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Mukesh Khanna Exclusive: मैंने संभालकर रखी महाभारत की ये निशानी, कर्ण या अर्जुन का किरदार निभाने की थी तमन्ना

Sat, 05 Nov 2022 05:36 PM IST
वीरेंद्र मिश्र एंटरटेनमेंट डेस्क, अमर उजाला
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मुकेश खन्ना - फोटो : अमर उजाला, मुंबई
बलदेव राज चोपड़ा यानी बी आर चोपड़ा के हिंदी मनोरंजन जगत में किए गए योगदान को कभी भुलाया नहीं जा सकता। अपने भाई यश चोपड़ा को उन्होंने ही फिल्मों में मौका दिया जिन्होंने आगे चलकर यश राज फिल्म्स की स्थापना की और हिंदी सिनेमा की सबसे बड़ी हिट फिल्मों में शामिल रहीं फिल्में बनाईं। बी आर चोपड़ा के बेटे रवि चोपड़ा और उनके पोतों अभय और कपिल चोपड़ा ने भी बी आर फिल्म्स की विरासत संभालने की भरपूर कोशिशें कीं। बी आर चोपड़ा की बरसी पर ‘अमर उजाला’ ने उनके कालजयी धारावाहिक ‘महाभारत’ में भीष्म का किरदार निभाने वाले अभिनेता मुकेश खन्ना से ये एक्सक्लूसिव मुलाकात की।

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मुकेश खन्ना - फोटो : अमर उजाला, मुंबई
बी आर चोपड़ा ने जो 'महाभारत' बनाई उसके बाद कोई और एक सफल 'महाभारत' सीरीज क्यों नहीं बना पाया, कोशिशें तो कई लोगों ने की?
देखिए, अगर इस मामले में सबसे पहले नाम गिनाने जाऊं तो सबसे पहला एकता कपूर का आता है। उसने 'महाभारत' बनाकर चैनल की भी बर्बादी कर दी। अगर आप द्रौपदी को टैटू लगा देंगे तो यही एक चीज आपको इस बात का जवाब दे देता है कि बाकी 'महाभारत' भी जो बने वे क्यों नहीं चले? आप ऐसी हरकतें करेंगे जो हमारी आस्था के खिलाफ हैं तो उन्हें कौन पसंद करेगा। आप आस्था का फायदा भी उठाना चाहते हो और आस्था को चैलेंज भी करते हो।  'आदिपुरुष' में चमड़े का वस्त्र पहनकर कहते हो कि हमारा रावण ऐसा होगा। हद तो तब हो गई जब मूर्खता में ऐसा बोल दिया कि रामानंद सागर की कल्पना में जो था वह उन्होंने दिखाया, 2022 में हमारी जो कल्पना है, हम दिखा रहे हैं। जिन्होंने हमारी पहली वाली 'महाभारत' देखी है उन्हें आप कुछ भी दिखाएंगे तो वह स्वीकार नहीं करेंगे।

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बीआर चोपड़ा - फोटो : अमर उजाला, मुंबई
बी आर चोपड़ा इतने बड़े  फिल्मकार  रहे हैं 'महाभारत' के अलावा भी उन्होंने बहुत सारी एक से बढ़कर एक हिट फिल्में बनाई हैं , उनकी विरासत आगे क्यों नहीं संभल पा रही है। आपको कहां लगता है कि गड़बड़ी हुई है?
मुझे बहुत दुख हुआ कि बी आर चोपड़ा का इतना बड़ा साम्राज्य लोग संभाल नहीं पा रहे हैं। अगर जिंदगी में किसी के ऑफिस में जाकर बैठा तो वह बी आर चोपड़ा साहब के ऑफिस में ही जाकर बैठता था। मैं वहां अक्सर चार बजे पहुंच जाया करता था और बी आर चोपड़ा साहब कहते थे कि मुकेश आ गया चाय पिलाओ। मुझे चार  बजे चाय पीने की आदत वहीं पर पड़ी। मेरी वहां कास्टिंग हो गई थी इसलिए मैं वहां आया जाया करता था। इसके अलावा चाहे कितना भी बड़ा, किसी का भी प्रोडक्शन हाउस हो मैं नहीं जाता था। वहां  मैंने देखा काम के प्रति सभी लोग समर्पित थे। चोपड़ा साहब सभी के साथ बड़ी इज्जत के साथ बात करते थे। रवि चोपड़ा साहब भी बहुत ही सुलझे हुए इंसान थे। बी आर चोपड़ा साहब और रवि चोपड़ा के जाने के बाद उनके परिवार के लोगों ने कुछ फिल्में बनाई तो लगता है उसमें इन को काफी नुकसान हुआ और करोड़ों का कर्ज आ गया जो नहीं आना चाहिए था। जहां तक मुझे पता है चोपड़ा साहब का यह सिस्टम था कि वे अपने पैसों से फिल्म कभी नहीं बनाते थे। उनको पैसे लगाने वाले लोग मिल जाते थे। बी आर चोपड़ा और रवि चोपड़ा में जो विजन था वह विजन उनके बच्चों में नहीं है।

