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रकुलप्रीत का सपना हुआ पूरा, इंटरव्यू में बताया- 'जिस हीरो के गाने पर खूब नाची, अब उसी की हीरोइन'

Mon, 13 May 2019 09:18 AM IST
shrilata biswas अक्षित त्यागी, अमर उजाला, मुंबई
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rakul preet singh - फोटो : file photo
10 साल में 25 फिल्में कर चुकीं 28 साल की रकुल प्रीत सिंह दिल्ली से हैं। तेलुगू सिनेमा की वह सुपरस्टार हैं। ज्यादा पॉकेटमनी के लालच में उन्होंने साउथ की पहली फिल्म की और फिर एक के बाद एक फिल्में ही करती गईं। अब हिंदी सिनेमा में भी वह कदम जमाने की कोशिश कर रही हैं। उनकी अगली हिंदी फिल्म दे दे प्यार दे इस शुक्रवार को रिलीज हो रही है। रकुल प्रीत से एक खास मुलाकात।
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de de pyaar de - फोटो : social media
अजय देवगन और तब्बू जैसे सीनियर कलाकारों के साथ काम करना कैसा रहा? इन दोनों कलाकारों को लेकर तो आपकी बचपन की भी कुछ यादें होंगी?
(मुस्कुराते हुए) मैंने अपनी ज़िंदगी में जो पहला गाना गाया वह अजय देवगन और तब्बू पर फिल्म विजयपथ में फिल्माया गया गाना ही था- 'रुक रुक रुक, अरे बाबा रुक', इसी गाने पर मैंने कई स्कूल परफॉर्मेंस भी दिए। अब फिल्म दे दे प्यार दे में इन दोनों के साथ मैं काम कर रही हूं। सबसे अच्छा तब लगा जब लोगों ने ट्रेलर और गानों में मुझे भी नोटिस किया क्योंकि इतने बड़े और सीनियर कलाकारों के बीच पहचान बनाना मुश्किल होता है। दोनों के साथ काम करने में काफी मजा आया। कभी लगा ही नहीं कि ये लोग इतने सीनियर हैं।
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De De Pyaar De - फोटो : social media
तो फिल्म साइन करते समय तो डर लगा होगा?
नहीं नहीं, ऐसा कुछ नहीं था। स्क्रिप्ट सुनते ही मैने हां कर दी। हालांकि, लव रंजन ने कहा कि एक दिन ले लो और आराम से सोच लो लेकिन मुझे समय जाया नहीं करना था। फिल्म की कहानी मुझे इतनी अच्छी लगी कि सुनते ही हां कर दिया। आज के समय से काफी मेल भी खाती है दे दे प्यार दे की कहानी। दोगुनी उम्र के साथी से प्यार करना भी प्यार ही है।

