अभिनेता अरशद वारसी हिंदी सिनेमा के ऐसे कलाकार हैं जिन्होंने कई विविधतापूर्ण किरदार करके अपना नाम बनाया है। हालांकि, सबसे ज्यादा शोहरत उन्हें ‘मुन्नाभाई’ सीरीज की फिल्मों में सर्किट के किरदार ने दिलाई।
अभिनेता अरशद वारसी हिंदी सिनेमा के ऐसे कलाकार हैं जिन्होंने कई विविधतापूर्ण किरदार करके अपना नाम बनाया है। हालांकि, सबसे ज्यादा शोहरत उन्हें ‘मुन्नाभाई’ सीरीज की फिल्मों में सर्किट के किरदार ने दिलाई। न्यू मिलेनियल्स में कम लोगों को ही पता होगा कि अरशद वारसी को बड़े परदे पर अमिताभ बच्चन की कंपनी एबीसीएल ने लॉन्च किया था और यह भी कि अरशद वारसी को अब तक एक ही बार अमिताभ बच्चन के साथ कैमरे के सामने आने का मौका मिला, और वह फिल्म भी कभी रिलीज नहीं हो पाई। इन दिनों वेब सीरीज ‘असुर 2’ को लेकर सुर्खियों में बने अरशद से ‘अमर उजाला’ की एक खास बातचीत।
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अरशद वारसी
- फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई
आपकी पहली फिल्म 'तेरे मेरे सपने' से लेकर अब तक की अभिनय यात्रा के बारे में आप कितने संतुष्ट हैं?
बहुत बढ़िया यात्रा रही है। उतार -चढ़ाव तो आते ही रहते हैं। मेरा मानना है कि अगर जिंदगी में उतार-चढ़ाव न हो तो जिंदगी बड़ी नीरस और बेरंग हो जाती है। बच्चों को मैं हमेशा समझाता रहता हूं कि तुम्हें सब बैठे बिठाए मिल गया लेकिन जिंदगी जीने का असली आनंद संघर्ष से मिली सफलता में ही है। मुझे लगता है कि मैं एक ही ऐसा अभिनेता हूं जिसने चार साल तक काम नहीं किया और फिर भी वापसी करने में सफल रहा।
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- फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई
'मुन्ना भाई एमबीबीएस' आपकी अभिनय यात्रा का अहम मोड़ साबित हुई, ये फिल्म कैसे मिली?
'तेरे मेरे सपने' के निर्देशक जॉय ऑगस्टीन मूलत: फिल्म संपादक रहे हैं। उनकी और राज कुमार हिरानी की अच्छी दोस्ती है। 'तेरे मेरे सपने' की एडिटिंग के दौरान राज कुमार हिरानी वहां आया करते थे। राजकुमार हिरानी उन दिनों मेरी खूब तारीफ किया करते थे। जब उन्होंने ‘मुन्ना भाई एमबीबीएस' शुरू की तो उनका बुलावा आया और मैंने भी ये सोचकर ये फिल्म की थी कि शायद इस प्रस्ताव में भी कुछ अच्छा छुपा हो। और वही हुआ। बहुत ही अच्छा हो गया।
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अरशद वारसी
- फोटो : सोशल मीडिया
'मुन्ना भाई एमबीबीएस' और 'लगे रहो मुन्ना भाई' के बाद 'मुन्ना भाई एमबीबीएस 3' की चर्चाएं तो खूब होती हैं, लेकिन इस पर ठोस कुछ भी पता नहीं चलता?
मैं हमेशा यही कहता रहा हूं कि इस फिल्म के लिए निर्माता तैयार हैं, कलाकार तैयार हैं, निर्देशक भी तैयार हैं। मतलब समस्या कुछ और है। जहां तक मेरा विचार है राजकुमार हिरानी इसकी पटकथा पर अटके हुए हैं। जिस दिन राजकुमार हिरानी को पटकथा सौ फीसदी पसंद आएगी, उस दिन फिल्म बननी शुरू हो जाएगी।
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और, एक फिल्म आपकी ‘वैसा भी होता है’ भी उन्हीं दिनों रिलीज हुई थी और इस फिल्म से सबसे ज्यादा फायदा कैलाश खेर को हुआ…
बिल्कुल, उस फिल्म से तो कैलाश खेर निकल पड़े। कैलाश खेर बहुत ही प्रतिभाशाली हैं। 'अल्लाह के बंदे' से पहले भी जब उनको सुनता था, तो मुझे लगता था कि उस इंसान का क्या गला है, उनकी आवाज में एक अलग ही जुनून है। कैलाश अक्सर मेरे घर आया करते थे और हम सब मिलकर खाना खाते थे और कैलाश गाना सुनाया करते थे। बहुत ही मजा आता था। तभी मुझे लगा था कि वह एक दिन बहुत आगे तक जाएंगे।
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क्या सर्किट के किरदार में देखकर ही प्रियदर्शन ने आपको फिल्म 'हलचल' के लिए चुना?
मैं अगर सच में बताऊं तो मुझे 'हलचल' में काम करके बिलकुल भी मजा नहीं आया। यह बड़ा अजीब इत्तेफाक है। एक्टिंग करना तो मेरा पेशा है। वह तो मुझे करना ही है। लेकिन व्यक्तिगत तौर पर मैं उस फिल्म से खुश नहीं था। मैं बस अपना काम करके निकल गया। जिंदगी में कभी कुछ अच्छी चीजें नहीं होती हैं।
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और, रोहित शेट्टी पर तो लगता है आपने जादू ही कर दिया कि 'गोलमाल' से जुड़े तो उनकी फिल्मों के स्थायी कलाकार बन गए?
