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बाइस्कोप: जब हेमा मालिनी को बंबई से माल्टा ले उड़े धर्मेंद्र और किया खुल्लम खुल्ला इश्क का इजहार

Sun, 24 May 2020 07:33 PM IST
अपूर्वा राय पंकज शुक्ल, मुंबई
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चरस पोस्टर - फोटो : सोशल मीडिया
सोचिए कि किसी की शादी होने जा रही हो। वर अपने माता पिता के साथ रस्मों की तैयारी कर रहा हो। वधू के हाथों में महेंदी रच चुकी हो। और, तभी कोई बंदा दारू पीकर साथ में एक और लड़की लेकर विवाह स्थल तक पहुंच जाए। ये किस्सा फिल्मों में तो बहुत देखा होगा आपने, लेकिन धर्मेंद्र ने जीतेंद्र की गर्लफ्रेंड शोभा के साथ मद्रास पहुंचकर ये असल जिंदगी में कर दिखाया था जीतेंद्र और हेमा मालिनी की शादी से ठीक पहले। जाहिर है कि शादी टूट गई। जीतेंद्र ने फिर उसी लड़की शोभा से शादी की जो एयरहोस्टेस थी और धर्मेंद्र के साथ बंबई से मद्रास पहुंची थी। तब शोभा उनकी गर्लफ्रेंड हुआ करती थीं।जीतेंद्र इस प्रेम कहानी में संजीव कुमार का पत्ता काटकर घुसे थे। धर्मेंद्र की नौटंकी के बाद संजीव कुमार और जीतेंद्र दोनों कहानी से एग्जिट हो गए तो फिर धर्मेंद्र और हेमा मालिनी ने अगले पांच साल तक जमकर इश्क किया और इस इश्क में बिना मेकअप के हेमा मालिनी के गाल गुलाबी होते देखने हों, तो आपको देखनी चाहिए निर्माता निर्देशक रामानंद सागर की फिल्म ‘चरस’ जो आज ही के दिन साल 1976 में रिलीज हुई और उस साल की ब्लॉक बस्टर फिल्म रही।
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आंखें - फोटो : सोशल मीडिया
जी हां, रामानंद सागर की चरस। वही रामानंद सागर जिन्होंने इस फिल्म के 10 साल बाद दूरदर्शन के लिए कालजयी धारावाहिक रामायण की शुरूआत की। और, वही रामानंद सागर जो अपनी फिल्म आंखें में धर्मेंद्र को हीरो के लिए साइन करने के बाद तक उनके करिश्मे को लेकर आश्वस्त नहीं थे। धर्मेंद्र और रामानंद सागर की फिल्म आंखें हिंदी सिनेमा में जासूसी फिल्मों की टेक्स्ट बुक मानी जाती है। जेम्स बॉन्ड स्टाइल में बनी आंखें में रामानंद सागर ने धर्मेंद्र को साइन तो कर लिया लेकिन उनको लगा कि कहीं ऐसा न हो कि हीरो फिल्म अपने कंधे पर खींच न पाए तो उन्होंने उस वक्त की बड़ी स्टार माला सिन्हा को इसमें लिया और सपोर्टिंग कास्ट में भी काफी बड़े बड़े नाम ले लिए। ये और बात है कि फिर इसके बाद जो हुआ उसका अंदाजा न रामानंद सागर को था और न ही धर्मेंद्र को। आंखें की शूटिंग शुरू होने से ठीक पहले धर्मेंद्र की फिल्म फूल और पत्थर ब्लॉकबस्टर फिल्म हो गई। फिल्म इतनी ज्यादा मशहूर हुई कि रामानंद सागर ने फिल्म का पूरा तानाबाना ही बदल दिया। फिल्म आंखें पर उन्होंने पानी की तरह पैसा बहाया और ये पैसा उनके पास रूपयों के समुद्र की तरह लौटा। रामानंद सागर को आंखे के लिए फिल्मफेयर का बेस्ट डायरेक्टर अवार्ड भी मिला।
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धर्मेंद्र और हेमा मालिनी - फोटो : इंस्टाग्राम
तो, लौटते हैं उस कहानी की तरफ जिसकी शुरूआत हमने मद्रास में हेमा मालिनी के घर पर की थी। उस रोज जब धर्मेंद्र बंबई में एक अखबार में जीतेंद्र और हेमा मालिनी की संभावित शादी की खबर पढ़कर मद्रास पहुंचे थे तो हेमा मालिनी के पिता ने उन्हें धक्के मारकर घर से निकालने की पूरी तैयारी कर ली थी। बड़ी मुश्किल से वह इस बात पर राजी हुए कि एक बार हेमा मालिनी अकेले में धर्मेंद्र से मिल लें और उसके बाद जो भी उनका फैसला होगा, धर्मेंद्र मान लेंगे। दोनों मिले और आंखों में आंसू भरे हेमा मालिनी जब कमरे से बाहर निकलीं तो उन्होंने बस इतना कहा कि जीतेंद्र से शादी क्या हफ्ते भर बाद नहीं हो सकती? उन्होंने हफ्ते भर का समय मांगा ये तय करने को कि वह किसके साथ ज्यादा खुश रहेंगी, जीतेंद्र के साथ या धर्मेंद्र के साथ। जीतेंद्र के घरवालों ने इसे अपनी बेइज्जती समझा और अपने बेटे को लेकर वहां से निकल गए। धर्मेंद्र के रास्ते के सारे कांटे दूर हुए तो वह सातवें आसमान पर थे।

