Dadasaheb Phalke
‘अंतर्राष्ट्रीय स्तर की बायोपिक बने’
भारतीय सिनेमा में इन दिनों बायोपिक का दौर चल रहा है लेकिन जिसने सिनेमा को जन्म दिया उनकी बायोपिक हिंदी में बनाने कोई आगे नहीं आ रहा। 2008 में सर्वश्रेष्ठ मराठी फिल्म का राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार जीतने वाली फिल्म ‘हरिश्चंद्राची फैक्टरी’ का जिक्र चलने पर पुसालकर कहते हैं कि ऐसी फिल्में और भी बननी चाहिए और सभी भारतीय भाषाओं में बननी चाहिए। ऐसी फिल्मों को देखकर ना जाने कितने और फाल्के देश में बन सकते हैं। वह कहते हैं, ‘लोग मेरे पास आते हैं दादा साहेब फाल्के की बायोपिक का विचार लेकर। लेकिन, उनकी पूरी योजना बस फिल्म के अधिकार हासिल करने पर केंद्रित रहती है। मैं कहता हूं कि पूरी तैयारी के साथ पूरी योजना बनाकर आओ। एक भव्य, विशाल, नयनाभिराम और अंतर्राष्ट्रीय फिल्म बनाओ जिसे पूरी दुनिया देखे और कहे कि देखो, ये वह शख्स है जिसने अपनी सारी जमा पूंजी जुटाकर भारत देश में सिनेमा की नींव रखी।’