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Emergency: 'मौसम' में रोमांस के साथ तो 'इमरजेंसी' में बायोग्राफी के जरिए, फिल्मों में दिखा देश का काला इतिहास

Wed, 22 Jan 2025 01:59 PM IST
पूनम कंडारी एंटरटेनमेंट डेस्क, अमर उजाला

सार

फिल्में समाज का आइना हैं, जो कुछ भी हमारे आसपास घटता है, उसकी झलक फिल्म की कहानियों में नजर आती है। इसी तरह देश की कई स्याह घटनाओं के दर्द को भी बड़े पर्दे पर दिखाया गया है। जानिए, ऐसी कुछ अलग-अलग जॉनर की फिल्मों के बारे में, जिनमें भारत के स्याह दौर की कहानियां दिखाई गईं। 

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फिल्म 'मौसम' 'बॉम्बे' 'इमरजेंसी' और 'कश्मीर फाइल्स' - फोटो : अमर उजाला

हाल ही में दिलजीत दोसांझ की फिल्म ‘पंजाब 95’ की रिलीज टल गई है। इस फिल्म की कहानी की बात की जाए तो यह मानवधिकार कार्यकर्ता जसवंत सिंह की बायोपिक है। पंजाब 90 के दशक में उग्रवाद की आग में जल रहा था, तब पुलिस द्वारा भी कुछ गलत काम किया गया। उसी बात को जसवंत सिंह सामने लाए। बाद में जसवंत सिंह गायब हो गए। क्या हुआ उनके साथ? किस बात का खुलासा उन्होंने किया? यही सब फिल्म में दिखाया जाएगा। दिलजीत की ही फिल्म भारत के किसी स्याह या काले दौर को नहीं दिखा रही है, इसके अलावा भी कई फिल्मों में ऐसी कहानियां कही गई हैं, जाे भारत के मुश्किल समय, स्याह दौर को दिखाती हैं। 

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फिल्म इमरजेंसी - फोटो : सोशल मीडिया

इमरजेंसी
हाल ही में रिलीज हुई कंगना रनौत की पॉलिटिकल ड्रामा फिल्म ‘इमरजेंसी’ में भी पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी द्वारा देश में लगाए गए आपातकाल की कहानी है। साल 1975 से 1977 तक 21 महीने तक देश में इमरजेंसी लगी रही। इस दौरान लोगों के विरोध करने की आजादी छीन ली गई, प्रेस की आजादी पर रोक लगी। ऐसा बहुत कुछ हुआ, जिसे भारत राजनीतिक इतिहास में एक काले अध्याय के तौर पर ही याद किया जाता है। 

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द कश्मीर फाइल्स - फोटो : एक्स (ट्विटर)

कश्मीर फाइल्स
हिस्ट्री-ड्रामा फिल्म ‘कश्मीर फाइल्स’ भी कश्मीरी पंडितों की क्रूर हत्याओं और उनके ही घर से निकाले जाने की कहानी है। यह घटना भी 1990 के शुरुआत में कश्मीर में घटी। उस दौर में कश्मीर में आतंकवाद और चरमपंथी लोगों की सोच हावी हो गई थी। फिल्म ‘कश्मीर फाइल्स’ में कश्मीरी पंडितों के इसी दर्द, तकलीफ और विस्थापन को दिखाया गया है। इस फिल्म में अनुपम खेर ने एक अहम किरदार निभाया था।

 

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काय पो छे - फोटो : यूट्यूब ग्रैब

काय पो छे
फिल्म ‘काय पो छे’ 2000 से लेकर 2012 तक की कहानी को समेटती है, इसमें गुजरात में आए भूकंप, राजनीतिक अस्थिरता और सांप्रदायिक दंगे, फिल्म की कहानी और किरदारों की जिंदगी को प्रभावित करते हैं। फिल्म में सुशांत सिंह राजपूत, राजकुमार राव ने मुख्य भूमिकाएं की थीं। फिल्म 'काय पो छे' में तीन दोस्तों की जिंदगी और उनके सपनों को दिखाया गया है। इनकी जिंदगी पर गुजरात में घटने वाली बुरी घटनाओं का क्या असर होता है, यही फिल्म की स्टोरी लाइन है।  

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शाहिद कपूर की फिल्म 'मौसम' - फोटो : एक्स (ट्विटर)

मौसम
शाहिद कपूर की रोमांटिक-ड्रामा फिल्म ‘मौसम’ भी 1992 से 2002 के समय काल में हुए बाबरी विध्वंस, बॉम्बे दंगे, बॉम्बे बम विस्फोट (1993), कारगिल युद्ध, 9/11 का हमला, गोधरा दंगे, जैसी घटनाओं को दिखाती है। इन घटनाओं के साथ ही फिल्म की प्रेम कहानी आगे बढ़ती है। फिल्म में शाहिद कपूर के अपोजिट सोनम कपूर नजर आईं। 

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फिल्म 'ब्लैक फ्राइ डे' में केके मेनन - फोटो : एक्स (ट्विटर)

ब्लैक फ्राइडे
साल 1993 में बॉम्बे (अब मुंबई) में हुए बम विस्फोटक के पीछे कौन लोग थे, उन्हें पुलिस कैसे पकड़ती है, पूछताछ करती है, इस पर ही फिल्म ‘ब्लैक फ्राइडे’ की कहानी आधारित थी। 1993 में हुए बम विस्फोट से पूरा मुंबई दहल गया था। साथ ही देश की सुरक्षा भी खतरे में आ गई थी। इस बम विस्फोट के तार बाद में पड़ोसी मुल्क पाकिस्तान तक जुड़े थे। फिल्म में केके मेनन ने इस केस की जांच करने वाले पुलिस ऑफिसर का रोल निभाया था। 

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फिल्म 'बॉम्बे' के कुछ दृश्य - फोटो : एक्स (ट्विटर)
बॉम्बे
फिल्म ‘बॉम्बे’ एक प्रेमी कहानी जरूरी थी, जिसमें लड़का-लड़की अलग-अलग धर्मों से संबंध रखते हैं, वे अपना गृह नगर छोड़ मुंबई आते हैं, शादी करते हैं, इनके बच्चे होते हैं। जिंदगी सामान्य चल रही होती है, ऐसे में बॉम्बे (अब मुंबई) में सांप्रदायिकता की आग फैल जाती है, दंगे होते हैं। इसमें इनके बच्चे फंस जाते हैं। एक परिवार कैसे सांप्रदायिकता के कारण प्रभावित होता है, यह सब फिल्म में दिखाया गया है। 
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