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Sachin Pathak Interview: नग्नता का सहारा वे लेते हैं, जिनके पास कहने को कुछ नहीं होता, सचिन पाठक की खरी बात

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Director Sachin Pathak - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई
हिंदी मनोरंजन जगत ने बीते तीन साल में बहुत उतार चढ़ाव देखे हैं। एक तरफ शाहरुख खान की एक्शन फिल्म ‘पठान’ सबसे ज्यादा कमाई करने वाली हिंदी फिल्म बन चुकी है तो दूसरी तरफ ऐसी भी फिल्में हैं जिनके खरीदार नहीं मिल रहे और वे सिनेमाघर खुल जाने के बाद भी ओटीटी पर रिलीज की कतार में लगी हुई हैं। निर्देशक सचिन पाठक की मानें तो ये दौर संक्रमण का है। स्टॉक में रखी कहानियां अब खर्च हो चुकी हैं। नया करने पर ही हिंदी मनोरंजन जगत को नया रास्ता इससे बाहर आने का मिलेगा। वह ये भी मानते हैं कि सिनेमा देखने जब तक पूरा परिवार सिनेमाघर में नहीं आएगा, सिनेमा सफल नहीं होगा। और, इसीलिए वह अपनी वेब सीरीज तक में गालियों और नग्न दृश्यों से परहेज करते हैं।
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Director Sachin Pathak - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई
तीन साल में निर्देशित की छह सीरीज
वेब सीरीज ‘रंगबाज फिर से’ के निर्देशन से एकाएक लाइम लाइट में आए निर्देशक सचिन पाठक तीन साल में छह वेब सीरीज निर्देशित कर चुके हैं। वह कहते हैं, ‘सिनेमा के मेरे पहले सबक मैंने निर्देशक निशिकांत कामत की सोहबत में सीखे। उनसे मेरी मुलाकात नाटकों के जरिये हुई। रुइया कॉलेज में पढ़ते हुए मैं अंतर कॉलेज प्रतियोगिताओं में हिस्सा लेता था और निशिकांत कामत से मेरी मुलाकात हुई नाटक ‘भाई सांगे अन्नारा’ के दौरान। फिर जी मराठी के सीरियल ‘यूनिट 9’ में मैं सहायक निर्देशक बना। उसके बाद उनकी सारी फिल्मों में मैं उनके साथ ही था।’
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Director Sachin Pathak - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई
रंग लाई अजय राय से दोस्ती
निशिकांत कामत का कोरोना काल के दौरान आकस्मिक निधन सिनेमा की बड़ी क्षति रहा है। सचिन को भी इस सदमे से उबरने में काफी समय लगा। निशिकांत की फिल्मों के कार्यकारी निर्माता रहे अजय राय से सचिन पाठक के रिश्ते तब से रहे जब उन्होंने अपनी पहली फिल्म बतौर लाइन प्रोड्यूसर ‘डोबिंविली फास्ट’ साल 2005 में की थी। दोनों ने मिलकर बतौर निर्माता और निर्देशक पहली वेब सीरीज ‘रंगबाज फिर से’ बनाई। सचिन कहते हैं, ‘हम दोनों का मिलना नई तरह की कहानियों वाली वेब सीरीज को एक ठोस जमीन देने में मददगार रहा। इसके बाद हमने ‘रंगबाज 3’ भी बनाई।’

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Director Sachin Pathak - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई
निशिकांत से सीखे सिनेमा के सबक
सचिन की ओटीटी जगत में इन दिनों खासी धाक जम चुकी है। ‘सिंपल मर्डर’ के अलावा ‘काठमांडू कनेक्शन सीजन 1’ और ‘काठमांडू कनेक्शन सीजन 2’ भी खूब चर्चा में रहे। और, इस दौरान बतौर निर्देशक सचिन का भी काम निखरता गया। सचिन के मुताबिक, ‘सिनेमा का असली ज्ञान सेट पर ही मिलता है। क्लासरूम में सिर्फ थ्योरी सीखी जा सकती है। मेरा मानना है कि सिनेमा के असली पाठ किसी निर्देशक के साथ रहकर ही सीखे जा सकते हैं। इस मामले में निशिकांत कामत मेरे उस्ताद रहे। वह अब हमारे बीच नहीं हैं लेकिन उनसे जो भी मैंने सीखा, उसका एहसान मेरे ऊपर ताउम्र रहेगा।’

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Director Sachin Pathak - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई
एक शुक्रवार सबका आना है...
दुनिया भर में इन दिनों थ्रिलर और एक्शन फिल्मों का जमाना चल रहा है। सबसे ज्यादा कारोबार करने वाली फिल्में भी इसी श्रेणी की हैं। सचिन खुद भी अपनी पहली फिल्म की कहानी इसी तरह की लिख रहे हैं। वह बताते हैं, ‘एक शुक्रवार तो सबका आना है, सर। मैं अपनी पहली फिल्म लिख रहा हूं अभी। थ्रिलर के अलावा कॉमेडी का भी विकल्प रखा है मैंने।। लेकिन मैं ये बात बार बार दोहराता रहा हूं कि सिनेमा सामूहिक मनोरंजन है और इसे देखने जब तक दोस्त यार ग्रुप बनाकर या परिवार वाले एक साथ मिलकर सिनेमाघरों तक नहीं आएंगे तब तक मजा नहीं आएगा। और इसके लिए हमारी कहानी ऐसी होनी चाहिए जिसे सब लोग साथ मिलकर देख सकें।’
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Director Sachin Pathak - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई
किरदार को बातों से बड़ा होना चाहिए
सचिन फिल्मों या सीरीज में गालियों और नग्नता को सही नहीं मानते। वह कहते हैं, ‘गाली देकर किरदार बड़ा नहीं होता। उसे अपनी बातों से बड़ा होना चाहिए। सिनेमा देखने वे लोग आते हैं जिनके लिए मनोरंजन का ये सबसे बड़ा माध्यम है। इसीलिए मैं नग्नता में भी भरोसा नहीं करता हूं। मुझे लगता है कि जिन लोगों के पास कहने को कुछ नहीं होता, कहानी में दम नहीं होता, वे लोग ही नग्नता का सहारा लेते हैं।’

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