Dadasaheb Phalke
दादा साहेब ने अपनी शिक्षा कला भवन, बड़ौदा में पूरी की थी। यहां से उन्होंने मूर्तिकला, इंजीनियरिंग, चित्रकला, पेंटिंग और फोटॉग्राफी की शिक्षा ली। पढ़ाई पूरी करने के बाद उन्होंने फोटोग्राफी को बतौर करियर चुना, लेकिन पत्नी और बच्चे की अनाचक हुई मौत के बाद उन्होंने इस पेशे से दूरी बना ली। कौन जानता था कि फोटोग्राफी छोड़ने का उनका यह फैसला उन्हें एक ऐसे रास्ते पर ले जाएगा, जो इतिहास में उन्हें हमेशा के लिए अमर कर देगा। हमेशा से ही कुछ नया करने की चाह रखने वाले दादा साहब के जीवन में फ्रेंच फिल्म 'द लाइफ ऑफ क्राइस्ट' एक नया मोड़ लेकर आई।