फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

ड्रैगन लेडी के नाम से मशहूर थीं भारतीय सिनेमा की पहली स्टार देविका रानी, बोल्डनेस से मचाया था तहलका

Tue, 30 Mar 2021 11:29 AM IST
विजयाश्री गौर एंटरटेनमेंट डेस्क, अमर उजाला
विज्ञापन
1 of 7
देविका रानी
हिंदी सिनेमा में आज महिलाएं पुरुषों के साथ कदम से कदम मिलाते हुए आगे बढ़ रही हैं। आज सिनेमा के क्षेत्र में महिलाएं सिर्फ अभिनेत्री बनकर ही नही बल्कि निर्देशक, निर्माता, कैमरापर्सन, होस्ट जैसे कई काम सहजता से संभाल रही हैं। हालांकि पहले के समय में महिलाओं के लिए फिल्मों में आना आसान नहीं था। इस इंडस्ट्री में काम करने वाली महिलाओं को गलत समझा जाता था। उस दौर में देविका रानी ने अभिनेत्री बनकर लड़कियों के लिए इंडस्ट्री में रास्ते खोले थे। उन्हें भारतीय सिनेमा की पहली स्टार अभिनेत्री कहा जाता है।
विज्ञापन

2 of 7
देविका रानी
देविका रानी 9 साल की उम्र में ही पढ़ाई करने के लिए इंग्लैंड गईं थीं। वहां से उन्होंने रॉयल अकादमी ऑफ ड्रामेटिक आर्ट में एक्टिंग की पढ़ाई की थी। वो जर्मन सिनेमा से बहुत प्रभावित थीं और अभिनेत्री मार्लिन डीट्रिच को काफी फॉलो करती थीं। देविका रानी ने ही भारतीय सिनेमा को ग्लोबल स्टैंडर्ड पर ले जाने का काम किया था। उनके अभिनय की तुलना ग्रेटा गार्बो से की गई थी इसलिए उन्हें 'इंडियन गार्बो' भी कहा जाता था।
विज्ञापन

3 of 7
अभिनेत्री देविका रानी - फोटो : Self
देविका रानी स्वभाव से काफी गर्म मिजाज की थी इसलिए उन्हें 'ड्रैगन लेडी' भी कहते थे। आज जहां अभिनेत्रियों को अपनी पहचान सिद्ध करने के लिए ज्यादा से ज्यादा फिल्मों का हिस्सा बनना पड़ता है तो वहीं अपने 10 साल के करियर में देविका रानी ने महज 15 फिल्मों में काम किया था। 1936 में आई फिल्म 'अछूत कन्या' में देविका ने एक दलित लड़की का किरदार निभाया था। इस फिल्म के बाद उन्हें 'फर्स्ट लेडी ऑफ इंडियन स्क्रीन' की उपाधि दी गई थी।

4 of 7
साड़ी पहनी अभिनेत्री देविका रानी का डाक टिकट - फोटो : Amar Ujala
सरोजिनी नायडू और देविका में अच्छी दोस्ती थी। बताया जाता है कि उनके कहने पर ही पंडित जवाहरलाल नेहरू ने 'अछूत कन्या' फिल्म देखी थी। वो इस फिल्म से इतने प्रभावित हुए थे कि उन्होंने देविका के नाम फैन लेटर लिखा था और बाद में उन्हें पद्मश्री से सम्मानित भी किया गया था। लंदन के समाचार पत्र में भी उनकी खबरें छपा करती थीं जहां उनके अभिनय और खूबसूरती की तारीफ होती थी।
विज्ञापन

5 of 7
राज कपूर - फोटो : Social Media
दिलीप कुमार को इंडस्ट्री में लाने का श्रेय देविका रानी को ही दिया जाता है। दिलीप डॉक्टर मसानी के साथ बॉन्मे टॉकीज के स्टूडियो गए थे जहां देविका रानी ने उनसे पूछा था कि क्या वो एक्टर बनना चाहते हैं। इसके लिए आपको 1250 रुपये महीने की सैलरी मिलेगी। इसके बाद उन्होंने दिलीप कुमार को अशोक कुमार से मिलवाया और कहा कि इस लड़के को अभिनेता के रूप में भर्ती कर लो। उन दिनों राज कपूर महज 170 रुपये में काम कर रहे थे। जब दिलीप और राज कपूर की बात हुई तो दिलीप ने उन्हें अपनी सैलरी के बारे में बता दिया। इस पर राज कपूर देविका रानी के पास पहुंचे और बोले कि मेरे सैलरी दिलीप से कम क्यों है? इस पर देविका रानी ने कहा था कि, 'तुम दोनों ही नौसीखिए हो और नौसीखियों की कोई एक कीमत नहीं होती। बस ये बात राजकपूर को बुरी लग गई और उन्होंने वहां से काम छोड़ दिया'।
विज्ञापन

6 of 7
Devika Rani
देविका जब पढ़ाई करके इंग्लैंड से लौटीं तो उनकी मुलाकात निर्माता हिमांशु रॉय से हुई थी। हिमांशु देविका की खूबसूरती से इतना प्रभावित हुए कि साल 1933 में उन्होंने देविका को अपनी फिल्म 'कर्मा' में काम देने की पेशकश की, जिसे देविका ने स्वीकार कर लिया। इस फिल्म में देविका के हीरो हिमांशु राय ही बने। यह किसी भारतीय द्वारा बनी पहली अंग्रेजी बोलने वाली फिल्म थी। यही नहीं देविका रानी हिंदी सिनेमा में पहली किसिंग सीन देने वाली एक्ट्रेस बनीं जो 4 मिनट लंबा सीन था। इस सीन के बाद देविका की काफी आलोचना हुई और फिल्म को प्रतिबंधित भी कर दिया गया। बाद में हिमांशु ने देविका से शादी कर ली। देविका और हिमांशु रॉय ने साथ मिलकर बॉम्बे टॉकीज नाम का स्टूडियो बनाया था जिसके बैनर तले कई सुपरहिट फिल्में बनी थीं।
विज्ञापन
विज्ञापन

7 of 7
devika rani
1940 में निर्माता हिमांशु रॉय का निधन हो गया और देविका रानी ने 'बॉम्बे टॉकीज' का कार्यभार संभाला था। इस स्टूडियो से 'पुनर्मिलन' और 'किस्मत' जैसी सफल फिल्में बनीं। एक तरफ वो स्टूडियो का कार्यभार संभाल रहीं थी दूसरी तरफ उनके मन में अभिनय को लेकर जद्दोजहद चल रही थी। इसी बीच जब वो दिलीप कुमार अभिनीत पहली फिल्म 'ज्वार भाटा' के प्रोडक्शन पर काम कर रहीं थी तो उनकी मुलाकात स्वेतोस्लाव रॉरिक से हुई। देविका अपनी आखिरी फिल्म के डिजाइन के लिए स्वेतोस्लाव रॉरिक के स्टूडियो गईं। वहीं उनकी मुलाका दोस्ती और फिर प्यार में बदल गई। इस मुलाकात के एक साल बाद दोनों ने शादी कर ली और देविका ने बॉम्बे टॉकीज बंद कर दी। 9 मार्च 1994 में देविका रानी का निधन हो गया और वो हमेशा हमेशा के लिए इस दुनिया से चली गईं।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें