शीश महल
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शीश महल (1950)
सोहराब मोदी को बड़े-बड़े सेट बनाकर फिल्मों का निर्माण करने के लिए जाना जाता था। जब उन्होंने वर्ष 1950 में अपनी फिल्म 'शीश महल' बनाई तो इसके लिए भी उन्होंने एक भव्य सेट का निर्माण किया। समीक्षकों ने सोहराब के इस काम की बहुत सराहना की। हालांकि, फिल्म कुछ खास पसंद नहीं आई। जब इस फिल्म की स्क्रीनिंग मुंबई के मिनर्वा थिएटर में रखी गई तब सोहराब ने देखा कि पहली ही कतार में एक व्यक्ति आंख बंद करके बैठा हुआ है। उन्हें दर्शकों से ऐसी प्रतिक्रिया की आशा नहीं थी। उन्होंने अपने लोगों से कहा कि सभी लोगों को उनके पैसे वापस कर दें सबको बाहर भी निकाल दें। सोहराब का आदेश पाकर उनके कर्मचारी गए लेकिन उतनी जल्दी वह वापस भी आ गए। उन्होंने सोहराब को बताया कि वह आदमी आंख बंद करके नहीं बैठा है, बल्कि वह दृष्टिहीन है। वह फिल्म देखने नहीं, बल्कि फिल्म की लाइनें सुनने के लिए आया है। तब सोहराब को थोड़ी तसल्ली हुई। फिर भी दर्शकों के लिए यह फिल्म काफी अच्छी साबित हुई। इस फिल्म में सोहराब के अलावा नसीम बानो, निगार सुलताना, प्राण, लीला मिश्रा जैसे कलाकारों ने मुख्य भूमिकाएं निभाईं।