ali abbas zafar
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ये तो सबको पता है कि दिल्ली के किरोड़ीमल कॉलेज में रंगमंच के प्रति आपका रुझान आपको मुंबई लेकर आया लेकिन उससे पहले देहरादून के स्कूली दिनों में सिनेमा से इश्क कैसे हुआ?
हमारे पिताजी कल्बे हैदर जैदी पहले सीमा सड़क संगठन (बीआरओ) में काम करते थे और बाद में ओएनजीसी के अफसर के रूप में सेवानिवृत्त हुए। माताजी के बारे में आपको पता ही कि वह सरकारी स्कूल में पढ़ाती थीं। घर पर पढ़ाई का माहौल था और नंबर भी मेरे अच्छे आते थे। तो घर में कोई टोकाटाकी थी नहीं और जैसे ही किशोरावस्था के जोश ने उफान मारा, मंसूर खान की फिल्म ‘जो जीता वही सिकंदर’ की तरह हमारा भी गैंग बना और इस गैंग का एक ही मकसद था, शहर में लगने वाली हर फिल्म का फर्स्ट डे फर्स्ट शो देखना। शाहरुख, आमिर, सलमान, सनी देओल, बॉबी देओल, बस इन्हीं के साथ दोपहरें गुजरती थीं।