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Apna Adda July 2024: ‘मिट्टी और पानी भी हमको नाप के मिलते हैं, तुम गमले में पलने को आसान समझते हो !’

Mon, 22 Jul 2024 09:07 PM IST
मोहम्मद फायक अंसारी अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई
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अपना अड्डा - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई
सेलेब्रिटी कास्टिंग डायरेक्टर मुकेश छाबड़ा का कहना है कि सोशल मीडिया पर समय बिताकर अभिनेता या अभिनेत्री बनने की चाह रखने वालों के लिए बड़े परदे पर कोई जगह नहीं है। अभिनेता को अपने हुनर को मांजने का प्रयास करना चाहिए। सोशल मीडिया की रील्स से कोई सच्चा फिल्म निर्देशक प्रभावित नहीं होता। मुंबई में सुबह से होती रही मूसलाधार बारिश भी कला के दीवानों के बीच बेहद लोकप्रिय हो चुके ‘अपना अड्डा’ की महफिल को इस बार सजने से न रोक सकी। दूर दूर से लोग वर्सोवा, अंधेरी के आराम नगर स्थित मुकेश छाबड़ा कास्टिंग कंपनी परिसर पहुंचे और न सिर्फ यहां होने वाली प्रस्तुतियों का भरपूर आनंद लिया बल्कि एक दूसरे के साथ अपने काम, अपने परिवार और अपने गांव-घर के सुख दुख भी बांटे।
 
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विशाल बाग - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई
‘अपना अड्डा’ की ये शाम कविता पाठ, स्टैंड अप कॉमेडी, एकल अभिनय, गीत और संगीत से सराबोर रही। पुणे से आए मशहूर शायर व गीतकार विशाल बाग ने इस मौके पर अपने चुनिंदा शेर सुनाए और अपनी पुस्तक ‘वीराने तक जाना है’ की कई रचनाएं प्रस्तुत कीं। मुंबई शहर के छोटे छोटे कमरों में रहने वालों की स्थिति बयां करते हुए विशाल ने पढ़ा, ‘मिट्टी और पानी भी हमको नाप के मिलते हैं, तुम गमले में पलने को आसान समझते हो!’ विशाल के इतना पढ़ते ही पूरी महफिल तालियों से गूंज उठी और उसके बाद तो उन्होंने अपने चिर परिचित अंदाज में एक के बाद एक कई रचनाएं पढ़ीं। और, जब उन्होंने पढ़ा, ‘तेरा इकरार मुझे सिर्फ तेरा कर देता, तेरे इन्कार ने तो मांग बढ़ाई मेरी’, तो लोग ‘वाह’ और ‘आह’ एक साथ कर उठे।
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अंकिता खत्री - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई
इससे पहले बनारस की रहने वाली गीतकार अंकिता खत्री ‘नादान’ ने अपनी कविता इश्क की चाय सुनाई और महफिल को ताजगी से भर दिया,

जिंदगी के चूल्हे पर

लम्हों की आग जलाएं

चलो, इश्क़ की चाय बनाएं।

मीठी बातों की शक्कर

ताज़ा ख्यालों की पत्ती

अरमानों का पानी खौलाएं,

चलो, इश्क़ की चाय बनाएं।

 

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अनुज परीक व मनु कृष्णा - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई
हाल ही में जयपुर से मुंबई शिफ्ट हुए रचनाकार अनुज परीक ने इश्क की इबादत पर कहा,

इश्क़ तेरा अजमत है

इबादतों की मसर्रतें है तू

खुदा तू खुद है मेरे लिए

कलमा, नमाज, अजान सब तू है मेरे लिए।


अभिनेता मनु कृष्णा ने भी पहली बार ‘अपना अड्डा’ मंच पर ही कविता पाठ किया। उन्होंने पढ़ा,

बागी हूं,
बागी पथ  पर ही चलना चाहूंगा,

ज्ञात मुझे लथ है पथ ये फिर भी जलना चाहूंगा,

बागी हूं, बागी पथ पर ही..

