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इन 10 फिल्मों से निकला बॉलीवुड का पहला खान सितारा, तीनों खान से बरसों पहले की हैं ये कहानियां

Wed, 25 Sep 2019 08:11 AM IST
anand anand मुंबई डेस्क, अमर उजाला
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feroz khan - फोटो : social media
फिरोज खान का नाम हिंदी सिनेमा के सबसे स्टाइलिश अभिनेताओं में लिया जाता है। उन्हें न सिर्फ बॉलीवुड का काऊब्वॉय कहा जाता था, बल्कि वह सिनेमा के पहले खान सितारे भी रहे जिनके नाम पर फिल्में घोषित होते ही बिक जाया करती थीं। एक उम्दा अभिनेता, निर्देशक व निर्माता फिरोज खान 25 सितंबर 1939 को तब के बैंगलोर में अफगानिस्तान से विस्थापित होकर भारत आए एक पठान परिवार में जन्मे। उनका खानदान गजनी, अफगानिस्तान का रहने वाला था और उनकी मां ईरानी थीं। उनकी सालगिरह पर जानिए उन 10 फिल्मों के बारे में जिसने बॉलीवुड को पहला खान सितारा दिया।
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Bahurani - फोटो : social media
बहूरानी (1963)
किरदार - विक्रम


साल 1959 में फिल्म दीदी से डेब्यू करने के चार साल बाद जाकर फिरोज खान को इस फिल्म में लीड रोल मिला। टी प्रकाश राव निर्देशित ये फिल्म, तेलगु फिल्म अर्धांगी का रीमेक है। इस फिल्म में फिरोज के साथ माला सिन्हा व गुरु दत्त भी मुख्य किरदारों में हैं। फिल्म एक परिवार की कहानी है जिसमें एक ज़मीनदार के दो बेटे होते हैं, पहली पत्नी से रघु (गुरुदत्त) व दूसरी से विक्रम (फिरोज)। विक्रम हमेशा रघू को धमकाता डराता रहता है, लेकिन रघु की शादी के बाद सब सुधर जाता है। इसी कहानी पर फिल्म 1992 में फिल्म अनिल कपूर की फिल्म बेटा भी बनी।
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Oonche Log - फोटो : amar ujala mumbai
ऊंचे लोग (1965)
किरदार - रजनीकांत


इस फिल्म में पहली बार फिरोज खान ने दो बड़े कलाकारों के साथ काम किया। राज कुमार व अशोक कुमार जैसे उम्दा अभिनेताओं के बीच उनके अभिनय की भी काफी प्रंशंसा हुई। फिरोज खान के फिल्मी करियर के लिए यह एक सुपरहिट फिल्म साबित हुई। फणी मजूमदार निर्देशित इस फिल्म में अशोक कुमार एक रिटायर्ड मेजर बने थे, वहीं राज कुमार और फिरोज खान उनके बच्चे। एक रिटायर्ट अंधा मेजर अपने बेटों की शादी कराने निकलता है, इसी कहानी के बीच खूब सा ड्रामा है। फिल्म को 13वें राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कारों में भी सम्मानित किया गया।

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Raat Aur Din - फोटो : amar ujala mumbai
रात और दिन (1967)
किरदार - दिलीप


यह फिल्म मशहूर अदाकारा व संजय दत्त की मां नरगिस दत्त की आखिरी फिल्म थी और वही इस फिल्म में मुख्य किरदार में थी। इस फिल्म में फिरोज खान व प्रदीप कुमार उनके साथ सपोर्टिंग रोल्स में नज़र आए थे। साल 1967 में आई यह फिल्म मल्टिपल आइडेंटिटी डिसऑर्डर पर बनी फिल्म है। फिल्म में नरगिस दोहरे चरित्र का प्रदर्शन करती हैं। नरगिस के पति का किरदार प्रदीप कुमार निभा रहे हैं वहीं फिरोज खान उनके दोस्त का। फिल्म को काफी अच्छा रेसपोंस मिला था, नरगिस दत्त के अभिनय की सराहना के साथ साथ फिरोज खान को भी उनके किरदार में बहुत पसंद किया गया। 
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Aadmi Aur Insaan - फोटो : amar ujala mumbai
आदमी और इंसान (1969)
किरदार - जय किशन 


बी आर चोपड़ा निर्मित इस फिल्म को उनके भाई यश चोपड़ा ने डायरेक्ट किया है। इस फिल्म में फिरोज खान के साथ धर्मेंद्र व सायरा बानो हैं। फिल्म में फिरोज एक अमीर आदमी का किरदार निभा रहे हैं, वहीं धर्मेंद्र एक आम आदमी का। धर्मेंद्र के किरदार को पढ़ा लिखा कर फिरोज खान का किरदार अपनी कंपनी में उसे काम देता है। आखिर में एक लड़की के चक्कर में दोनों के बीच गलतफ़हमी पैदा हो जाती है, इसी पर कहानी आधारित है। फिरोज खान ने इस फिल्म के लिए फिल्मफेयर फॉर बेस्ट सपोर्टिंग एक्टर का पुरस्कार अपने नाम किया था। 
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Apradh - फोटो : amar ujala mumbai
अपराध (1972)
किरदार - राम खन्ना