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rakul preet singh - फोटो : social media
आप एक ऐसा किरदार कर रही हैं जिसे अपने से दोगुनी उम्र के इंसान से प्यार हो जाता है। निजी जिंदगी में ऐसा कोई अनुभव होता तो कैसा महसूस करतीं?
जिस तरह की मेरी परवरिश हुई है तो सच कहूं तो मुझे कोई दिक्कत नहीं होती। अगर मेरे पिता मुझे 18 साल पहले छोड़ गए होते तो मेरी सोच अलग होती। मैं खुश होती यह देखकर कि वह किसी और के साथ खुश हैं। आजकल के समय में ऐसा काफी आम है कि माता-पिता अलग हो जाते हैं लेकिन तब भी अपने बच्चों की देखभाल करते हैं। वहीं यह उनका निर्णय है मेरा नहीं, अगर वह खुश हैं तो मैं भी खुश हूं। 
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rakul preet singh - फोटो : file photo
हिंदी सिनेमा में अक्सर आपकी तुलना तापसी पन्नू से होती है, क्या कहना है आपका इस बारे में?
वैसे तो मैंने पहली फिल्म 2009 में कर ली थी, लेकिन तब मैं इतना सीरियस नहीं था। साउथ में मैं अपनी असली शुरूआत 2013 से मानती हूं। यह वो वक्त था जब कॉलेज और फैशन कॉम्पीटिशन पूरा कर मैंने फिल्मों को ही अपना करियर बनाने का फैसला किया। इस हिसाब से वह मेरी सीनियर हैं। हालांकि उन्होंने उतनी तेलगु फिल्में नहीं की हैं जितनी मैंने की। वह हिन्दी सिनेमा में भी मुझसे पहले आईं। मैं और तापसी अच्छे दोस्त हैं, उनका काम देखकर मुझे काफी प्रेरणा मिलती है।
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Rakul Preet Singh - फोटो : file photo
आप दिल्ली की रहने वाली हैं, घर आपने हैदराबाद में खरीदा और संघर्ष आपका मुंबई में चल रहा है, प्लानिंग क्या है आपकी आगे की?
मेरी जो योजनाएं हैं उस हिसाब से तो मेरी जिंदगी चलेगी नहीं। मैं दिल्ली की हूं। मैंने कभी सोचा भी नहीं था कि मैं साउथ की फिल्मों में काम करूंगी। मुझे उनके बारे में पता तक नहीं था। मैंने घर वहां इसलिए खरीदा क्योंकि दो साल से लगातार होटल के एक कमरे में रह रही थी। प्राइवेसी नाम की चीज ही नहीं थी। मेरा एक घर मुंबई में भी है। पर सच कहूं तो मैं अब भी सूटकेस वाली जिंदगी बिता रही हूं। हर दिन शूट पर ही रहती हूं। अगर आप सेटल होने की तरफ इशारा कर रहे हैं तो मैं अब भी सेटल ही हूं। हां, अगर शादी किसी टिमबकटू के लड़के से हुई तो वहीं जाना होगा।
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Rakul Preet singh - फोटो : social media
साउथ के सिनेमा और मुंबई के सिनेमा में क्या अंतर नजर आता है ? 
मेरे हिसाब से आजकल सभी अच्छा कंटेंट बना रहे हैं तो उस स्तर पर कोई फर्क नहीं है। हां, साउथ में समय की पाबंदी ज्यादा है। वहां शूटिंग सुबह 9 से शाम के 6 बजे तक ही होती है, यहां मुंबई में 12 घंटे का काम होता है। 

सच बताइए, ज्यादा पॉकेटमनी के लालच में फिल्मों के लिए हां करने वाली दिल्ली की लड़की ने कभी सोचा था कि एक दिन इतनी कामयाबी भी मिल जाएगी?
अगर मैं यह कहूं कि नहीं सोचा था, तो यह झूठ होगा। ऐसा कभी होता नहीं है कि आप काम शुरू करो और ये सोचकर शुरू करो कि इसमें फेल हो जाएंगे। अच्छा सोचना जरूरी है। माना कि यह काम आसान नहीं है, लेकिन हर दिन यह बेहतर भी होता जाता है। हर दिन काम, हर दिन प्रयास करना जरूरी है।

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rakul preet singh - फोटो : file photo
आप कारोबारी महिला भी बन चुकी हैं, फिटनेस में निवेश करने का विचार कैसे आया?
एक महिला कलाकार की शेल्फ लाइफ बहुत कम होती है इसलिए साथ में कुछ और भी करना जरूरी है। फिटनेस का ध्यान रखना और वर्क आउट करना मेरा जुनून है। जिस जिम में मैं जाती थी वह ऑस्ट्रेलिया का एक बड़ा ब्रांड है। हैदराबाद में पहला ब्रांच खुला था उनका। मैंने उनका बिजनेस मॉडल देखा और मुझे वह पसंद आया। बस तभी मैंने उसमें निवेश का फैसला कर लिया। अब तक इसकी तमाम और शाखाएं भी खुल चुकी हैं। मैं ऐसा कोई कारोबार नहीं कर सकती जिसके लिए मेरे भीतर जुनून न हो। मेरा मन बस तीन एफ के इर्द गिर्द ही है, फिल्म्स, फिटनेस और फूड। आगे हो सका तो खाने के काराबोर में भी कुछ कर सकती हूं।
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rakul preet - फोटो : social media
दे दे प्यार दे के बाद आपकी अगली हिंदी फिल्म मरजांवा होगी, क्या किरदार है इसमें आपका? इसके अलावा साउथ की भी फिल्में कर रही होंगी?
मरजावां के निर्देशक मिलाप मिलन झावेरी दमदार राइटर हैं और डॉयलॉगबाजी में यकीन करते हैं। तो मरजावां में दर्शक मुझे खूब डॉयलॉगबाजी करते देखेंगे। दे दे प्यार दे के बाद मई में ही मेरी एक तमिल फिल्म रिलीज हो रही है, एनजीके। इसके अलावा एक और तमिल फिल्म एसके 14 की शूटिंग पूरी होने वाली है। एक तेलुगू फिल्म मनमधुडू भी कर रही हूं जिसकी शूटिंग इसी महीने के आखिर में शुरू हो रही है।
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