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ब्रेक से लौटते ही जीता था नेशनल अवॉर्ड, फारुख शेख की इन 10 फिल्मों से सीखिए जिंदगी का नया फलसफा

Wed, 25 Mar 2020 11:29 AM IST
Avinash Pal रोहिताश सिंह परमार, मुंबई
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FAROOQ SHEIKH
हिंदी सिनेमा के बहुमुखी अभिनेता फारुक शेख का फिल्मों में अभिनय का अलग ही अंदाज था। वह अपने किरदार में अपने अभिनय से जान डालने के बाद ही दम लेते थे। 70 और 80 के दशक में हिंदी सिनेमा को बेहतरीन फिल्में देने के बाद फारुख ने 15 साल तक फिल्मों से दूरी बनाए रखी। जब वह फिर से वापस आए तो उन्होंने वर्ष 2009 में आई फिल्म 'लाहौर' में अभिनय करके राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार अपने नाम किया। फारुख तो अब इस दुनिया का हिस्सा नहीं रहे लेकिन फिल्मों में उनके किरदार लोगों को हमेशा याद रहेंगे। आज उनके जन्मदिन पर हम आपको उनके कुछ बेहतरीन किरदारों के बारे में बताते हैं।  
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गरम हवा - फोटो : सोशल मीडिया
किरदार : सिकंदर मिर्जा 
फिल्म : गरम हवा (1973)

इस्मत चुगताई की इसी शीर्षक से लिखी छोटी सी कहानी पर आधारित इस फिल्म से फारुख ने अपने सिनेमाई करियर की शुरुआत की थी। आगरा की पृष्ठभूमि पर फिल्माई इस पॉलिटिकल ड्रामा फिल्म में 1947 के भारत बंटवारे से प्रभावित हुए एक मुस्लिम परिवार की कहानी है। फारुख ने इसमें एक जवान छात्र का किरदार निभाया है। वह अपने उन अधिकारों के लिए लड़ता है, जो कभी उसके हुआ करते थे। 
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गमन - फोटो : सोशल मीडिया
किरदार : गुलाम हसन 
फिल्म :  गमन (1978)

यह कहानी एक प्रवासी मुंबईकर गुलाम हसन (फारुख शेख) की है, जो उत्तर प्रदेश के एक छोटे से शहर बदायूं से मुंबई आकर अपने जीवन को ठीक प्रकार से जीने के लिए संघर्ष करता है। वह अपने परिवार का भरण पोषण करने के लिए मुंबई में टैक्सी चालक का काम करता है। इस फिल्म में उन्होंने अपनी सह कलाकार स्मिता पाटिल के साथ शानदार अभिनय किया है। 

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नूरी - फोटो : सोशल मीडिया
किरदार : युसूफ फकीर मोहम्मद  
फिल्म : नूरी (1979)

पूनम ढिल्लों के मुख्य अभिनेत्री के किरदार नूरी को केंद्र में रखकर बनाई गई इस फिल्म में फारुख ने उनके प्रेमी युसूफ का किरदार निभाया है। वह नूरी के पिता से उसका हाथ मांगता है और शादी तय हो जाती है। लेकिन किस्मत को कुछ और ही मंजूर था, और उनकी शादी नहीं हो पाती है। इस रोमांटिक ड्रामा फिल्म में फारुख ने बेहतरीन अभिनय किया है। 
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उमराव जान - फोटो : सोशल मीडिया
किरदार : नवाब सुल्तान 
फिल्म : उमराव जान (1981)

मुजफ्फर अली के निर्देशन में बनी इस फिल्म में अभिनेत्री रेखा ने एक तवायफ उमराव जान का किरदार निभाया है। नवाब सुल्तान के किरदार में फारुख शेख जब उमराव जान को देखते हैं तो उन्हें पहली नजर में ही उसे प्यार हो जाता है। इस पीरियड फिल्म में फारुख की अदाकारी का जलवा बहुत की सफाई से दिखाई देता है। किरदार के हिसाब से उन्होंने अपने चाल ढाल में वैसे ही बदलाव किए, जैसे किसी नवाब के होते हैं।
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चश्मे बद्दूर (1981) - फोटो : सोशल मीडिया
किरदार : सिद्धार्थ पराशर 
फिल्म : चश्मे बद्दूर (1981) 

