकी छोड़ अभिनय में आया

उन दिनों मैं हॉकी खूब खेलता था। खुद को बड़ा हॉकी खिलाड़ी भी समझने लगा था। फिर एक बार दसवीं में मैं स्टेडियम पहुंच गया हॉकी स्टिक लेकर और उस दिन समझ में आया कि वह दूसरों को हंसाने वाला काम ही बेहतर है, यहां तो मुझसे बड़े बड़े तमाम धुरंधर हैं। तब मैंने  भारतेंदु नाट्य अकादमी में प्रवेश लिया। ये बात 1984 की है। दो साल बाद मैं दिल्ली आ गया और साक्षी थिएटर ग्रुप के साथ जुड़कर नाटक करने लगा। ये सिलसिला कोई 7-8 साल चला। फिर मुझे जिस धारावाहिक में पहला काम मिला, वह था 'कशमकश'। और, यही धारावाहिक मुझे 1994 में मुंबई ले आया।
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अतुल श्रीवास्तव - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई
पहला मौका कशमकश में मिला
धारावाहिक 'कशमकश' में मेरा काम लोगों को पसंद आया और इसके बाद लगातार काम मिलता रहा। गिनने बैठें तो मैने 110 धारावाहिकों में काम किया है जिनमे से करीब 90 में तो मेरी मुख्य भूमिका रही। आमतौर पर मुझे नौकर वाले रोल ही लोग ऑफर करते थे। लेकिन धीरे धीरे मुझे समझ आने लगा कि अपने व्यक्तित्व को आकर्षक बनाना हमारे अपने हाथ में। अपने सबसे बड़े प्रशंसक और क्रिटिक हम खुद होते हैं। कला के क्षेत्र में जो पहला पाठ मैंने सीखा, वह था स्वत यानि खुद को समझना। ईश्वर ने मुझे इतनी समझ तो दी ही थी। प्रतिभा दूसरे नंबर पर आती है, पहली तो सोच है। लेकिन, इस दौरान मैंने रंगमंच का साथ नहीं छोड़ा।
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अतुल श्रीवास्तव - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई
सौरभ शुक्ला के साथ गोरेगांव में रहा
दिल्ली रंगमंच के कलाकारों को मुंबई लाने का अब तक का सबसे बड़ा जरिया रही है फिल्म 'बैंडिट क्वीन'। इनमें भी ज्यादातर मेरे समकालीन ही थे और सब मुझे बुलाते रहते थे। मैं तब आया जब मेरी जेब में कुछ पैसे आए। मुंबई आया तो गोरेगांव के एक फ्लैट में साझादीर बनकर रहने लगा। विजय आचार्य, सौरभ शुक्ला, जितेंद्र शास्त्री मेरे फ्लैटमेट्स हुआ करते थे। संयोग देखिए कि हम सबने कामयाबी और पहचान दोनों पाईं। मेरा शुरू से मानना रहा है कि एक कलाकार को प्रयोगों से घबराना नहीं चाहिए। इसलिए मैंने धारावाहिक 'नीलांजना' में खलनायक का किरदार किया और इसे पसंद भी खूब किया गया।
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अतुल श्रीवास्तव - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई

नहीं पता था राजकुमार हिरानी कौन हैं

धारावाहिकों में लंबी पारी खेलने के बाद सिनेमा की पिच पर मेरी पारी फिल्म 'मुन्ना भाई एमबीबीएस' से शुरू हुई। जब पहली बार मुझे इस फिल्म के लिए बुलाया गया, तब फिल्म के हीरो शाहरुख खान थे। उन्होंने फिल्म छोड़ी तो इस पर काम रुका रहा। फिर साल भर बाद दोबारा इसके लिए बुलावा आया। फिल्म की कास्टिंग देखने वालों को हर किरदार में मंझे हुए कलाकार चाहिए थे और उनकी जिद पर मैने ये फिल्म कर ली। आप यकीन नहीं करेंगे लेकिन सच में मुझे उस समय तक राजकुमार हिरानी के बारे में पता नहीं था। 'मुन्ना भाई एमबीबीएस' के बाद 'एक चालीस की लास्ट लोकल' और 'भूतनाथ' जैसी फिल्में की।
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अतुल श्रीवास्तव - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई
'यहां सब ज्ञानी हैं' में केंद्रीय किरदार
'मुन्ना भाई एमबीबीएस' के बाद 'भूतनाथ', 'एक चालीस की लास्ट लोकल', जैसी तीन फिल्में करने के बाद सिनेमा में लंबा अंतराल आया और इस दौरान मैं धारावाहिक भी करता रहा। लेकिन फिल्म 'बजरंगी भाईजान' के बाद के बाद मैने अपना पूरा ध्यान सिनेमा पर लगाने का फैसला किया। इसके बाद 'टॉयलेट -एक प्रेम कथा', 'लुका छुपी', 'बत्ती गुल मीटर चालू', जैसी फिल्में की तो एक सिलसिला शुरू हो गया। इसी बीच मैने एक फिल्म 'यहां सब ज्ञानी हैं' भी की जो ओटीटी पर उपलब्ध है। इस फिल्म में मेरा केंद्रीय किरदार है।
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अतुल श्रीवास्तव - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई
आगरा घराने का संगीतज्ञ
कम लोगों को ही पता है कि मैं संगीत में भी प्रशिक्षित हूं। आगरा घराने से ताल्लुक रखता हूं और शास्त्रीय संगीत में पारंगत हूं लेकिन मैंने संगीत को कभी अपना पेशा नहीं बनाया। बस, दोस्तों के साथ संगीत की बैठकें होती रहती है। अब मेरा बेटा अक्षत श्रीवास्तव भी निर्देशक बन चुका है। कोरोना महामारी के समय मैं भी इसकी चपेट में आया। ईश्वर की ही कृपा रही कि मैं बच गया। लेकिन, इस महामारी ने मेरे दो भाई प्रफुल्ल और मयंक मुझसे छीन लिए। प्रफुल्ल एडिटर थे और मयंक श्रीवास्तव कोरियोग्राफर। चौथे भाई संजय श्रीवास्तव अब भी लखनऊ में रहते हैं और मेरी कामयाबी दूसरों से सुनकर फख्र करते हैं।
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