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चरस पोस्टर - फोटो : सोशल मीडिया
जी हां, सिर्फ लिखने वाले सातवें आसमान नहीं, असली वाले सातवें आसमान। हेमा मालिनी को लेकर वह उड़े सीधे माल्टा के लिए। वही माल्टा जिसमें यशराज फिल्म्स ने अपनी पिछली फिल्म ठग्स ऑफ हिंदोस्तान की शूटिंग की है। इस शहर में इससे पहले सिर्फ रामानंद सागर की फिल्म चरस की शूटिंग हुई थी। धर्मेंद्र और हेमा मालिनी की पहली बार खुल्लमखुल्ला मोहब्बत माल्टा ने ही देखी। नहीं तो इससे पहले तक हर शूटिंग पर हेमा मालिनी की मम्मी जया चक्रवर्ती साये की तरह उनके साथ मौजूद रहती थीं। चरस की शूटिंग के लिए धर्मेंद्र और हेमा मालिनी होटल से साथ ही एक कार में निकलते और साथ ही एक ही कार में लौटते। बताते हैं कि इस फिल्म की शूटिंग के एक आउटडोर शेड्यूल पर हेमा के पिता वी एस रामानुजन चक्रवर्ती गए भी। फिर, उन्हें लगा कि मियां बीवी राज़ी तो क्या करेगा काज़ी।
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चरस पोस्टर - फोटो : सोशल मीडिया
चरस की कहानी युगांडा से शुरू होकर भारत होते हुए रोम और माल्टा तक जाती है। रामानंद सागर ने वेद राही के साथ मिलकर ये फिल्म लिखी। सूरज और उसकी बहन राधा को लेकर उसके पिता युगांडा से निकलने की कोशिश में होते हैं कि उनके घर को आग लगा दी जाती है। सूरज जिस युवती को घर से निकालकर लाता है, वह उसकी बहन के कपड़े तो पहने है लेकिन बहन है नहीं। सूरज भारत पहुंचता है तो पता चलता है कि उसकी पुश्तैनी जायदाद के रखवाले कालीचरण की नीयत डोल चुकी है। कालीचरण कोशिश भी करता है सूरज को मारने की लेकिन वह सुधा की मदद से बच जाता है। सुधा के बारे में सूरज को पता चलता है कि वह स्टेज पर काम तो करती है लेकिन उसके इरादे कुछ और हैं। देश विदेश के चक्कर लगाने के बाद सूरज आखिरकार कालीचरण तक पहुंच ही जाता है। वहां भी एक दो ट्विट्स्ट और आते हैं और कानून का फंदा कालीचरण के गले में कस ही जाता है।
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धर्मेंद्र और हेमा मालिनी - फोटो : इंस्टाग्राम

जैसे आंखें साइन करने के बाद फिल्म फूल और पत्थर के हिट होने से उस फिल्म के सारे समीकरण बदल गए, चरस में यही वाकया दोहराया गया अमजद खान के साथ। फिल्म चरस के मेन विलेन कालीचरण के रोल में तो अजीत हैं। लेकिन शोले हिट होने के बाद अमजद खान को अपना रोल इस फिल्म में कमजोर लगने लगा। हालांकि, सच यही था कि रामानंद सागर ने उन्हें फिल्म में आखिरी वक्त में लिया ही था गब्बर सिंह के किरदार की लोकप्रियता को कैश कराने के लिए। फिल्म में सुधा बनीं हेमा मालिनी के जीवन में सूरज का रोल कर रहे धर्मेंद्र का प्रेमी बनकर आना खूब रास आ रहा था। उस साल चरस के अलावा उनकी तीन और फिल्में सुपरहिट रहीं, मनोज कुमार के साथ दस नंबरी, शशि कपूर के साथ आपबीती और धर्मेंद्र के साथ ही फिल्म मां।