फारुख ने कॉमेडी जॉनर में भी अपने हाथ आजमाए। यह कहानी तीन दोस्तों की है, जो दिल्ली यूनिवर्सिटी में पढ़ रहे हैं। जब उनकी गर्मियों की छुट्टियां होती हैं, तो वह घर नहीं जाते। फिर अचानक से उन तीनों की जिंदगी में एक लड़की का प्रवेश होता है। तीनों इस लड़की के चक्कर में एक दूसरे की टांग खिंचाई करने लगते हैं। फारुख ने राकेश बेदी और रवि बसवानी के साथ मिलकर कॉमेडी में भी अपने अभिनय का लोहा मनवाया।
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साथ साथ - फोटो : सोशल मीडिया
किरदार : अविनाश 
फिल्म : साथ साथ (1982)

अविनाश एमए का एक छात्र है, जो समाजवादी विचारधारा के साथ कठोर सिद्धांत रखता है। वह अपनी पीढ़ी से बिल्कुल भी प्रेरित नहीं है, और हद से ज्यादा पैसा कमाने का दृढ़ता से विरोध करता है। इस रोमांटिक ड्रामा फिल्म का निर्देशन रमन कुमार ने किया है, वहीं डेविड धवन के भाई दिलीप धवन ने इस फिल्म को निर्मित किया है। दीप्ति नवल और फारुख शेख की जोड़ी का करिश्मा यहां पर भी देखने को मिला।

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बाजार - फोटो : सोशल मीडिया
किरदार : बाजार 
फिल्म : सरजू (1982) 

सागर सरहदी के निर्देशन में बनी इस फिल्म को हैदराबाद की पृष्ठभूमि पर फिल्माया गया है। यह फिल्म भारत में दुल्हनों की खरीद के संवेदनशील मुद्दे को कुरेदती है। फारुख का किरदार इस फिल्म में सरजू का है जो शबनम (सुप्रिया पाठक) से प्यार करता है। वह उससे शादी करना चाहता है, लेकिन उनके रास्ते में पैसे की ऊंच नीच आती है। इस फिल्म में नसीरुद्दीन शाह, स्मिता पाटिल जैसे भी कलाकार हैं, जिनकी अलग कहानियां चलती हैं। फारुख के बेहतरीन अभिनय की इस फिल्म में खूब चर्चाएं हुईं।

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किसी से न कहना (1983) - फोटो : सोशल मीडिया
किरदार : रमेश त्रिवेदी 
फिल्म : किसी से न कहना (1983) 

रमेश (फारुख शेख) रमोला (दीप्ति नवल) से प्यार करता है, लेकिन रमेश के पिता एक ऐसी लड़की को अपने घर की बहू बनाना चाहते हैं जो अंग्रेजी नहीं जानते हो। रमोला एक पढ़ी-लिखी लड़की है। उसे अपनी पत्नी बनाने के लिए रमेश अपने पिता के एक दोस्त की मदद लेता है। कैसे भी करके ये सब अपनी योजना में कामयाब हो जाते हैं। फिर शुरू होता है लंबे झूट का सिलसिला। इस कॉमेडी फिल्म में फारुख ने बहुत शानदार अभिनय किया है। दर्शकों और समीक्षकों ने उनके अभिनय को खूब सराहा।

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कथा - फोटो : सोशल मीडिया
किरदार : वासुदेव भट्ट 
फिल्म : कथा (1983) 

फारुख शेख ने इस फिल्म में बहुत फेंकू किस्म के इंसान वासुदेव का किरदार निभाया है। वह अपनी सफलता की झूठी कहानियों से हर किसी को प्रभावित कर देता है। उसका दोस्त राजाराम (नसीरुद्दीन शाह) एक लड़की से प्यार करता है, लेकिन उससे कहने से डरता है। वासुदेव उस लड़की को भी अपनी झूठी कहानियां सुना कर पटा लेता है। मुंबई की चॉल में रहने वाले लोगों की इस कहानी को खरगोश और कछुए की दौड़ की प्रसिद्ध कहानी के साथ जोड़कर दिखाया गया है। जिसमें फारुख ने नए जमाने के खरगोश का किरदार निभाया है।
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बीवी हो तो ऐसी (1988) - फोटो : सोशल मीडिया
किरदार : सूरज भंडारी 
फिल्म : बीवी हो तो ऐसी (1988)

सास-बहू के तकरार वाली इस पारिवारिक ड्रामा फिल्म में फारुख ने एक पति और बेटे का किरदार निभाया है। सास (बिंदु) और बहु (रेखा) के झगड़े में सूरज (फारुख शेख) पिसता हुआ नजर आता है। सास घर में बहु आने के बाद भी अपनी बादशाहत कायम रखना चाहती है, जबकि बहु अपने ऊपर किसी को राज नहीं करने देना चाहती। इन दोनों के बीच में फारुख ने बहुत ही संजीदा अभिनय किया है। दर्शकों और समीक्षकों ने उनको खूब पसंद किया।
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