रानी मुखर्जी
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आपने इस फ़िल्म के लिए तैराकी भी सीखी?
जी हां, इस फ़िल्म में एक पानी के अंदर का दृश्य है। दरअसल जब इस फ़िल्म के निर्देशक गोपी पुथरन पटकथा लेकर जब मेरे पास आए तब मैंने कहानी सुनने के बाद कहा कि गोपी, कहानी तो बहुत अच्छी है तो, जाहिर है कि मैं करना चाहूंगी लेकिन, एक दिक्कत है। यह जो पानी के नीचे का फाइट सीन है, वह आपने क्या सोचकर लिखा? तो गोपी बोलते हैं कि ये सीन मेरे लिए बहुत ज़रूरी है। मैं चाहता हूं कि ये फिल्माया जाए। तो मैंने कहा ठीक है। हम पहले फ़िल्म पर काम करते हैं। इसके बाद यह बहुत ही ज़रूरी सीन है तो हम इसपर भी काम करेंगे। हमने अपनी फिल्म की शूटिंग जून में खत्म की। फिर मुंबई में बारिश शुरू हो गई। तब जाकर हमने अक्टूबर में इस सीन को पूरा किया। इसी दौरान मैंने अंडर वाटर ट्रेनिंग सेंटर पर तैराकी के गुर सीखे। अब मुझे पानी से डर नहीं लगता।
यह सीन कहानी से निकालने की आपने कोशिश भी की थी?
हां, मैंने गोपी को समझाने की बहुत कोशिश की। गोपी ने कहा कि आप पूरी कहानी छोड़कर सिर्फ एक सीन के पीछे क्यों पड़ गई हो? तब मैंने बताया कि इसमें बहुत बड़ी समस्या है। मुझे तैराकी नहीं आती।
क्या आपको तैराकी में बचपन से ही दिक्कत थी?
मेरी मां ने एक कहानी मेरे जेहन में बचपन से ही डाल रखी है। मैं एक बार तैराकी सीख रही थी तभी मैं अचानक डूबने लगी। यह देखकर मेरी मां को बेचैनी का दौरा सा पड़ा। तबसे उन्होंने मुझे कभी तैराकी नहीं सीखने दी। अब मुझे भी पानी से डर लगता है। वैसे मैं पानी में रह सकती हूं, बशर्ते पैरों के नीचे ज़मीन हो। मेरी लंबाई भी कम है तो पानी एक हद तक हो तो ही बेहतर है।