मुकेश खन्ना
- फोटो : अमर उजाला, मुंबई
महाभारत में आप लोगों ने काम किया उसकी यादगार के लिए क्या है, अगर कोई देखना चाहे कि इसकी शूटिंग कैसे हुई इसकी तैयारी कैसी हुई। जब हम कोई काम करते हैं तो आगे वाली पीढ़ी के लिए बचा कर क्यों नहीं रखते, या है तो कहां है?
मैंने तो शरशय्या (बाणों की शय्या) संभाल के रखी हुई है, इसके पीछे भी एक दिलचस्प कहानी है। जब उस सीन की शूटिंग खत्म हो गई तो मैंने चोपड़ा साहब से कहा, अब यह आपके काम की चीज तो है नहीं, इस पर मैं रोज तीन-तीन घंटे लेटा हूं यह मैं ले लूं, चोपड़ा साहब ने कहा ले लो यह तुम्हारी ही तो है। उसको मैंने वहां से उठाया और 25 साल तक अपनी फैक्ट्री में रखा रहा और फैक्टरी में रखने के बाद अब यहां अपने ऑफिस में रखा है। आप सही कह रहे हैं, इस तरह की बहुत सारी चीजें थी जो रखनी चाहिए थी। आप भीष्म की तलवार रख देते या कृष्ण का रथ या फिर दुर्योधन का गदा । ऐसी बहुत सारी चीजें संभाल कर रखी जा सकती थीं। मुझे लगता है कि इस तरह से किसी ने सोचा नहीं। यह सब उन लोगों के लिए ऐसी प्रॉपर्टी थी कि शूट हुआ और फेंक दिया।
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