चरस पोस्टर
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फिल्म चरस प्रेम की उत्कंठाओं और आकांक्षाओं का तो चरम है ही, ये फिल्म किस्सागोई की उस एक अलग परिपाटी को भी पानी देती है, जिसकी शुरुआत रामानंद सागर की लिखी पहली फिल्म बरसात से होती है। और ये परिपाटी है सच्चे प्रेम के सामने आने वाला ये सवाल कि कहीं देर तो नहीं हो गई सच्चे प्रेमी को पहचानने में। फिल्म में सिनेमैटोग्राफी का काम रामानंद सागर के बेटे प्रेम सागर ने ही संभाला। प्रेम सागर ने ही अपने पिता रामानंद सागर पर पिछले साल एक किताब भी रिलीज की, एन एपिक लाइफ ऑफ रामानंद सागर फ्रॉम बरसात टू रामायण। आज के बाइस्कोप में इतना ही, कल यानी 25 मई को बात करेंगे एक और ओल्डी गोल्डी की..। सिलसिला जारी है।
(बाइस्कोप अमर उजाला डिजिटल का दैनिक कॉलम है जिसमें हम उस दिन रिलीज हुई किसी पुरानी फिल्म के बारे में चर्चा करते हैं।)