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हेमा मालिनी - फोटो : सोशल मीडिया
मां के निर्माता वही एम एम ए चिनप्पा देवर थे, जिन्होंने राजेश खन्ना को लेकर हाथी मेरे साथी बनाई थी। निर्देशक भी यहां हाथी मेरे साथी वाले एम ए थिरूमुगम ही थे। धर्मेंद्र उन दिनों हेमा मालिनी के प्यार में इतने पागल थे कि मां और चरस के अलावा इस साल उन्होंने कोई तीसरी फिल्म ही नहीं की। अरुणा ईरानी के लीड रोल वाली पंजाबी फिल्म संतो बंतो में जरूर उन्होंने एक गेस्ट अपीयरेंस किया। अरूणा ईरानी ने फिल्म चरस में भी धर्मेंद्र के साथ काम किया उनकी बहन का किरदार करके। एक रोचक बात यहां और नोट करने लायक है कि हेमा मालिनी की हिंदी फिल्मों में एंट्री राज कपूर की फिल्म सपनों का सौदागर से हुई और रामानंद सागर ने भी अपना फिल्मी करियर राज कपूर की फिल्म बरसात लिखकर ही शुरू किया।

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चरस पोस्टर - फोटो : सोशल मीडिया

चरस फिल्म धर्मेंद्र और हेमा मालिनी की एक साथ की गई 12 वीं फिल्म रही। 1970 में आई फिल्मों तुम हसीं मैं जवां और शराफत से चला ये सिलसिला टेल मी ओ खुदा तक 33 फिल्मों तक कायम रहा। धर्मेंद्र और हेमा मालिनी की 33 फिल्मों में जोड़ियां बनी और इनमें से 18 फिल्में सुपर हिट रहीं। फिल्म चरस में गीतकार आनंद बक्षी और संगीतकार लक्ष्मीकांत प्यारेलाल की जोड़ी भी खूब चमकी। फिल्म के गाने भर भरकर हिट हुए। आपको शायद यकीन न हो लेकिन आनंद बक्षी और लक्ष्मीकांत प्यारेलाल ने एक साथ 302 फिल्मों में काम किया है। किसी गीतकार और संगीतकार की जोड़ी का फिल्मों में साथ काम करने का ये एक अनोखा रिकॉर्ड है। राजा ना जा दिल तोड़ के और कल की हंसीं मुलाकात के लिए, आज रात के लिए जैसे फिल्म के गाने सुपरहिट रहे। फिल्म के एक गाने में आनंदबक्षी ने गाया भी है, ‘दिल इंसान का एक तराजू जो इंसाफ को तौले, अपनी जगह पर प्यार है कायम धरती अम्बर डोले। सबसे बड़ा सच एक जगत में भेद अनेक जो खोले, प्रेम बिना जीवन सूना ये पागल प्रेमी बोले...’ और फिर गाना शुरू होता है, के आजा तेरी याद आई...



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चरस पोस्टर - फोटो : सिनेमटीरियल डॉट कॉम

फिल्म चरस प्रेम की उत्कंठाओं और आकांक्षाओं का तो चरम है ही, ये फिल्म किस्सागोई की उस एक अलग परिपाटी को भी पानी देती है, जिसकी शुरुआत रामानंद सागर की लिखी पहली फिल्म बरसात से होती है। और ये परिपाटी है सच्चे प्रेम के सामने आने वाला ये सवाल कि कहीं देर तो नहीं हो गई सच्चे प्रेमी को पहचानने में। फिल्म में सिनेमैटोग्राफी का काम रामानंद सागर के बेटे प्रेम सागर ने ही संभाला। प्रेम सागर ने ही अपने पिता रामानंद सागर पर पिछले साल एक किताब भी रिलीज की, एन एपिक लाइफ ऑफ रामानंद सागर फ्रॉम बरसात टू रामायण। आज के बाइस्कोप में इतना ही, कल यानी 25 मई को बात करेंगे एक और ओल्डी गोल्डी की..। सिलसिला जारी है।



(बाइस्कोप अमर उजाला डिजिटल का दैनिक कॉलम है जिसमें हम उस दिन रिलीज हुई किसी पुरानी फिल्म के बारे में चर्चा करते हैं।)
 
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