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मुकेश खन्ना - फोटो : अमर उजाला, मुंबई
महाभारत में आप लोगों ने काम किया उसकी यादगार के लिए क्या है, अगर कोई देखना चाहे कि इसकी शूटिंग कैसे हुई इसकी तैयारी कैसी हुई। जब हम कोई काम करते हैं तो आगे वाली पीढ़ी के लिए बचा कर क्यों नहीं रखते, या है तो कहां है?
मैंने तो शरशय्या (बाणों की शय्या) संभाल के रखी हुई है, इसके पीछे भी एक दिलचस्प कहानी है। जब उस सीन की शूटिंग खत्म हो गई तो मैंने चोपड़ा साहब से कहा, अब यह आपके काम की चीज तो है नहीं, इस पर मैं रोज तीन-तीन घंटे लेटा हूं यह मैं ले लूं, चोपड़ा साहब ने कहा ले लो यह तुम्हारी ही तो है। उसको मैंने वहां से उठाया और 25 साल तक अपनी फैक्ट्री में रखा रहा और फैक्टरी में रखने के बाद अब यहां अपने ऑफिस में रखा है। आप सही कह रहे हैं, इस तरह की बहुत सारी चीजें थी जो रखनी चाहिए थी। आप भीष्म की तलवार रख देते या कृष्ण का रथ या फिर दुर्योधन का गदा । ऐसी बहुत सारी चीजें संभाल कर रखी जा सकती थीं। मुझे लगता है कि इस तरह से किसी ने सोचा नहीं। यह सब उन लोगों के लिए ऐसी प्रॉपर्टी थी कि शूट हुआ और फेंक दिया।

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मुकेश खन्ना - फोटो : सोशल मीडिया
जब आपकी बी आर चोपड़ा साहब से पहली बार मुलाकात हुई होगी तो किरदार को लेकर उनका क्या ब्रीफ रहा होगा। भीष्म के किरदार या किसी और किरदार के लिए ?
भीष्म पितामह के किरदार के बारे में मुझे किसी ने कोई भी ब्रीफ नहीं दिया, क्योंकि बी आर चोपड़ा ने पहले भीष्म पितामह के किरदार के लिए मुझे सोचा ही नहीं था। उन्होंने पहले मुझे दुर्योधन का किरदार ऑफर किया था लेकिन मैंने मना कर दिया, क्योंकि मैं विलेन का किरदार नहीं निभाता। मैं अर्जुन या कर्ण का किरदार निभाना चाह रहा था। उस समय मैं 15 फिल्में  हीरो के रूप में कर चुका था। किसी भी फिल्म में सेकंड लीड  काम नहीं किया था। बी आर कैंप में मुझे गूफी पेंटल लेकर गए। उससे पहले गूफी पेंटल ने अमिताभ बच्चन के के लिए मेरी  आवाज डब कराई थी। मैंने मना किया लेकिन गूफी पेंटल बोले किसी को पता नहीं चलेगा, लेकिन वो बात फैल गई और लोगों ने कहना शुरू कर दिया कि अमिताभ की बीमारी में उनकी सभी रुकी फिल्मों की डबिंग मैंने की है।

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मुकेश खन्ना - फोटो : अमर उजाला, मुंबई
उस समय आप  हिंदी सिनेमा में आप बहुत तेजी से उभर रहे थे और लोगों को लगता था कि आप अगले अमिताभ बच्चन हो सकते हैं। उस समय भीष्म बनना आपके लिए बहुत बड़ी बात रही होगी?
उस समय मेरी लगातार पांच फिल्में नहीं चली तो लोगों ने कहना शुरू कर दिया कि मैं अमिताभ बच्चन की नकल करता हूं इसलिए मेरी फिल्में नहीं चल रही हैं। जैसे लोग मिथुन चक्रवर्ती को गरीबों का अमिताभ बच्चन करते थे, वैसे ही लोगों ने मुझे भी कहना शुरू कर दिया जो मुझे कतई पसंद नहीं था। भीष्म पितामह का किरदार मुझे इसलिए मिला क्योंकि वह मेरे भाग्य में लिखा था। मुझे द्रोणाचार्य के किरदार के लिए फाइनल किया गया था। अगर उस किरदार को करता तो उसे भी अपने स्तर से निभाता। भीष्म के किरदार के बारे में पहले मुझे उतना ही पता था कि उन्होंने भीष्म प्रतिज्ञा ली थी और बाणों की शैय्या पर लेट गए। लेकिन, डॉक्टर राजी मासूम रजा ने भीष्म के किरदार को इस धारावाहिक का मुख्य स्तंभ बना दिया। शांतनु से लेकर अभिमन्यु तक भीष्म के नजरिये से 'महाभारत' की कहानी लिखी गई। आज भी जब मैं किसी कार्यक्रम में जाता हूं तो लोग कहते हैं कि बड़ों के पितामह और छोटो के शक्तिमान आ गए। मैंने दोनों किरदार को अभी तक मेंटेन करके रखा हुआ है।

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