 
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आलोक पांडे - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई
कार्यक्रम का सबसे भावुक पल तब आया जब चर्चित अभिनेता आलोक पांडे ने अपनी पुस्तक ‘बिचौलिए शहर’ का एक अंश पढ़ा। ये पुस्तक आलोक ने अपने पिता की स्मृतियों को सहेजने के लिए लिखी है। आलोक ने पढ़ा, “जब मैं गांव से जाता था जैसे-जैसे ट्रेन गांव से दूर निकलती जाती थी, आप चुपके चुपके रोते थे आपने कभी सामने से नहीं दिखाया। पापा, सुनो ना पापा, भगवान से कुछ सेटिंग करके, एक उधर से वीडियो कॉल करवा लो ना प्लीज, पापा प्लीज। मुझे कभी-कभी बहुत गुस्सा आता है कि मैं आपको मुंबई पहले क्यों नहीं ले गया, आप हमेशा मजाक मजाक में बोलते थे, समंदर कब दिखाओगे और मैं हमेशा यह कह देता पापा बस जल्दी ही, अपना घर ले लूं। भले ही छोटा हो लेकिन इसकी बालकनी से समंदर दिखता हो और आपके हाथ में मेरे हाथों से बनाई हुई अदरक वाली स्ट्रांग चाय का बड़ा वाला गिलास हो, ना वो बालकनी आ पाई और ना आप। कहानी अधूरी रह गई पापा…।”
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दिलीप आनंद, नलनेश नील और अमरेंद्र शर्मा - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई
कार्यक्रम में उत्तर प्रदेश के शाहजहांपुर से आए अभिनय गुरु दिलीप आनंद की उपस्थिति ने लोगों मे और जोश भरा। उन्होंने भी अपनी एकल प्रस्तुति देकर ये दिखाया कि अभिनय कितने सहज रूप मे करना चाहिए और कैसे एक कलाकार को किरदार में पूरी तरह उतर जाना चाहिए। अभिनेता नलनीश नील ने इस मौके पर नौटंकी का एक जोरदार चौबोला गाकर सुनाया और उसके बाद अपनी हास्य कविता पर प्रस्तुति देकर लोगों का भरपूर मनोरंजन किया। ‘जोरम’ और ‘भैयाजी’ जैसी फिल्मों मे अपनी सशक्त भूमिकाओं से दर्शकों को प्रभावित करने में सफल रहे अभिनेता अमरेंद्र शर्मा ने कोरोना काल में गाया अपना गीत ‘बटोही’, ‘चल चल रे बटोही, चल रे आपन गांव सुनाया’ तो सब को अपना गांव फिर याद हो आया। यह पूरा गीत आप यहां सुन सकते हैं..

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विराग धूलिया व मृणाल - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई
अन्य कलाकारों में कुमार विक्रम, चेतन शर्मा और आकाश प्रताप सिंह ने भी अपनी कविताओं से श्रोताओं को भावुक कर दिया। लेखक विराग धूलिया ने इस खास मौके के लिए लिखी एक लघु कथा पर करीब पांच मिनट की मंचीय प्रस्तुति दी। इसका निर्देशन उन्होंने ही किया और इसमें विराग ने अभिनेता मृणाल वशिष्ठ के साथ अभिनय भी किया।

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मुकुल पुरी - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई
और, शाम जब अपने पूरे रंग में आई तो इसे अपनी संगीत लहरियों से सराबोर किया संगीतकार मुकुल पुरी ने। उन्होंने गीतकार हर्ष त्यागी का लिखा गीत ‘पानी’ गिटार बजाते हुए गाकर सुनाया तो लोगों ने तालियां बजाकर देर तक उनका उत्साहवर्धन किया। ये पूरा गाना आप यहां सुन सकते हैं..

 

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इंकलाब त्रिपाठी - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई
इस मौके पर अभिनेता इंकलाब त्रिपाठी ने एक अवधारणा आधारित प्रस्तुति दी, जिसे रंगमंच की भाषा में पेसोवा कहते हैं। पेसोवा का पुर्तगाली भाषा में अर्थ है, व्यक्ति या शख्स। अपनी इस प्रस्तुति के लिए उन्होंने पंछी के पिंजरे से लेकर संगीत, तिजोरी और कई अन्य भावनात्मक वस्तुओं का सहारा लिया। उनकी पूरी प्रस्तुति के दौरान लोग एकटक उन्हें देखते रहे और जैसे ही उनकी प्रस्तुति सम्पन्न हुई, सभी ने जोरदार तालियों के साथ उनका अभिनंदन किया।
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अपना अड्डा - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई
जुलाई महीने का ‘अपना अड्डा’ मुकेश छाबड़ा कास्टिंग कंपनी परिसर में बनी रंगशाला में दिन ढलने के करीब शुरू हुआ और अपने तय समय से कहीं देर तक ये महफिल आबाद रही। शुरुआत ‘अपना अड्डा’ के संस्थापक और ‘अमर उजाला’ के सलाहकार संपादक पंकज शुक्ल के स्वागत उद्बोधन से हुई जिसमें उन्होंने दोहराया कि ‘अपना अड्डा’ उन सभी कलाकारों का अपना अड्डा है जो अपना गांव, गली, कस्बा या शहर छोड़कर यहां मुंबई के मनोरंजन जगत में अपनी पहचान बनाने के लिए लगातार प्रयासरत हैं। ‘अमर उजाला’ समाचार पत्र में ऐसे उभरते कलाकारों पर लिखे गए आलेखों को हर गुरुवार प्रकाशित होने वाली सीरीज ‘अपना अड्डा’ में स्थान दिए जाने की जानकारी भी उन्होंने दी।
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