मिट्टी बचाओ अभियान के तहत बात करते सद्गुरु और संग्राम सिंह
- फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई
अखाड़े की मिट्टी को हम मां समझते हैं
संग्राम कहते हैं कि मुझे जब उनकी (सद्गुरु) टीम ने अप्रोच किया तो मैने तुरंत हामी भर दी और सद्गुरु को ये भी बताया कि ये अभियान बगैर अखाड़े में जाए पूरी नहीं होता, क्योंकि अखाड़े की मिट्टी को हम मां समझते हैं और अखाड़े की मिट्टी तो इतनी शुद्ध होती हैं कि हम सब उसी से बड़े होते हैं और हम उसमे तेल, हल्दी, घी डालते है। मैने सद्गुरु जी को भी अखाड़े की मिट्टी का महत्व समझाया, तो मुझे लगता है कि अखाड़े में आकर इस अभियान का असल मकसद पूरा हो गया"।