Madhubala
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डॉक्टर घर आकर उनके शरीर से खून निकालते थे। वह फेफड़ों की बीमारी से भी पीड़ित थीं। अपने आखिरी दिनों में वह हर समय खांसती रहती थीं। हर चार से पांच घंटे में उन्हें ऑक्सीजन देनी पड़ती थी नहीं तो उनकी सांस फूल जाती थी। वह नौ साल तक बिस्तर पर पड़ी रहीं। उनके शरीर में सिर्फ हड्डियां बची थीं। खुद को देखकर वह हमेशा रोती रहतीं और कहती, 'मुझे ज़िंदा रहना है, मुझे मरना नहीं है, डॉक्टर कब इलाज निकालेंगे।'