इस फिल्म से फिरोज खान ने पहली बार निर्देशन और फिल्म के निर्माण दोनो में एक साथ कदम रखा और साथ ही साथ फिल्म में अभिनय भी किया। फिल्म में उनके साथ मुमताज़ भी अहम भूमिका में नज़र आईं। जहां मुमताज़ एक चोर का किरदार अदा कर रही हैं, वहीं राम एक रेसर का, दोनो जरमनी में रहते हैं। दोनों को पहली नज़र में प्यार हो जाता है। अपने प्यार को मुकम्मल करने हेतू दोनो अपना काम छोड़ भारत आ जाते हैं। पर उनका बीता हुआ कल उनके लिए गलत साबित होता है। यह पहली भारतीय फिल्म है जिसमें रेसिंग को दिखाया गया है।  
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Khote Sikkay - फोटो : amar ujala mumbai
खोटे सिक्के (1974) 
किरदार - दिलबर 


कहा जाता है कि सलीम जावेद को फिल्म शोले की प्रेरणा नरेंद्र बेदी निर्देशित फिल्म खोटे सिक्के से ही मिली थी। फिल्म में एक गांव डाकुओं से परेशान है। एक गांव का आदमी अपने भाई और उसके पांच दोस्तों को गांव की रक्षा के लिए ले आता है। यह पांच लोग ही फिल्म के असली खोटे सिक्के हैं, जो अजीबो गरीब काम कर अपनी रोज़ी रोटी चलाते हैं। फिल्म में फिरोज दिलबर का किरदार अदा कर रहे हैं, जो डाकुओं के सरदार को मारना चाहता है। फिर वह भी उन्हीं पांच लोगो के साथ मिलकर डाकुओं को खत्म करता है। फिल्म में फिरोज के साथ डैनी डेंज़ोंग्पा, रेहाना सुल्ताना, रंजीत, नरेंद्र नाथ व कई अन्य कलाकार नज़र आए। ये फिल्म अपने समय की ब्लॉकबस्टर फिल्म साबित हुई। 

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Dharmatma - फोटो : amar ujala mumbai
धर्मात्मा (1975)
किरदार - रणबीर 


फिरोज खान निर्मित और निर्देशित यह पहली भारतीय फिल्म है जिसे अफगानिस्तान में फिल्माया गया है। काफी हद तक हॉलीवुड की फिल्म द गॉडफादर पर आधिरत इस फिल्म ने फिरोज खान को करियर की ऐसी ऊंचाइयों पर ला खड़ा किया, जो शायद वे अपने सपनों में सोचा करते होंगे। फिल्म में फिरोज खान के साथ हेमा मालिनी, रेखा, प्रेमनाथ, इम्तियाज खान, डैनी डेंज़ोंग्पा, फरीदा जलाल, रणजीत आदी कलाकार नज़र आए। यह फिल्म एक सुपरहिट फिल्म साबित हुई। 

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Nagin - फोटो : amar ujala mumbai
नागिन (1976)
किरदार - राज


ब्लॉक बस्टर हिट फिल्म नागिन का निर्माण और निर्देशन राजकुमार कोहली ने किया। यह फिल्म पहली मल्टीस्टारर फिल्मों में से एक है। कहा जाता है कि इस फिल्म को फ्रेंच फिल्म द ब्राइड वोर ब्लैक से प्रेरणा लेकर बनाया गया है। फिल्म में फिरोज खान के साथ, सुनील दत्त, रीना रॉय, जीतेंद्र, संजय खान, विनोद महरा, रेखा व कई अन्य कलाकार सपोर्टिंग किरदारों में ही थे। सुपरनैचुरल फिल्मों की नींव का पत्थर कही जाने वाली ये फिल्म सुपरहिट साबित हुई थी। फिल्म के बाद में कई रीमेक अलग अलग भाषाओं में बने।

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Qurbani - फोटो : amar ujala mumbai
कुर्बानी (1980) 
किरदार - राजेश


अपने समय की सबसे महंगी फिल्मों में से एक यह फिल्म एक इटैलियन फिल्म द मास्टर टच पर आधारित है। फिरोज खान निर्देशित इस फिल्म में उनके साथ विनोद खन्ना, जीनत अमान, अमजद खान, शक्ति कपूर, अरुणा ईरानी, अमरीश पुरी और कादर खान भी नज़र आए। इस ब्लॉकबस्टर फिल्म का गाना आप जैसा कौई आज भी बड़े चाव से सुना जाता है।  
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Janbaaz - फोटो : amar ujala mumbai
जांबाज़ (1986) 
किरदार - राजेश


यह फिल्म भी फिरोज खान के प्रोडक्शन हाउज़ एफके प्रोडक्शन्स के बैनर तले ही बनी, जिसे उन्होंने खुद ही निर्देशित भी किया। फिल्म में फिरोज के साथ अनिल कपूर, डिंपल कपाड़िया अहम भूमिकाओं में नज़र आए। अनिल और फिरोज भाई हैं। फिरोज एक पुलिसवाले हैं वहीं अनिल एक अय्याश भाई। दोनों एक ऐसे मोड़ पर आ खड़े हो जाते हैं, जहां फिरोज को अनिल को पकड़ने को कहा जाता है। यह फिल्म हॉलीवुड की डुअल इन द सन फिल्म पर आधारित है। कहा जाता है सुभाष घई को राम लखन की प्रेरणा यहीं से मिली।  
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