मैंने कोई जादू नहीं किया, रोहित खुद ही एक जादूगर हैं। मैं अभी गोवा में हूं, कहीं बैठे हुए थे और मेरा बेटा, बेटी और बेटी की सहेली बैठकर 'गोलमाल' देख रहे थे। मैंने भी फिल्म अब तक देखी नहीं थी, डबिंग के समय जो देख लिया वही देखा था। प्रीमियर में भी लोगों को हाय हैलो करने में समय निकल जाता है। इस तरह से हम अपनी फिल्में देख नहीं पाते हैं। उस दिन मैं भी बच्चों के साथ बैठकर फिल्म देखने लगा। खूब दिल खोलकर हंसा, मैं यही बात हमेशा कहता हूं कि रोहित की क्वालिटी यही है कि वह साधारण चुटकुले को भी बिल्कुल अलहदा अंदाज में पेश कर देते हैं।
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थोड़ा पीछे जाकर अमिताभ बच्चन के साथ की बात करते हैं, उनके साथ आपकी फिल्म 'जमानत' रिलीज नहीं हो पाई, फिर उनके साथ कभी काम करने का संयोग क्यों नहीं बना?
बच्चन साहब मुझे 'तेरे मेरे सपने' में लांच करने वाले मेरे सबसे पसंदीदा अभिनेता हैं। सही बै कि हमने साथ में एक फिल्म की जो रिलीज नहीं हो पाई। फिल्म क्यों नहीं रिलीज हो पाई, इसके बारे में मुझे कुछ खास पता नहीं है। इस फिल्म के बाद फिर कभी बच्चन साहब के साथ काम नहीं कर पाया जबकि मेरे साथ के इंडस्ट्री के सभी लोग उनके साथ काम कर चुके हैं। मेरा तो उनके साथ काम करने का पहला हक बनता है क्योंकि उन्होंने ही फिल्मों में मुझे लांच किया था।
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'जॉली एलएलबी' की बात करते हैं। शुरुआत आप से हुई और इसका सीक्वल अक्षय कुमार के पास चला गया। इसी तरह से बिग बॉस की भी शुरुआत आप से हुई और बाद में बिग बॉस सलमान खान के पास चला गया?
अभी जो 'जॉली एलएलबी 3' आ रही है, उसमे मैं और अक्षय कुमार दोनों हैं। ये योजना पहले से थी कि ‘जॉली एलएलबी’ मैं करूंगा और दूसरा पार्ट अक्षय कुमार करेंगे। जहां तक बिग बॉस की बात है, तो उन दिनों मैं लंदन शूटिंग के लिए चला गया था तो अगला सीजन कर नहीं पाया। लेकिन, मेरे हिसाब से सलमान खान से बेहतर बिग बॉस को कोई होस्ट नहीं कर सकता। बिग बॉस को होस्ट करने के लिए सलमान खान जैसा ही दबंग चाहिए।
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और, सतीश कौशिक की फिल्म 'रूप की रानी चोरों का राजा' में आप सहायक निर्देशक भी रह चुके हैं, उस फिल्म से कैसे जुड़ना हुआ?
निर्देशक पंकज पराशर और सतीश कौशिक जी अच्छे दोस्त थे। मैं उन दोनों विज्ञापन फिल्मों में निर्देशन करता था। नाटक भी किया करता था। 'रूप की रानी चोरों का राजा' के टाइटल सांग के लिए पंकज पराशर चाहते थे कि वह गाना मैं कोरियोग्राफ करूं। वह चाहते थे कि वह गाना थोड़ा अलग हो। बस वह गाना ही किया था फिल्म में। बाकी सतीश कौशिक जी के साथ काम करने के बहुत मजेदार अनुभव रहे हैं।
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महेश भट्ट के साथ आपने सहायक निर्देशक के तौर पर फिल्म ‘काश’ में काम किया, लेकिन उनके निर्देशन में काम नहीं किया, इसकी कोई खास वजह?
जिन दिनों मैं महेश भट्ट साहब के साथ उनकी फिल्म 'काश' में सहायक निर्देशक था तभी उड़ती उड़ती खबर आई थी कि भट्ट साहब मुझे लेकर फिल्म शुरू करना चाहते हैं। लेकिन, तब मैंने एक्टिंग में दिलचस्पी ही नहीं दिखाई और फिल्म में काम करने से मना कर दिया। उस समय मेरी दिलचस्पी फिल्म निर्देशन में थी। आज भी मेरी सबसे ज्यादा दिलचस्पी निर्देशन में ही है।
अपनी आने वाली फिल्मों 'भागवत' और 'बंदा सिंह' के बारे में कुछ बताना चाहेंगे?
'भागवत' एक बहुत बढ़िया कहानी है। एक सीरियल किलर की सच्ची घटना पर आधारित ये फिल्म उसे गिरफ्तार करने के इर्द-गिर्द घूमती है। 'बंदा सिंह' भी एक सच्ची घटना पर आधारित फिल्म है। फिल्म पूरी हो चुकी है। इन दिनों मेरे पास बहुत सारी मजेदार कहानियों के प्रस्ताव आ आ रहे हैं और इनमें भी अधिकतर पुलिस अफसर के ही रोल हैं।