डॉक्टर हरिवंश राय बच्चन का नाम जेहन में आते ही उनकी रचना जुबां पर खुद-ब-खुद आने लगती है। बात सात दशक पुरानी है, जब मंचों पर हरिवंश राय अपनी इस काव्य का पाठ करते तो लोग सुध-बुध खो बैठते थे। हिंदी के मशहूर कवि-लेखक हरिवंश राय बच्चन 18 जनवरी 2003 को मुंबई में इस दुनिया को अलविदा कह गए थे। इनकी कविताओं में सरलता और संवेदनशीलता का जो मिश्रण था वो उनके निधन के बाद हमेशा के लिए उन्हें अमर कर गया।